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सेना को थिएटर-आधारित ढांचे की ओर बढ़ना होगा: General Dwivedi

Kavita2
30 Jun 2026 1:34 PM IST
सेना को थिएटर-आधारित ढांचे की ओर बढ़ना होगा: General Dwivedi
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New Delhi नई दिल्ली : वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भविष्य के युद्ध में अधिक संयुक्त, एकीकृत और रंगमंच-केंद्रित होंगे, इसलिए सशस्त्र बलों की दिशा स्पष्ट रूप से “एक साथ देखना, एक साथ निर्णय लेना और एक साथ कार्रवाई करना” होनी चाहिए। उन्होंने यह बात मंगलवार को अपने विदाई समारोह के दौरान कही, जहां उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।

साउथ ब्लॉक के लॉन में आयोजित इस औपचारिक कार्यक्रम में सेना प्रमुख को भावपूर्ण विदाई दी गई। 40 वर्षों से अधिक की सेवा देने वाले जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह उनके लिए गर्व, संतोष और गहरी कृतज्ञता का क्षण है। उन्होंने कहा कि सेना की सेवा करना उनके जीवन का सबसे सम्मानजनक अनुभव रहा है।

जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने जून 2024 में भारतीय सेना के 30वें सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण, तकनीकी एकीकरण और संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया।

विदाई समारोह के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत रणनीति बेहद आवश्यक हो गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में युद्ध अलग-अलग नहीं बल्कि संयुक्त रूप से लड़े जाएंगे, जहां सभी बल एक ही रणनीतिक ढांचे के तहत काम करेंगे।

उन्होंने “थिएटर कमांड” की अवधारणा की ओर संकेत करते हुए कहा कि सशस्त्र बलों को एक साझा दृष्टिकोण के साथ काम करना होगा, जिसमें सूचनाओं का आदान-प्रदान, निर्णय प्रक्रिया और त्वरित कार्रवाई एकीकृत रूप में हो। उनके अनुसार, यही भविष्य की सैन्य रणनीति की दिशा होगी।

कार्यक्रम के दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी उनकी सेवाओं की सराहना की। गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें औपचारिक सम्मान दिया गया, जो उनके लंबे और सफल सैन्य करियर का प्रतीक माना गया।

अपने अंतिम संबोधन में जनरल द्विवेदी ने जवानों और अधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इन मूल्यों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक, साइबर सुरक्षा और आधुनिक युद्ध प्रणालियों के दौर में सेना को लगातार खुद को अपडेट रखना होगा। बदलते समय में प्रशिक्षण और रणनीति दोनों को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की आवश्यकता है।

सेना प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल को सेना के आधुनिकीकरण और संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में कई रणनीतिक सुधारों और तकनीकी बदलावों की दिशा में काम हुआ।

कुल मिलाकर, जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का विदाई संदेश न केवल उनके कार्यकाल का सार था, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के भविष्य की दिशा का संकेत भी माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में “एक साथ सोचने और एक साथ कार्रवाई करने” की रणनीति ही सैन्य शक्ति का आधार बनेगी।

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