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लाल किला हमला केस में आरोपी की जमानत खारिज, पत्नी से मिलने की अनुमति

दिल्ली: हाई कोर्ट ने लाल किला परिसर में हुए आतंकी हमले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में अल फलाह ट्रस्ट के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने जवाद सिद्दीकी की छह सप्ताह की अंतरिम जमानत देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मानवीय आधार को देखते हुए उन्हें अपनी पत्नी से मिलने के लिए सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल देने की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस तथ्य पेश नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि जवाद सिद्दीकी की पत्नी की स्थिति अचानक गंभीर हो सकती है या कोई आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। अदालत ने कहा कि पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर संवेदना है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी को 21, 23 और 25 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक पत्नी से मिलने की अनुमति दी है। हालांकि, यह मुलाकात केवल उनकी पत्नी तक सीमित रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इन दिनों के दौरान किसी अन्य व्यक्ति से मुलाकात नहीं कर सकेंगे।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जवाद सिद्दीकी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने आशंका जताई कि यदि उन्हें अंतरिम जमानत देकर रिहा किया जाता है तो वह फरार हो सकते हैं या फिर जांच से जुड़े गवाहों और सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जवाद सिद्दीकी की जमानत याचिका का विरोध किया था। ईडी की ओर से दलील दी गई थी कि अगर आरोपी को अंतरिम जमानत मिलती है तो वह मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। जांच एजेंसी ने अदालत से कहा था कि अंतरिम जमानत की जगह उन्हें कस्टडी पैरोल के जरिए पत्नी से मिलने की अनुमति दी जा सकती है।
जवाद सिद्दीकी ने अदालत में अपनी याचिका में बताया था कि उनकी पत्नी ओवेरियन कैंसर की चौथी स्टेज से जूझ रही हैं और उनकी हालत गंभीर है। उन्होंने मानवीय आधार पर छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग की थी। जवाद सिद्दीकी ने कहा था कि वह अपनी पत्नी के जीवन के इस कठिन दौर में उनके साथ रहना चाहते हैं और उनकी देखभाल करना चाहते हैं।
हालांकि, अदालत ने कहा कि मानवीय आधार महत्वपूर्ण है, लेकिन आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों, मामले की स्थिति और उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल भावनात्मक या मानवीय परिस्थितियों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया को कमजोर नहीं किया जा सकता।
यह मामला अल फलाह ट्रस्ट से जुड़े मनी लांड्रिंग आरोपों से संबंधित है। आरोप है कि फरीदाबाद स्थित अल फलाह ट्रस्ट के शिक्षण संस्थानों में छात्रों से ली गई फीस से जुड़े वित्तीय लेनदेन में अनियमितताएं हुईं और अवैध तरीके से फंड तैयार किया गया। इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है।
इससे पहले नौ जून को ट्रायल कोर्ट ने भी जवाद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने भी उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, लेकिन पत्नी से मुलाकात के लिए सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल देकर मानवीय पक्ष को ध्यान में रखा।
अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि जवाद सिद्दीकी की कस्टडी पैरोल के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने इस मामले को हाई रिस्क अंडरट्रायल केस मानते हुए सुरक्षा संबंधी सभी जरूरी कदम उठाने को कहा है। अब जवाद सिद्दीकी को निर्धारित तारीखों पर सुरक्षा घेरे में अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति होगी।





