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भगोड़ों को भारत लाने के लिए अमित शाह ने लॉन्च किया नया पोर्टल

Kavita2
29 Sept 2026 9:56 AM IST
भगोड़ों को भारत लाने के लिए अमित शाह ने लॉन्च किया नया पोर्टल
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विदेशों में छिपे भगोड़ों और वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सोमवार को एक नया विशेष पोर्टल लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस से कहा कि वे ऐसे मामलों के लिए समर्पित विशेष टीमें बनाएं, जो केंद्रीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर विदेशों में मौजूद आरोपियों और अपराधियों को प्रत्यर्पण या अन्य कानूनी माध्यमों से भारत वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।

अमित शाह ने कहा कि विदेश भाग जाने से किसी आरोपी को भारतीय कानून से बचने का रास्ता नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने राज्य पुलिस बलों से कहा कि वे विदेशों में छिपे अपने-अपने राज्यों के वांछित आरोपियों की अलग सूची तैयार करें और हर मामले की नियमित निगरानी के लिए विशेष टीमों को जिम्मेदारी दें।

नए पोर्टल का मकसद प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाना है। अभी किसी आरोपी को विदेश से भारत लाने में संबंधित राज्य पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों, विदेश मंत्रालय और दूसरे देशों की एजेंसियों के बीच कई स्तर पर समन्वय की जरूरत पड़ती है। नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए इन मामलों की जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध कराने और उनकी प्रगति की निगरानी आसान बनाने की कोशिश की गई है।

गृह मंत्री ने राज्यों से यह भी कहा कि केवल आरोपी के विदेश भाग जाने के बाद कार्रवाई शुरू करना पर्याप्त नहीं है। पुलिस को ऐसे मामलों में शुरुआती चरण से ही मजबूत दस्तावेज तैयार करने चाहिए। आरोपी के खिलाफ अदालत से जारी वारंट, एफआईआर, चार्जशीट और अन्य कानूनी रिकॉर्ड व्यवस्थित होने पर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

अमित शाह ने बताया कि 2019 से अब तक 36 देशों से 288 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने अगस्त 2026 में जानकारी दी थी कि 2019 से उस समय तक 274 भगोड़े अपराधियों को 36 देशों से वापस लाया जा चुका था। ताजा आंकड़े से साफ है कि विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों को वापस लाने की कार्रवाई लगातार जारी है।

गृह मंत्री ने राज्य पुलिस बलों की भूमिका को इस अभियान में बेहद महत्वपूर्ण बताया। अधिकांश आपराधिक मामलों में मूल एफआईआर और जांच राज्य पुलिस के पास होती है। ऐसे में विदेश भागे आरोपी के खिलाफ दस्तावेज, सबूत और अदालत से जुड़े आदेश उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसी वजह से गृह मंत्रालय चाहता है कि प्रत्येक राज्य में ऐसी विशेष टीम हो, जो केवल विदेशों में छिपे भगोड़ों के मामलों पर नजर रखे। यह टीम केंद्रीय जांच एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों के साथ संपर्क में रहे और हर मामले की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा करे।

विदेश में छिपे अपराधियों को वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण, निर्वासन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। प्रक्रिया संबंधित देश के कानून और भारत के साथ उसके कानूनी समझौतों पर भी निर्भर करती है। कई मामलों में इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का सहारा भी लिया जाता है।

ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया में किसी तरह की कमी न रहे। दूसरे देश की अदालत या संबंधित एजेंसी को यह साबित करना होता है कि जिस व्यक्ति को भारत वापस लाने की मांग की जा रही है, उसके खिलाफ यहां पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद है। इसी कारण राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समयबद्ध समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हाल के वर्षों में हरियाणा समेत कई राज्यों ने विदेशों में छिपे गैंगस्टरों और दूसरे वांछित अपराधियों को वापस लाने के लिए विशेष अभियान चलाए हैं। हरियाणा पुलिस के अनुसार सितंबर 2026 तक वह 27 गैंगस्टरों को प्रत्यर्पण या निर्वासन के माध्यम से भारत वापस ला चुकी थी, जबकि कई अन्य आरोपियों के खिलाफ विदेशी एजेंसियों के सहयोग से कार्रवाई चल रही थी।

अमित शाह ने राज्यों से इसी तरह संस्थागत व्यवस्था विकसित करने को कहा है, ताकि किसी एक मामले के आधार पर अस्थायी टीम बनाने के बजाय स्थायी स्तर पर मामलों की निगरानी की जा सके। इससे किसी भगोड़े की लोकेशन मिलने पर तेजी से कानूनी और राजनयिक प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

नया पोर्टल अलग-अलग एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी आसान बनाने में मदद करेगा। किसी आरोपी से जुड़ा मामला किस चरण में है, कौन से दस्तावेज लंबित हैं और आगे किस एजेंसी को कार्रवाई करनी है, जैसी जानकारियों की निगरानी एक व्यवस्थित डिजिटल व्यवस्था के जरिए की जा सकेगी।

सरकार का जोर खास तौर पर गंभीर अपराध, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध और दूसरे बड़े मामलों में विदेश भागे आरोपियों को वापस लाने पर है। ऐसे मामलों में आरोपी लंबे समय तक विदेश में रहकर जांच और न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश करते हैं।

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्यों को अब विदेशों में छिपे अपराधियों की पहचान, उनके खिलाफ लंबित मामलों और उन्हें वापस लाने के प्रयासों को प्राथमिकता देनी होगी। केंद्रीय एजेंसियां इन मामलों में राज्य पुलिस को तकनीकी और कानूनी सहयोग देंगी।

फिलहाल नए पोर्टल के शुरू होने के साथ सरकार ने भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को अधिक समन्वित बनाने की दिशा में नया कदम उठाया है। राज्यों में विशेष टीमें बनने के बाद हर मामले की अलग-अलग निगरानी की जा सकेगी और केंद्रीय एजेंसियों के साथ सीधे समन्वय के जरिए प्रत्यर्पण तथा निर्वासन की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश होगी।

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