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CJP प्रोटेस्ट में हिंदू विरोधी नारे, 300 से ज्यादा पर FIR

Rajeshwari Nishad
18 Oct 2026 2:43 PM IST
CJP प्रोटेस्ट में हिंदू विरोधी नारे, 300 से ज्यादा पर FIR
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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली से गोवा तक पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों और दर्ज की गई एफआईआर को लेकर मामला चर्चा में है, वहीं गोवा के पणजी में 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि 11 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान हिंदुत्व के खिलाफ नारे लगाए गए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इस मामले में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी सख्त रुख अपनाया है। हालांकि, नारेबाजी से जुड़े आरोपों की जांच जारी है और मामले में आरोपों को अभी अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
गोवा में 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर केस
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गोवा पुलिस ने 11 अक्टूबर को पणजी में आयोजित CJP के विरोध-प्रदर्शन को लेकर 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस इंस्पेक्टर विजयकुमार चोडनकर के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘हिंदुत्व मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए गए थे। पुलिस का कहना है कि इन नारों से धार्मिक असंतोष फैलने और हिंदू समुदाय की भावनाएं आहत होने की आशंका है।
इस मामले में शिकायत तलेइगाओ निवासी रामप्रसाद केलकर की ओर से दर्ज कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़ा वीडियो देखने के बाद पुलिस से संपर्क किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया गया था, लेकिन वीडियो में कथित तौर पर ऐसे नारे सुनाई दिए, जिनसे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता था। अब पुलिस शिकायत और उपलब्ध वीडियो सामग्री के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
रिपोर्ट के अनुसार, पणजी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं धार्मिक आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देने और जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करने से संबंधित हैं। जांच के दौरान पुलिस कथित नारेबाजी की परिस्थितियों, वीडियो की प्रामाणिकता और प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान जैसे पहलुओं की पड़ताल कर सकती है।
फिलहाल एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह तय होगा कि किन लोगों की भूमिका सामने आती है और उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। चूंकि एफआईआर में 300 से ज्यादा अज्ञात लोगों का जिक्र है, इसलिए प्रदर्शन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने क्या कहा?
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि घटना की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद इस मामले को लेकर राज्य सरकार की सख्ती चर्चा में है।
धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी होती है। पुलिस को यह देखना होगा कि कथित नारे किस संदर्भ में लगाए गए, क्या वे उपलब्ध वीडियो में स्पष्ट रूप से मौजूद हैं और क्या
कानून
के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
दिल्ली में भी CJP के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई
गोवा में दर्ज मामले के बीच दिल्ली में भी CJP के हालिया विरोध-प्रदर्शन को लेकर पुलिस कार्रवाई हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस इलाके में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़े मामलों में दिल्ली पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कीं और 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोपों का उल्लेख किया है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल नहीं है और बिना आवश्यक अनुमति के भीड़ जुटने से यातायात तथा आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर प्रदर्शन को लेकर पहले से चेतावनी दी गई थी। पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री की जांच भी की है। रिपोर्टों में कम से कम 17 सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
CJP के विरोध-प्रदर्शनों का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर लगाए गए आरोपों से बताया जा रहा है। पार्टी और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी सिलसिले में दिल्ली सहित अलग-अलग जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं।
गोवा में 11 अक्टूबर को हुआ प्रदर्शन भी इसी व्यापक विरोध का हिस्सा बताया गया है। हालांकि, वहां कथित धार्मिक नारेबाजी के आरोपों ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। अब मामला केवल प्रदर्शन की अनुमति या चुनावी मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक सौहार्द से जुड़े सवाल भी जांच के केंद्र में आ गए हैं।
जांच के नतीजों पर टिकी नजरें
CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली और गोवा में हुई कार्रवाई के बाद अब पुलिस जांच के नतीजों पर नजर रहेगी। गोवा में पुलिस को कथित नारेबाजी से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान करनी होगी। वहीं, दिल्ली में दर्ज मामलों में भी पुलिस यह निर्धारित करेगी कि किन लोगों पर किन आरोपों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है। इसी तरह, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। गोवा में दर्ज एफआईआर के बाद यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या पुलिस आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत जुटा पाती है।
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