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सिर्फ माफी नहीं चलेगी, मेटा से जवाबदेही मांगेगी संसदीय समिति

Ratna Netam
3 Aug 2026 8:27 PM IST
सिर्फ माफी नहीं चलेगी, मेटा से जवाबदेही मांगेगी संसदीय समिति
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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटाए जाने का मामला अब संसद की सूचना प्रौद्योगिकी (IT) संबंधी स्थायी समिति तक पहुंच गया है। सोमवार को हुई समिति की बैठक में इस मुद्दे पर मेटा के अधिकारियों से कड़े सवाल पूछे गए। समिति के कई सदस्यों ने साफ कहा कि केवल माफी मांगने से मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से वीडियो हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। समिति के सदस्यों ने मेटा के अधिकारियों से पूछा कि आखिर किस वजह से प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का वीडियो प्लेटफॉर्म से हट गया। सदस्यों ने सोशल मीडिया कंपनियों की निगरानी व्यवस्था, कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया और तकनीकी खामियों को लेकर भी सवाल किए।

मेटा के अधिकारियों ने समिति को बताया कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटना किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह तकनीकी गलती के कारण हुआ। कंपनी की ओर से इस घटना पर माफी भी मांगी गई। मेटा अधिकारियों ने कहा कि समस्या सामने आने के बाद वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया गया था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।

हालांकि, समिति के कई सदस्यों ने मेटा की इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना था कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अगर किसी तकनीकी या मानवीय गलती के कारण किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति का कंटेंट हटता है तो उसकी जांच होनी चाहिए और लापरवाही करने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

बैठक में सदस्यों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक, भ्रामक और विवादित सामग्री को लेकर कंपनियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। समिति ने मेटा से उसके प्लेटफॉर्म पर कंटेंट निगरानी के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

गौरतलब है कि 28 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किया गया एक वीडियो कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं रहा था। उस समय कई यूजर्स को स्क्रीन पर यह संदेश दिखाई दिया था कि वीडियो भारत में "कानूनी अनुरोध" के कारण उपलब्ध नहीं है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

बाद में मेटा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि वीडियो हटाने की वजह कोई सरकारी आदेश या कंपनी की नीति नहीं थी, बल्कि आंतरिक तकनीकी समस्या के कारण ऐसा हुआ। कंपनी ने वीडियो को बहाल कर दिया और इस गलती के लिए माफी भी मांगी थी।

इस पूरे मामले के बाद केंद्र सरकार ने भी मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था। मेटा ने सरकार को जानकारी देते हुए बताया था कि प्रधानमंत्री मोदी और कुछ प्रमुख हस्तियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट की निगरानी के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और कई स्तरों की जांच प्रक्रिया शामिल होगी।

संसदीय समिति की बैठक में हुई चर्चा से साफ संकेत मिले हैं कि सरकार और संसद सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही को लेकर सख्त रुख अपनाने की तैयारी में हैं। समिति का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी महत्वपूर्ण व्यक्ति या संस्थान से जुड़े कंटेंट को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।

अब समिति की ओर से मेटा से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सकता है। इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंपनियों की कंटेंट मॉडरेशन नीति और तकनीकी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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