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SIR पर बड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी और खड़गे
Ratna Netam
12 Oct 2026 9:45 PM IST

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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मतदाता सूची और उससे हटाए गए नामों की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। इसके साथ ही मामले में उठाए गए सवालों पर फैसला होने तक देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया को रोकने का अनुरोध किया गया है।संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस याचिका में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग भी की है। प्रस्तावित समिति से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, मतदाता डेटाबेस और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से संबंधित तकनीकी प्रणालियों की समीक्षा कराने का अनुरोध किया गया है।
SIR लागू करने के तरीके पर उठाए सवाल
विपक्षी नेताओं ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण लागू करने की प्रक्रिया को चुनौती दी है।याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और संबंधित डेटाबेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची में संशोधन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित होनी चाहिए।हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के विषय हैं। उपलब्ध जानकारी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन आरोपों को सही ठहराए जाने का कोई उल्लेख नहीं है।
देशभर में SIR रोकने की मांग
याचिका में सबसे प्रमुख मांग देशव्यापी SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की है।राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अनुरोध किया है कि अदालत में उठाए गए मुद्दों पर फैसला होने तक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाए।उनका कहना है कि पहले पुनरीक्षण के तरीके और उससे संबंधित प्रक्रियात्मक सवालों की समीक्षा होनी चाहिए।
यह मांग अंतरिम राहत के रूप में की गई है।
हालांकि, याचिका दाखिल होने से SIR प्रक्रिया अपने आप स्थगित नहीं होती। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश आवश्यक होगा।फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसी किसी अंतरिम रोक की पुष्टि नहीं हुई है।
रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति बनाने की मांग
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया है।याचिका के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जानी चाहिए।समिति का उद्देश्य SIR प्रक्रिया के कार्यान्वयन की स्वतंत्र समीक्षा करना होगा।याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि समिति यह जांच करे कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अपनाई गई प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।इसके अतिरिक्त मतदाता सूची और चुनाव से संबंधित तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा का प्रस्ताव भी रखा गया है।हालांकि, समिति के गठन पर अभी अदालत का कोई निर्णय सामने नहीं आया है।
मतदाता डेटाबेस का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग
याचिका में मतदाता डेटाबेस और हटाए गए नामों की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की गई है।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जांच आवश्यक है।इस ऑडिट के माध्यम से यह परखने का अनुरोध किया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया किस तरह लागू की गई।मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाया जाना उसके मतदान अधिकार को प्रभावित कर सकता है।हालांकि, हर नाम हटाए जाने को अपने आप अनियमितता नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में संशोधन निर्धारित नियमों के तहत भी किया जाता है।इसी कारण विपक्षी नेताओं ने स्वतंत्र ऑडिट के माध्यम से संबंधित तथ्यों की जांच कराने की मांग उठाई है।
EVM से जुड़े तकनीकी सिस्टम की समीक्षा का अनुरोध
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी EVM को नियंत्रित करने वाली तकनीकी प्रणालियों की समीक्षा की मांग भी शामिल है।विपक्षी नेताओं ने प्रस्तावित स्वतंत्र समिति के कार्यक्षेत्र में इन प्रणालियों की जांच को शामिल करने का अनुरोध किया है।हालांकि, मतदाता सूची का पुनरीक्षण और EVM के माध्यम से मतदान अलग-अलग चुनावी प्रक्रियाएं हैं।याचिका में दोनों से संबंधित तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग की गई है।उपलब्ध विवरण में EVM से जुड़ी किसी विशिष्ट तकनीकी खराबी या प्रमाणित गड़बड़ी का उल्लेख नहीं है।इसलिए समीक्षा की मांग को किसी तकनीकी अनियमितता की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों पर सवाल
याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा निर्वाचन आयोग की सामूहिक शक्तियों के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं।याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना आयोग की सामूहिक शक्तियों का उपयोग किया।विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को निर्वाचन आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़ा है।उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि देशव्यापी SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड प्रस्तुत कराए जाएं।हालांकि, अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं होने का आरोप अभी प्रमाणित तथ्य नहीं है।इस विषय में वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और न्यायिक समीक्षा से स्पष्ट हो सकती है।
आयोग की फाइलें और बैठक के मिनट्स पेश करने की मांग
याचिका में निर्वाचन आयोग से देशव्यापी SIR शुरू करने के निर्णय से जुड़े रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की मांग की गई है।इन रिकॉर्ड में संबंधित फाइलें, बैठकों के विवरण, आधिकारिक नोटिंग और चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई कथित आपत्तियां शामिल हैं।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन दस्तावेजों की समीक्षा से निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।उन्होंने यह जानने की मांग की है कि SIR लागू करने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन रिकॉर्ड की वास्तविक सामग्री का विवरण शामिल नहीं है।इसलिए किसी आयुक्त द्वारा आपत्ति दर्ज किए जाने या किसी विशेष निर्णय प्रक्रिया के उल्लंघन के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।
अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल हुई याचिका
विपक्षी नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का संवैधानिक उपाय प्रदान करता है।इसके अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट संबंधित परिस्थितियों में आवश्यक रिट और निर्देश जारी कर सकता है।याचिकाकर्ताओं ने इसी संवैधानिक प्रावधान का सहारा लेते हुए SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।हालांकि, अदालत किन मुद्दों पर सुनवाई करेगी और कौन-सी राहत प्रदान करेगी, यह न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
निर्वाचन आयोग के जवाब पर रहेगी नजर
इस याचिका में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।इनमें प्रक्रियात्मक अनियमितताओं, मतदाता सूची से नाम हटाने, निर्णय संबंधी रिकॉर्ड और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल शामिल हैं।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निर्वाचन आयोग की ओर से इस याचिका पर दाखिल किसी जवाब का विवरण नहीं है।आयोग का पक्ष सामने आने के बाद विवाद से संबंधित कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं पर अधिक स्पष्टता मिल सकती है।फिलहाल याचिका में की गई मांगों और अदालत द्वारा दिए जाने वाले आदेशों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के अन्य नेताओं की याचिका के बाद SIR विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंच गया है।याचिकाकर्ताओं ने देशव्यापी प्रक्रिया पर अंतरिम रोक, मतदाता डेटाबेस की स्वतंत्र ऑडिट, सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने और निर्वाचन आयोग के निर्णय संबंधी रिकॉर्ड प्रस्तुत कराने की मांग की है।इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा आयोग की सामूहिक शक्तियों के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं।फिलहाल इन मांगों पर सुप्रीम कोर्ट के किसी अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब यह देखना होगा कि अदालत याचिका पर क्या रुख अपनाती है और निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है।
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