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ATF के दाम 5.46% बढ़े महंगा हो सकता है हवाई सफर

Kavita2
2 Sept 2026 9:26 AM IST
ATF के दाम 5.46% बढ़े महंगा हो सकता है हवाई सफर
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नई दिल्ली। दूध और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद महंगाई का एक और असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। मंगलवार को विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5.46 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि के बाद एटीएफ की कीमत 115 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। विमान ईंधन की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस की परिचालन लागत में इजाफा होने की संभावना है, जिसका असर आने वाले समय में हवाई किराये पर भी पड़ सकता है।

एयरलाइंस के लिए ईंधन सबसे महत्वपूर्ण परिचालन खर्चों में शामिल होता है। विमान को उड़ाने के लिए बड़ी मात्रा में एटीएफ की जरूरत होती है और इसकी कीमत में होने वाला बदलाव सीधे कंपनियों की लागत को प्रभावित करता है। ऐसे में एटीएफ महंगा होने के बाद विमानन कंपनियों के सामने बढ़ी हुई लागत का दबाव बढ़ सकता है।

मंगलवार को हुई कीमत वृद्धि के बाद विमान ईंधन की कीमत 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पहले यह कीमत 115 रुपये प्रति लीटर थी। यानी प्रति लीटर 6.28 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिशत के हिसाब से यह वृद्धि 5.46 फीसदी बैठती है। ईंधन की कीमत में इतनी बढ़ोतरी का असर एयरलाइंस के कुल खर्च पर पड़ना स्वाभाविक है।

हालांकि एटीएफ की कीमत बढ़ने के तुरंत बाद हवाई किराये में बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है। विमानन कंपनियां कई कारकों को ध्यान में रखकर किराया तय करती हैं। इनमें मांग, सीटों की उपलब्धता, रूट, प्रतिस्पर्धा, परिचालन खर्च और अन्य शुल्क शामिल होते हैं। लेकिन यदि ईंधन की बढ़ी हुई कीमत लंबे समय तक बनी रहती है तो कंपनियां अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डाल सकती हैं।

हवाई यात्रियों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमान ईंधन की कीमत में बदलाव का असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि किराये में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी यह एयरलाइंस की व्यावसायिक रणनीति और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

एयरलाइन उद्योग पहले से ही कई तरह की लागत का सामना करता है। विमान संचालन के अलावा कर्मचारियों का खर्च, विमान रखरखाव, एयरपोर्ट शुल्क, नेविगेशन शुल्क और अन्य परिचालन लागत भी कंपनियों के खर्च में शामिल होती हैं। ऐसे में ईंधन की कीमत बढ़ने से लागत का दबाव और बढ़ सकता है।

एटीएफ की कीमतों में बदलाव का असर केवल एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहता। विमानन क्षेत्र से जुड़े दूसरे कारोबार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यात्रियों की संख्या, टिकटों की मांग और एयरलाइंस के परिचालन फैसलों पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। यदि हवाई यात्रा महंगी होती है तो कुछ यात्री वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं, खासकर उन रूटों पर जहां रेल या सड़क परिवहन उपलब्ध है।

दूसरी ओर, विमानन कंपनियों के लिए बढ़ती ईंधन लागत को संभालना भी चुनौतीपूर्ण होगा। कंपनियां आम तौर पर ईंधन की लागत को ध्यान में रखकर टिकट की कीमतें तय करती हैं। यदि लागत बढ़ती है लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण किराया बढ़ाना संभव नहीं होता तो कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।

मंगलवार की बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब घरेलू स्तर पर कई जरूरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को लेकर महंगाई की चिंता बनी हुई है। दूध और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद एटीएफ की कीमत में इजाफा होने से परिवहन लागत और हवाई यात्रा को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

कमर्शियल एलपीजी की कीमत बढ़ने का असर होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है, जबकि एटीएफ की कीमत बढ़ने का प्रभाव विमानन क्षेत्र पर पड़ता है। दोनों ही मामलों में कारोबारियों के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है और इसका कुछ हिस्सा अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना रहती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हवाई किराये पर एटीएफ की कीमत का असर समझने के लिए आने वाले दिनों में एयरलाइंस की प्रतिक्रिया और टिकटों की कीमतों में बदलाव पर नजर रखनी होगी। अगर कंपनियां बढ़ी हुई ईंधन लागत को किराये में शामिल करती हैं तो यात्रियों को टिकट के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। वहीं अगर कंपनियां प्रतिस्पर्धा के कारण बढ़ी लागत खुद वहन करती हैं तो तत्काल किराया बढ़ना जरूरी नहीं होगा।

यात्रियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एटीएफ की कीमत में 5.46 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। अब यह देखना होगा कि एयरलाइंस इस बढ़ी हुई लागत का सामना किस तरह करती हैं। आने वाले दिनों में प्रमुख घरेलू रूटों पर टिकटों की कीमतों में होने वाले बदलाव से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

कुल मिलाकर एटीएफ के दाम 115 रुपये से बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर होने से विमानन कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा असर तुरंत यात्रियों पर पड़ेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है। लेकिन अगर ईंधन की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं तो हवाई किराये पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को आने वाले दिनों में टिकट की कीमतों पर नजर रखनी होगी।

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