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अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान, रेलवे के सात प्रमुख रूटों का होगा विस्तार
Ratna Netam
7 Nov 2026 3:09 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में लगातार बढ़ती यात्रियों की संख्या और मालगाड़ियों के दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ी योजना तैयार की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे देश के सात प्रमुख हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार लाइन वाला बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इन रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही काफी अधिक रहती है, जिसके कारण कई स्थानों पर परिचालन संबंधी दबाव और भीड़भाड़ की समस्या सामने आती है। सरकार का लक्ष्य इन मार्गों पर अतिरिक्त रेल लाइनें विकसित कर यात्री और मालगाड़ियों के संचालन को अधिक सुचारु बनाना है।रेल मंत्री के अनुसार, देश के सात प्रमुख रेल कॉरिडोर लगभग 11 हजार किलोमीटर लंबे हैं। ये कॉरिडोर भारतीय रेलवे के कुल नेटवर्क का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा हैं, लेकिन देश के कुल रेल यातायात का करीब 41 प्रतिशत भार इन्हीं मार्गों पर रहता है। इस वजह से इन रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से ट्रेनों की आवाजाही के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी और मौजूदा नेटवर्क पर दबाव कम किया जा सकेगा।
इन सात प्रमुख रेल मार्गों पर होगा विस्तार
भारतीय रेलवे ने जिन सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार लाइन वाला बनाने की योजना बनाई है, उनमें देश के प्रमुख महानगरों और महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाले रेल मार्ग शामिल हैं। ये मार्ग दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ते हैं।
इन सात कॉरिडोर में शामिल हैं:
1. दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग।
2. हावड़ा-चेन्नई रेल मार्ग।
3. चेन्नई-मुंबई रेल मार्ग।
4. मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग।
5. दिल्ली-चेन्नई रेल मार्ग।
6. मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग।
7. दिल्ली-गुवाहाटी रेल मार्ग।
इन मार्गों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, औद्योगिक परिवहन और यात्रियों की आवाजाही के लिहाज से ये कॉरिडोर काफी महत्वपूर्ण हैं। रेलवे का मानना है कि इन मार्गों पर अतिरिक्त लाइनें बनने से ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा।
11 हजार किलोमीटर के नेटवर्क पर बढ़ेगी क्षमता
रेल मंत्री ने बताया कि सातों हाई डेंसिटी कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 11 हजार किलोमीटर है। इनमें से करीब 2 हजार किलोमीटर हिस्से को पहले ही चार लाइन वाला बनाया जा चुका है। इसके अलावा लगभग 5 हजार किलोमीटर के लिए परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और उन पर काम चल रहा है। शेष करीब 4 हजार किलोमीटर हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जिन हिस्सों पर ट्रेनों का दबाव सबसे अधिक है, वहां अतिरिक्त रेल लाइनें विकसित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे रेलवे को मौजूदा ट्रेनों की समय-सारणी बेहतर बनाने और भविष्य में नई यात्री एवं मालगाड़ियों को शामिल करने में मदद मिलेगी।
कैबिनेट ने 20,804 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को दी मंजूरी
रेलवे नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 20,804 करोड़ रुपये से अधिक है और इनके तहत लगभग 1,196 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।इन परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन, बिलासपुर (उस्लापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और सिकंदराबाद-काजीपेट रेल मार्ग का विस्तार शामिल है। इसके अलावा अरक्कोणम-रेनिगुंटा, व्हाइटफील्ड-बंगारपेट, होसुर-ओमलूर और सलेम-करूर-दिंडीगुल रेल खंडों पर भी लाइन विस्तार का काम प्रस्तावित है।इन परियोजनाओं से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और अन्य क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासकर बिलासपुर-पेंड्रा रोड और खड़गपुर-झारसुगुड़ा जैसे रेल खंडों का विस्तार छत्तीसगढ़ तथा पूर्वी भारत के रेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण है।
यात्री ट्रेनों की देरी कम करने में मिलेगी मदद
रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों का दबाव है। कई रेल खंडों पर यात्री और मालगाड़ियों को एक ही नेटवर्क का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में एक ट्रेन के विलंबित होने का असर दूसरी ट्रेनों के संचालन पर भी पड़ सकता है।अतिरिक्त रेल लाइनें उपलब्ध होने से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा। रेलवे को ट्रेनों को क्रॉस कराने, उन्हें निर्धारित समय पर चलाने और मालगाड़ियों के लिए अलग परिचालन व्यवस्था बनाने में अधिक सुविधा मिलेगी।इसका लाभ लंबी दूरी की ट्रेनों के यात्रियों को भी मिल सकता है। व्यस्त मार्गों पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी। हालांकि, वास्तविक रूप से देरी कितनी कम होगी, यह परियोजनाओं के पूरा होने और परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
माल परिवहन और व्यापार को भी मिलेगा बढ़ावा
रेलवे के सात प्रमुख कॉरिडोर केवल यात्री परिवहन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि देश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास में भी इनकी बड़ी भूमिका है। इन मार्गों से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान का परिवहन किया जाता है।रेल लाइनों की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी। इससे उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा परिवहन लागत और माल पहुंचाने में लगने वाले समय को कम करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।रेल मंत्री ने रेलवे के विस्तार को देश की आर्थिक गतिविधियों और भविष्य की परिवहन जरूरतों से जोड़ते हुए इसकी महत्ता बताई है। सरकार का उद्देश्य रेलवे को अधिक सक्षम, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम बनाना है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई योजना
भारत में रेल यात्रियों और माल परिवहन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है। सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार लाइन वाला बनाने की योजना इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।कुल मिलाकर रेलवे की यह पहल देश के प्रमुख रेल मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने, ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर बनाने और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इस योजना की सफलता परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, बजट के प्रभावी इस्तेमाल और आधुनिक परिचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
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