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Aravalli : खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, माइनिंग लीज़ होल्डर्स को फिलहाल राहत नहीं

Kavita2
15 May 2026 12:52 PM IST
Aravalli : खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, माइनिंग लीज़ होल्डर्स को फिलहाल राहत नहीं
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Delhi दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अरावली पहाड़ियों और रेंज में खनन गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि वह फिलहाल माइनिंग लीज़ होल्डर्स के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि उसे इस क्षेत्र में खनन को लेकर “काफी परेशान करने वाला” फीडबैक मिला है, जिसके कारण वह पहले सभी पहलुओं की पूरी तरह समीक्षा करना चाहता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह मुद्दा केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव भी जुड़े हुए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक उसे पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिलती, तब तक किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को टुकड़ों में नहीं सुना जाएगा और इसे समग्र रूप से देखा जाएगा। कोर्ट ने कहा, “हम इस मामले को टुकड़ों में नहीं सुनेंगे। जब तक हम पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाते, हम किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देंगे।”

यह मामला “इन री: डेफिनिशन ऑफ अरावली हिल्स एंड रेंज एंड एंसिलरी इश्यू” शीर्षक वाले एक सू मोटो केस के तहत सुना जा रहा है। इस मामले में अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा और उससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों पर विस्तृत विचार किया जा रहा है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि फरवरी में उसने पर्यावरण मंत्रालय और अन्य संबंधित हितधारकों से एक विशेषज्ञ पैनल के गठन के लिए डोमेन एक्सपर्ट्स के नाम सुझाने को कहा था। इस पैनल का उद्देश्य अरावली पहाड़ियों और रेंज की सही परिभाषा तय करना और उससे जुड़े पारिस्थितिक मुद्दों का वैज्ञानिक अध्ययन करना है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि अरावली क्षेत्र में खनन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव गंभीर हो सकते हैं, इसलिए कोई भी निर्णय सावधानीपूर्वक और व्यापक जांच के बाद ही लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली क्षेत्र उत्तर भारत की पारिस्थितिक संतुलन प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां अनियंत्रित खनन से पर्यावरण, वन्यजीव और भूजल पर गंभीर असर पड़ सकता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक रिपोर्टों को ध्यान में रखे बिना किसी भी तरह की राहत या अनुमति पर विचार नहीं किया जाएगा।

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