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धर्म संसद में हेट स्‍पीच के मामलों में अलीगढ़ और हरिद्वार के जिलाधिकारियों से कार्रवाई करने का किया अपील

Chandravati Verma
14 Jan 2022 4:35 PM GMT
धर्म संसद में हेट स्‍पीच के मामलों में अलीगढ़ और हरिद्वार के जिलाधिकारियों से कार्रवाई करने का किया अपील
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हरिद्वार और दिल्ली में धर्म संसद में नफरती भाषणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने अलीगढ़ और हरिद्वार के जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर ऐहतियाती उपाय करने का आग्रह किया है

हरिद्वार और दिल्ली में धर्म संसद में नफरती भाषणों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली ने अलीगढ़ और हरिद्वार के जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर ऐहतियाती उपाय करने का आग्रह किया है ताकि वहां नफरत फैलाने वाले भाषण न होना सुनिश्चित हो सके। कुर्बान अली और पटना हाईकोर्ट की सेवानिवृत जज अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली और और हरिद्वार की धर्म संसद में नफरत फैलाने वाले भाषणों की एसआइटी से जांच कराए जाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर गत 12 जनवरी को याचिका में प्रतिपक्षी बनाई गई केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस व उत्तराखंड पुलिस को नोटिस जारी किया था। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा भविष्य में होने वाली धर्म संसद में नफरत फैलाने वाले भाषणों की आशंका जताए जाने पर याचिकाकर्ता को लोकल अथारिटी के समक्ष ज्ञापन देने की छूट भी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि 17 और 19 दिसंबर को हरिद्वार व दिल्ली में हुई धर्म संसद में नफरत फैलाने वाले भाषण दिये गए थे। आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।
हरिद्वार और अलीगढ़ के जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में याचिकाकर्ता कुर्बान अली ने कहा कि ये पत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ज्ञापन देने की दी गई छूट के मुताबिक दिये जा रहे हैं। अलीगढ़ के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा गया है कि ऐसी खबरें आ रही हैं कि अलीगढ़ में 22 - 23 जनवरी को अगली धर्म संसद होने वाली है। इसमें वे लोग भाग ले सकते हैं जिन्होंने 17 और 19 दिसंबर की धर्म संसद में भाषण दिये थे।
हरिद्वार के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में अली ने कहा है कि इस तरह की खबरें आ रही हैं कि शंकराचार्य परिषद के संत ने 17 और 19 दिसंबर को धर्म संसद में भाषण देने वालों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी के विरोध में 16 जनवरी को बैठक करने की घोषणा की है। पत्र में कहा गया है कि दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और अगर चुनाव के दौरान इस तरह के भाषण हुए तो इससे सामाजिक व्यवस्था अस्थिर हो सकती है और इसका देश की राजनीति पर भी गंभीर असर हो सकता है।


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