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LPU हिंसा पर अशोक मित्तल बोले साजिश के तहत फैली अफवाहें
Ratna Netam
1 Oct 2026 3:55 PM IST

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चंडीगढ़। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हाल ही में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन और तोड़फोड़ को लेकर विश्वविद्यालय के चांसलर और बीजेपी सांसद अशोक कुमार मित्तल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि कैंपस में हुई हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे पंजाब में अराजकता फैलाने और राज्य को अस्थिर करने के उद्देश्य से रची गई एक “सुनियोजित साजिश” हो सकती है। यह मित्तल का आरोप है और मामले की जांच अभी जारी है।
मित्तल ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैली अपुष्ट और कथित रूप से मनगढ़ंत जानकारियों ने छात्रों के बीच डर और गुस्सा पैदा किया। उनके मुताबिक खास तौर पर Reddit और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न और उसके बाद आत्महत्या से जुड़े दावे तेजी से प्रसारित हुए। इन्हीं दावों के बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में इकट्ठा हुए और विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया।
उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच और पुलिस की शुरुआती पड़ताल में कथित घटना की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भी अब पंजाब पुलिस से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है कि जिस कथित यौन उत्पीड़न की चर्चा के बाद विरोध शुरू हुआ, ऐसी कोई घटना वास्तव में हुई थी या नहीं। इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
LPU में 27 सितंबर को विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया था। छात्रों के एक समूह ने कैंपस की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, कुछ वस्तुओं में आग लगाई और बाद में जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बाधित किया। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। हिंसा, हाईवे ब्लॉक करने और यूनिवर्सिटी परिसर में कथित लूटपाट को लेकर अलग-अलग मामले भी दर्ज किए गए हैं।
अशोक मित्तल ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना किसी पुष्टि के गंभीर आरोप फैलाए गए और बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें सही मान लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी संवेदनशील जानकारी को बिना किसी आधिकारिक शिकायत, पीड़ित की पहचान या पुष्टि के इतनी तेजी से कैसे प्रसारित किया गया।
जांच से जुड़ी एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि LPU और चितकारा यूनिवर्सिटी में फैली अशांति से पहले सोशल मीडिया पर कथित यौन उत्पीड़न, आत्महत्या और छात्रों के गायब होने जैसे दावे प्रसारित किए गए थे। जांच एजेंसियां अब इन पोस्ट के स्रोत और उन्हें फैलाने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
मित्तल ने राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में हुई घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि LPU में हिंसा से करीब एक दिन पहले चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया पर छात्राओं के लापता होने और दूसरी घटनाओं से संबंधित अपुष्ट दावे फैले थे। इसके बाद वहां भी छात्रों की भीड़ जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
चितकारा यूनिवर्सिटी मामले में पुलिस ने बताया था कि दो छात्राओं के लापता होने या उनकी मौत से जुड़े सोशल मीडिया दावों की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस ने हिंसा और बाहरी लोगों की संभावित भूमिका की जांच शुरू की थी। वहां पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने और एक पुलिसकर्मी के साथ कथित बदसलूकी की भी जांच की जा रही है।
मित्तल ने दोनों घटनाओं के समय और तरीके में समानता की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग जानबूझकर छात्रों की भावनाओं को भड़काकर पंजाब के शैक्षणिक संस्थानों का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि LPU की प्रतिष्ठा और पंजाब की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
मित्तल ने दावा किया कि विरोध के दौरान कुछ ऐसे लोग भी नजर आए जिन्होंने अपनी पहचान छिपाई हुई थी और जिनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं। उनके अनुसार यह स्थिति सामान्य छात्र विरोध से अलग दिखाई देती है और इसी वजह से उन्हें घटना के पीछे पूर्व नियोजित गतिविधि का संदेह है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
वहीं पुलिस ने हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। अभी तक पुलिस ने इस मामले में किसी व्यापक राजनीतिक या संगठित साजिश का अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट भी पहुंच चुका है। एक याचिका में पूरी घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार और पुलिस से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा मूल दावा सही था या नहीं।
अशोक मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान होने पर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से भी अपील की कि सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी गंभीर जानकारी को बिना पुष्टि के सच न मानें।
फिलहाल LPU में हुई हिंसा के कारणों, सोशल मीडिया अफवाहों की उत्पत्ति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच जारी है। मित्तल इसे सुनियोजित साजिश बता रहे हैं, जबकि अदालत ने पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। जांच पूरी होने और हाई कोर्ट में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही यह साफ होगा कि हिंसा के पीछे केवल अफवाहें थीं या इसके अलावा कोई संगठित भूमिका भी सामने आती है।
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