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सेना प्रमुख धीरज सेठ ने मणिपुर में सुरक्षा हालात की समीक्षा की

SHIDDHANT
28 July 2026 7:25 PM IST
सेना प्रमुख धीरज सेठ ने मणिपुर में सुरक्षा हालात की समीक्षा की
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Delhi दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने मणिपुर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की है। इस दौरान उन्हें राज्य में सुरक्षा हालात, ऑपरेशनल गतिविधियों और विभिन्न सैन्य संरचनाओं की तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सेना प्रमुख, भारतीय सेना की ‘स्पीयर कोर’ की अपनी यात्रा के दौरान मणिपुर पहुंचे हैं। मणिपुर में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को असम राइफल्स (दक्षिण), असम राइफल्स (पूर्व) के महानिरीक्षक व रेड शील्ड डिवीजन की ऑपरेशनल तैयारियों पर भी विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
अधिकारियों ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों से भी जनरल धीरज सेठ को अवगत कराया। यात्रा के दौरान सेना प्रमुख ने क्षेत्र में विभिन्न सैन्य संरचनाओं और असम राइफल्स द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्र निर्माण संबंधी प्रयासों की भी समीक्षा की। उन्हें शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी गई।
सेना प्रमुख ने यहां तैनात जवानों से भी मुलाकात की और उन्हें हर समय सतर्क रहने, ऑपरेशनल दृष्टि से चुस्त-दुरुस्त बने रहने तथा भविष्य में उभरने वाली सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने जवानों से क्षेत्र में स्थायी शांति बनाए रखने के प्रयासों में अपनी भूमिका पूरी प्रतिबद्धता और पेशेवर दक्षता के साथ निभाने का भी आग्रह किया। गौरतलब है कि बीते 21 जुलाई को ही मणिपुर में शांति और स्थिरता बहाली के के प्रयासों को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यहां प्रतिबंधित संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (पीपुल्स वॉर ग्रुप) के 46 सक्रिय उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
इंफाल पूर्व जिले स्थित मण्ट्रीपुखरी गैरीसन में इन लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने 28 अत्याधुनिक हथियार भी सुरक्षा बलों के समक्ष जमा कराए। इनमें एके राइफलें, 303 राइफलें, पिस्तौल, डबल बैरल और सिंगल बैरल बंदूकें, इंसास राइफल, सेल्फ लोडिंग राइफल, कार्बाइन मशीन गन और रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड लांचर शामिल थे। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में मैगजीन, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री भी जमा कराई गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह आत्मसमर्पण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इनमें से कोई भी उग्रवादी पहले हुए किसी शांति समझौते का हिस्सा नहीं था। सभी ने स्वेच्छा से हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य नागरिक जीवन अपनाने का निर्णय लिया है।
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