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चुनौतियों के बीच BRICS का मिशन साफ पुतिन ने बताया अगला लक्ष्य
Ratna Netam
11 Sept 2026 6:23 PM IST

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नई दिल्ली। BRICS Summit 2026 के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने समूह की आर्थिक ताकत और सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर बड़ा संदेश दिया है। पुतिन ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया कई आर्थिक और भू-राजनीतिक मुश्किलों का सामना कर रही है और BRICS आपसी सहयोग के जरिए इन चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सदस्य देशों के बीच कारोबार, निवेश और आर्थिक संपर्क बढ़ाने को प्रमुख लक्ष्य बताया।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum में रूस की भागीदारी पर खास नजर है। भारत की मेजबानी में हो रहे सम्मेलन में व्यापार, सप्लाई चेन, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं। पुतिन का संदेश भी इसी आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहा।
पुतिन ने BRICS की भूमिका पर क्या कहा?
राष्ट्रपति पुतिन ने BRICS देशों के सामने मौजूद वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए समूह के भीतर आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
उनका संदेश था कि BRICS के सदस्य देश आपसी सहयोग को मजबूत करके बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में आने वाली मुश्किलों का सामना ज्यादा प्रभावी ढंग से कर सकते हैं।
इसके लिए केवल राजनीतिक स्तर पर संपर्क पर्याप्त नहीं होगा। व्यापार, निवेश, उद्योग, तकनीक और वित्तीय सहयोग को भी आगे बढ़ाना होगा।
BRICS का विस्तार होने के बाद समूह का आर्थिक वजन भी बढ़ा है। ऐसे में सदस्य देशों के बीच कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हैं।
कारोबार बढ़ाना सबसे बड़े लक्ष्यों में शामिल
पुतिन ने व्यापार को BRICS सहयोग के महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश किया।
उनका जोर इस बात पर रहा कि सदस्य देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार बढ़े। इसके साथ कंपनियों और निवेशकों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिले।
BRICS देशों में दुनिया की कई बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इनके पास विशाल उपभोक्ता बाजार, प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा भंडार और तेजी से विकसित हो रहा औद्योगिक आधार है।
अगर सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं और लॉजिस्टिक्स बेहतर होता है तो समूह के भीतर कारोबार का आकार काफी बढ़ सकता है।
मोदी-पुतिन बैठक के बाद आया आर्थिक संदेश
पुतिन का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत के बीच सामने आया है।
मोदी और पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में करीब 45 मिनट तक बातचीत की। दोनों नेताओं के एजेंडे में व्यापार, ऊर्जा और रक्षा के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा, उर्वरक, मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे, स्टील और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
भारत और रूस के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। खासकर ऊर्जा व्यापार ने दोनों देशों के कुल कारोबार को नया स्तर दिया है।
अब दोनों देश आर्थिक रिश्तों को तेल और रक्षा से आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत-रूस के सामने 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को सालाना **100 अरब डॉलर** तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना चाहता है। इसकी वजह मौजूदा व्यापार असंतुलन भी है।
रूस से भारत का आयात तेजी से बढ़ा है, जिसमें कच्चे तेल की बड़ी भूमिका है। इसके मुकाबले रूस को भारतीय निर्यात काफी कम है।
ऐसे में फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, कृषि और खाद्य उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल तथा दूसरे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BRICS Business Forum पर खास फोकस
मुख्य नेताओं के सम्मेलन से पहले BRICS Business Forum आर्थिक एजेंडे को आकार देने का महत्वपूर्ण मंच बना है।
यहां सरकारों के साथ उद्योग जगत और कारोबारी प्रतिनिधियों को भी अपनी प्राथमिकताएं सामने रखने का मौका मिलता है।
इसका उद्देश्य यह देखना है कि राजनीतिक स्तर पर BRICS सहयोग को कंपनियों, निवेश और वास्तविक व्यापार में किस तरह बदला जा सकता है।
भारत भी चाहता है कि BRICS के जरिए सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंध ज्यादा मजबूत और व्यावहारिक बनें।
सप्लाई चेन की मुश्किलों से कैसे निपटेगा BRICS?
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने सप्लाई चेन से जुड़ी कई बड़ी समस्याएं देखी हैं।
कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव ने ऊर्जा से लेकर खाद्य पदार्थों और औद्योगिक कच्चे माल तक की सप्लाई प्रभावित की।
इसका असर कीमतों और उत्पादन दोनों पर पड़ा।
इसी पृष्ठभूमि में BRICS देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
BRICS Logistics Supply-Chain Cooperation Framework जैसी पहल सदस्य देशों के बीच ज्यादा लचीली और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर भी नजर
BRICS में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।
रूस इस दिशा में ज्यादा सक्रिय रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद मॉस्को ने डॉलर और पश्चिमी वित्तीय व्यवस्थाओं पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश तेज की।
BRICS के भीतर भी सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होती रही है।
हालांकि इस दिशा में कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं।
अलग-अलग देशों की मुद्राओं की परिवर्तनीयता, व्यापार असंतुलन, वित्तीय नियम और बैंकिंग नेटवर्क जैसे मुद्दों का समाधान जरूरी होगा।
इसी वजह से BRICS की साझा मुद्रा जैसी चर्चाओं और वास्तविक स्थानीय-मुद्रा व्यापार व्यवस्था में बड़ा अंतर है।
ऊर्जा BRICS की बड़ी ताकत
BRICS देशों की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों में ऊर्जा भी शामिल है।
रूस दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादकों में है। ईरान के पास भी विशाल ऊर्जा भंडार है। दूसरी तरफ भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल हैं।
ऐसे में BRICS के भीतर ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों मौजूद हैं।
यह संरचना सदस्य देशों को दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग के नए अवसर दे सकती है।
भारत और रूस के रिश्तों में इसका उदाहरण पहले से दिखाई देता है।
रूस से भारत की तेल खरीद
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी वृद्धि हुई।
पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने कहा है कि अपनी बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए किफायती ऊर्जा हासिल करना उसकी प्राथमिकता है।
जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 51 प्रतिशत तक पहुंची थी।
ऊर्जा व्यापार के कारण भारत और रूस के कुल द्विपक्षीय कारोबार में तेज वृद्धि हुई, लेकिन इसी के साथ व्यापार असंतुलन भी बढ़ा।
इसलिए अब भारत रूस को अपना निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
स्टार्टअप और इनोवेशन भी एजेंडे में
BRICS Summit 2026 का आर्थिक एजेंडा पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है।
स्टार्टअप और नई तकनीक में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए **BRICS Incubator Network** और **Startup Innovation Fund** जैसी पहलों पर काम हो रहा है।
अगर ये योजनाएं आगे बढ़ती हैं तो सदस्य देशों के स्टार्टअप एक-दूसरे के बाजारों, निवेशकों और इनक्यूबेटर नेटवर्क तक बेहतर पहुंच बना सकते हैं।
भारत के विशाल स्टार्टअप इकोसिस्टम को इससे नए बाजार और निवेश अवसर मिलने की संभावना है।
तकनीक में सहयोग क्यों महत्वपूर्ण?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा और नई ऊर्जा तकनीकों को लेकर दुनिया में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है।
BRICS देशों की अपनी अलग-अलग तकनीकी क्षमताएं हैं।
चीन मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़ा खिलाड़ी है। भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी और आईटी सेवाओं में मजबूत है। रूस के पास रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक का लंबा अनुभव है।
अगर ये देश व्यावहारिक क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाते हैं तो BRICS की आर्थिक ताकत में बड़ा बदलाव आ सकता है।
पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस के लिए BRICS अहम
रूस के लिए BRICS का महत्व यूक्रेन युद्ध के बाद और बढ़ गया है।
अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों के कारण रूस ने एशिया, अफ्रीका और दूसरे उभरते बाजारों के साथ आर्थिक संबंध बढ़ाने की कोशिश की है।
भारत और चीन जैसे बड़े बाजार रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण बने हैं।
इस लिहाज से पुतिन का BRICS देशों के बीच कारोबार बढ़ाने पर जोर देना रूस की व्यापक आर्थिक रणनीति से भी जुड़ा है।
लेकिन भारत BRICS को किसी पश्चिम-विरोधी सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के रूप में पेश करने से बचता रहा है। नई दिल्ली का फोकस वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिलाने पर रहा है।
BRICS के भीतर भी अलग-अलग हित
BRICS का विस्तार इसकी ताकत है, लेकिन यही इसकी चुनौती भी है।
सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं, विदेश नीति और आर्थिक प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दे हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के रिश्तों में तनाव है। रूस यूक्रेन युद्ध के कारण प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।
इन अलग-अलग हितों के बीच आर्थिक सहमति तैयार करना आसान नहीं है।
यही वजह है कि व्यापार, निवेश, स्टार्टअप, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे व्यावहारिक विषय BRICS के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
दुनिया की करीब आधी आबादी का मंच
विस्तार के बाद BRICS का वैश्विक आर्थिक महत्व काफी बढ़ गया है।
समूह अब दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। क्रय शक्ति समता के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी इसकी हिस्सेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
इस विशाल बाजार को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ना BRICS की सबसे बड़ी आर्थिक संभावनाओं में से एक है।
अगर व्यापारिक बाधाएं कम होती हैं, भुगतान आसान होता है और परिवहन नेटवर्क मजबूत होता है तो सदस्य देशों के बीच कारोबार में बड़ी वृद्धि संभव है।
पुतिन के बयान का क्या है संदेश?
पुतिन की टिप्पणी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि BRICS को वैश्विक चुनौतियों के बीच केवल राजनीतिक मंच बनकर नहीं रहना चाहिए।
समूह को सदस्य देशों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करने होंगे।
इसके लिए व्यापार बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना, सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करना और नए क्षेत्रों में साझेदारी विकसित करना जरूरी होगा।
भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS Summit 2026 में भी इसी आर्थिक सहयोग पर खास जोर दिखाई दे रहा है।
मोदी-पुतिन बैठक में व्यापार और औद्योगिक सहयोग की चर्चा तथा उसके बाद BRICS Business Forum में आर्थिक एजेंडे पर जोर इसी दिशा का संकेत है।
अब मुख्य BRICS Summit पर नजर
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को मुख्य BRICS Leaders' Summit होना है।
यहां आर्थिक सहयोग के साथ वैश्विक शासन व्यवस्था, विकास, शांति, सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
इससे पहले Business Forum ने कारोबारी एजेंडे को केंद्र में ला दिया है।
पुतिन का कहना है कि BRICS के जरिए मौजूदा मुश्किलों का सामना किया जा सकता है और सदस्य देशों के बीच कारोबार को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
अब असली परीक्षा यह होगी कि इन बयानों को कितने ठोस फैसलों में बदला जाता है।
अगर व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, स्टार्टअप और भुगतान व्यवस्था पर सदस्य देश व्यावहारिक सहमति बना पाते हैं तो BRICS की भूमिका वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत हो सकती है।
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