दिल्ली-एनसीआर

यौन शोषण के आरोपी पूर्व शिक्षक को अग्रिम जमानत देने से इनकार

Ratna Netam
19 Oct 2026 2:45 PM IST
यौन शोषण के आरोपी पूर्व शिक्षक को अग्रिम जमानत देने से इनकार
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नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे एक पूर्व शिक्षक को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि महिला को डराने-धमकाने, आपत्तिजनक वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देने और लगातार मानसिक दबाव बनाने के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे हालात में यह जांचना जरूरी है कि महिला कथित संबंध के दौरान स्वतंत्र रूप से और पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय लेने की स्थिति में थी या नहीं।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा ने 12 अक्टूबर को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल दोनों पक्षों के बालिग होने के आधार पर किसी रिश्ते को पूरी तरह आपसी सहमति वाला नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि सहमति के सवाल का आकलन करते समय रिश्ते की परिस्थितियों, दोनों पक्षों के बीच प्रभाव और कथित धमकियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
शिक्षक और छात्रा के रिश्ते को अदालत ने माना महत्वपूर्ण
अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस तथ्य पर ध्यान दिया कि आरोपी पहले महिला का शिक्षक रह चुका था। न्यायाधीश ने कहा कि शिक्षक और छात्रा के बीच संबंधों में प्रभाव और अधिकार की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में यदि किसी शिक्षक पर अपने पद या प्रभाव का दुरुपयोग कर महिला पर दबाव बनाने का आरोप लगता है, तो उसकी गंभीरता से जांच करना जरूरी है।अदालत के अनुसार, इस मामले में यह देखना आवश्यक है कि आरोपी ने कथित तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार किया और क्या महिला पर ऐसा दबाव बनाया गया, जिससे उसकी स्वतंत्र इच्छा प्रभावित हुई हो।
आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी का आरोप
मामले में महिला की ओर से लगाए गए आरोपों में धमकी और लगातार दबाव बनाने जैसी गंभीर बातें शामिल हैं। आरोप है कि आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी देकर महिला को प्रभावित करने की कोशिश की गई।अदालत ने माना कि इस तरह के आरोप सहमति की वास्तविक प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को निजी वीडियो सार्वजनिक करने या बदनामी का डर दिखाकर किसी संबंध में बने रहने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह जांचना आवश्यक हो जाता है कि उसके फैसले वास्तव में स्वतंत्र इच्छा से लिए गए थे या दबाव में।
पहली कथित घटना के समय नाबालिग होने का दावा
सुनवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। आरोप के अनुसार, जब महिला कॉलेज में आई और उसके साथ पहली बार कथित यौन संबंध बनाए गए, तब उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी।अदालत ने इस पहलू को गंभीर माना और कहा कि मामले की परिस्थितियों की बारीकी से जांच होनी चाहिए। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि बाद में दोनों पक्षों के बालिग होने का तथ्य शुरुआती घटनाओं से जुड़े आरोपों की जांच के महत्व को समाप्त नहीं करता।यह भी देखना जरूरी है कि कथित संबंध की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और उस दौरान आरोपी की शिक्षक के रूप में क्या भूमिका थी।
सहमति के सवाल पर अदालत की अहम टिप्पणी
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा ने कहा कि मौजूदा चरण में उपलब्ध आरोपों और परिस्थितियों को देखते हुए कथित संबंध को पूरी तरह सहमति पर आधारित मान लेना उचित नहीं होगा।अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी संबंध में स्वतंत्र सहमति का होना आवश्यक है। यदि धमकी, भय या प्रभाव के दुरुपयोग के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी जांच किए बिना सहमति के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
पूर्व शिक्षक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी पूर्व शिक्षक को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने विशेष रूप से महिला पर कथित दबाव, आरोपी की पूर्व शिक्षक के रूप में स्थिति और शुरुआती घटना के समय महिला की उम्र से जुड़े आरोपों को महत्वपूर्ण माना।हालांकि, अग्रिम जमानत खारिज होने का अर्थ आरोपी का दोषी साबित होना नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।अदालत के इस आदेश में यह महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि यौन शोषण के आरोपों वाले मामलों में सहमति का आकलन केवल उम्र या कथित रिश्ते के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि उससे जुड़ी परिस्थितियों और संभावित दबाव की भी जांच जरूरी है।
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