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सुप्रीम कोर्ट के जज से ठगी की कोशिश, फर्जी ट्रैफिक चालान का लिया सहारा

SHIDDHANT
16 Jan 2026 8:55 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के जज से ठगी की कोशिश, फर्जी ट्रैफिक चालान का लिया सहारा
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Delhi दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बताया कि हाल ही में साइबर ठगों ने उन्हें भी निशाना बनाने की कोशिश की। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें एक फर्जी ट्रैफिक चालान का मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें एक लिंक दिया गया था। जस्टिस शर्मा ने बताया कि इस लिंक पर क्लिक करने से उन्हें एक ऐसी वेबसाइट पर ले जाया गया, जो सरकारी साइट जैसी दिख रही थी। उन्होंने कहा कि वे समय रहते इस धोखाधड़ी को पहचानने में सफल रहे। जस्टिस शर्मा ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उच्च पदस्थ न्यायाधीशों को भी इस तरह के फ्रॉड का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों के लिए सतर्क रहना और भी जरूरी है।
यह घटना उस समय सामने आई जब जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने दो पुलिस अधिकारियों के बैंक खातों में पैसे जमा करने के बाद उनसे धोखाधड़ी करने की कोशिश की। आरोपी ने फर्जी तरीके अपनाकर पुलिस अधिकारियों को फंसाने की योजना बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया और उसे जेल में रखने का आदेश दिया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब उच्च पदस्थ व्यक्तियों और अधिकारियों को भी टारगेट कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि फर्जी मैसेज और लिंक के जरिए किसी भी व्यक्ति के पैसे आसानी से खो सकते हैं।
जस्टिस शर्मा ने जनता से अपील की कि किसी भी अनजान संदेश या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जाँच करें। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके लिए जागरूकता और सावधानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे अपराधों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और साइबर ठगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी ट्रैफिक चालान, बैंक लिंक और सरकारी वेबसाइट के नकली संस्करणों के माध्यम से लोग आसानी से धोखाधड़ी के शिकार बन सकते हैं। इस प्रकार के फ्रॉड से बचने के लिए सत्यापित पोर्टल और आधिकारिक चैनलों का उपयोग करना अनिवार्य है। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि साइबर अपराधी किसी भी वर्ग, पद या पेशे को निशाना बना सकते हैं। जस्टिस शर्मा की चेतावनी आम नागरिकों और संगठनों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षित रह सकें।
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