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ब्रिक्स संसदीय मंच पर विधानसभा अध्यक्ष तोमर का बड़ा बयान
Ratna Netam
26 Oct 2026 3:06 PM IST

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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने ब्रिक्स संसदीय मंच की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह मंच विभिन्न देशों के सामने मौजूद चुनौतियों की पहचान करने और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में मदद करता है। उन्होंने संसदीय सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संवाद और साझा विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे मंच देशों के बीच आपसी समझ बढ़ाने और नीतिगत विषयों पर विचार-विमर्श के अवसर प्रदान करते हैं।तोमर के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में विभिन्न देशों के बीच सहयोग और संवाद की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी बदलाव और सामाजिक चुनौतियों जैसे विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स संसदीय मंच इन विषयों पर अनुभव साझा करने और भविष्य की प्राथमिकताओं को समझने का अवसर देता है।
वैश्विक चुनौतियों की पहचान करने में मंच की अहम भूमिका
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय मंच केवल संसदीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों को समझने का भी अवसर प्रदान करता है।आज दुनिया आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी विकास से जुड़ी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का प्रभाव अलग-अलग देशों पर अलग-अलग रूप में पड़ता है।ऐसी परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद के माध्यम से समस्याओं की पहचान करना और उनके समाधान की संभावनाओं पर विचार करना आवश्यक है।
भविष्य की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण संसदीय संवाद
ब्रिक्स संसदीय मंच के माध्यम से सदस्य देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव और विचार साझा कर सकते हैं। इससे विभिन्न देशों की विधायी प्रक्रियाओं, विकास योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समझने में सहायता मिलती है।संसदीय संस्थाएं कानून निर्माण और नीतियों की समीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में विभिन्न देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ने से साझा चुनौतियों के समाधान के लिए उपयोगी सुझाव सामने आ सकते हैं।तोमर ने भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में संसदीय संवाद की उपयोगिता पर जोर दिया। उनका बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास और सहयोग के नए अवसरों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर
ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह है। इसकी शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के सहयोग से हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और समय के साथ समूह का विस्तार हुआ।ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होती रही है। संसदीय मंच इस सहयोग को विधायी संस्थाओं के स्तर तक विस्तारित करने का अवसर प्रदान करता है।विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच नियमित बातचीत से संसदीय परंपराओं और नीतिगत अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल सकता है।
विकासशील देशों की आवाज को मिलता है मंच
ब्रिक्स की एक महत्वपूर्ण विशेषता विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है। वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में इन देशों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।व्यापार, आधारभूत संरचना, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।संसदीय प्रतिनिधियों के बीच संवाद इन विषयों पर विभिन्न दृष्टिकोण सामने लाने में सहायक हो सकता है। इससे देशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप नीतिगत विकल्पों पर विचार करने का अवसर मिलता है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संवाद जरूरी
नरेंद्र सिंह तोमर के बयान का प्रमुख संदेश संसदीय संस्थाओं के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करना है। संसद और विधानसभाएं जनता की आकांक्षाओं तथा विकास से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैंअंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर भागीदारी से जनप्रतिनिधियों को अन्य देशों की व्यवस्थाओं और विकास संबंधी प्रयासों को समझने का अवसर मिलता है।ऐसे संवाद से कानून निर्माण, संसदीय प्रक्रियाओं और सार्वजनिक नीतियों से संबंधित उपयोगी अनुभव साझा किए जा सकते हैं।
भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सहयोग महत्वपूर्ण
विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने ब्रिक्स संसदीय मंच को भविष्य की दिशा तय करने में सहायक बताया है। उनका यह विचार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग और साझा विकास की आवश्यकता को रेखांकित करता है।ब्रिक्स संसदीय मंच के माध्यम से विभिन्न देशों के प्रतिनिधि आपसी संवाद को मजबूत कर सकते हैं और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नई संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।इस प्रकार संसदीय सहयोग न केवल देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को समझने और विकास की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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