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प्रदर्शनकारियों से अपील, अरुंधति रॉय बोलीं- संघर्ष लंबा है, सेहत का रखें ध्यान

नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों से देश की कई जानी-मानी हस्तियों ने उपवास खत्म करने की अपील की है। लेखक अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अर्थशास्त्री जयति घोष समेत कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान जारी करते हुए उनकी मांगों का समर्थन किया, लेकिन बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई।
सोमवार को जारी एक संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि वे प्रदर्शनकारियों के साहस, प्रतिबद्धता और आंदोलन को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना करते हैं। हालांकि, उन्होंने अपील की कि प्रदर्शनकारी अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने पर विचार करें, ताकि आगे की लड़ाई को मजबूती के साथ जारी रखा जा सके।
बयान में कहा गया कि प्रदर्शनकारी देशभर के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि वे उस उद्देश्य और दृढ़ संकल्प का सम्मान करते हैं, जिसके साथ प्रदर्शनकारी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष लंबा है और इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों का स्वस्थ रहना जरूरी है। अपील करते हुए कहा गया कि यह लड़ाई एक मैराथन की तरह है, जिसे लंबे समय तक जारी रखने के लिए ऊर्जा और नेतृत्व की आवश्यकता होगी।
संयुक्त बयान में कहा गया, "हम आपके उद्देश्य, दृढ़ निश्चय और साहस को सलाम करते हैं, जिसके साथ आप देशभर के छात्रों और युवाओं के लिए इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।" साथ ही प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया गया कि वे अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर आगे के संघर्ष के लिए अपनी ताकत बचाएं।
इस बयान में प्रदर्शनकारियों की मांगों का भी समर्थन किया गया। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि वे इस मांग को अपना समर्थन देते हैं और सरकार से मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील करते हैं।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने चिंता जताई कि यदि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई कदम नहीं उठाती है तो भूख हड़ताल कर रहे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए प्रदर्शनकारियों का सुरक्षित और स्वस्थ रहना भी जरूरी है।
जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। भूख हड़ताल के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है।
समर्थन में सामने आए लोगों में कला, साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े कई प्रमुख नाम शामिल हैं। अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और जयति घोष जैसे लोगों ने अपने बयान के जरिए प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।
इन हस्तियों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के संघर्ष को सम्मान देते हुए कहा कि उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन को लंबे समय तक चलाने के लिए रणनीति और धैर्य की जरूरत होती है। इसलिए उन्होंने प्रदर्शनकारियों से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों की ओर से अभी तक इस अपील पर अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सरकार की ओर से भी आंदोलन और इस्तीफे की मांग को लेकर कोई नया बयान नहीं आया है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस आंदोलन को लेकर चर्चा जारी है। कई लोग इसे छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण आवाज बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग भूख हड़ताल जैसे कदमों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी जता रहे हैं।
फिलहाल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सभी की नजर इस बात पर है कि प्रदर्शनकारी आगे क्या फैसला लेते हैं और सरकार की ओर से इस मामले में क्या प्रतिक्रिया आती है।





