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आप से विवाद के बीच राघव चड्ढा का तीखा पलटवार कहा सपने में भूत बनकर आता हूं

Kavita2
11 Sept 2026 9:16 AM IST
आप से विवाद के बीच राघव चड्ढा का तीखा पलटवार कहा सपने में भूत बनकर आता हूं
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नई दिल्ली। पंजाब की मतदाता सूची से नाम हटने और दिल्ली की मतदाता सूची में नाम जुड़ने को लेकर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पार्टी की ओर से उन पर लगाए गए आरोपों के बाद चड्ढा ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की मौजूदा स्थिति की तुलना उस पूर्व प्रेमिका से कर दी जिसे उसका प्रेमी छोड़कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका है, लेकिन वह अब भी उसे भूल नहीं पाई है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विवाद राघव चड्ढा के मतदाता पंजीकरण को लेकर शुरू हुआ। उनका नाम पंजाब की मतदाता सूची से हटने और दिल्ली की सूची में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए। पार्टी की ओर से उनके कदम को लेकर नाराजगी जाहिर की गई और उन पर कथित रूप से “बेशर्मी” का आरोप भी लगाया गया। इसके बाद चड्ढा ने सार्वजनिक रूप से जवाब देते हुए पार्टी नेतृत्व पर उन्हें लेकर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने का आरोप लगाया।

राघव चड्ढा ने कहा कि जहां तक उनके और उनके वोट का सवाल है, आम आदमी पार्टी की स्थिति ऐसी हो गई है कि वह रात-दिन केवल उनका नाम ले रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे वह पार्टी नेताओं के सपनों में भूत बनकर आते हैं। चड्ढा के मुताबिक आप नेता दिन-रात “राघव चड्ढा, राघव चड्ढा” करते रहते हैं। उनका यह बयान साफ तौर पर पार्टी की ओर से किए जा रहे हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की तुलना एक पूर्व प्रेमिका से करते हुए कहा कि जिस तरह कोई व्यक्ति पुराने रिश्ते को छोड़कर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाता है, लेकिन दूसरा पक्ष उसे भूल नहीं पाता, उसी तरह पार्टी भी उन्हें लेकर लगातार बयान दे रही है। उन्होंने कहा कि बॉयफ्रेंड अपनी जिंदगी में “मूव ऑन” कर चुका है, लेकिन एक्स गर्लफ्रेंड अभी भी उसके प्यार में पागल है। इस टिप्पणी के जरिए चड्ढा ने संकेत दिया कि वह पार्टी के साथ अपने पुराने राजनीतिक संबंधों से आगे बढ़ चुके हैं।

उनका बयान यहीं नहीं रुका। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी की बड़ी चिंता रहती है। चड्ढा ने यह भी कहा कि उन्हें डर है कि पार्टी कहीं किसी “दिलजले आशिक” की तरह उनकी याद में अपनी नसें न काट ले। राजनीतिक बयानबाजी में इस्तेमाल की गई इस भाषा ने विवाद को और बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान के अलग-अलग हिस्से तेजी से साझा किए जा रहे हैं।

राघव चड्ढा लंबे समय तक आम आदमी पार्टी के प्रमुख और चर्चित चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति हो या विभिन्न चुनावों में प्रचार की जिम्मेदारी, उन्हें कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में देखा गया। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी उनकी भूमिका चर्चा में रही। ऐसे में पार्टी और उनके बीच सार्वजनिक रूप से सामने आया यह टकराव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया सामान्यतः व्यक्ति के निवास और निर्वाचन संबंधी नियमों से जुड़ी होती है। हालांकि किसी प्रमुख राजनीतिक नेता के मतदाता पंजीकरण में बदलाव होने पर उसका राजनीतिक अर्थ भी निकाला जाता है। राघव चड्ढा के मामले में भी यही हुआ। पंजाब से नाम हटने और दिल्ली में जुड़ने की खबर सामने आते ही इसे उनकी राजनीतिक स्थिति और भावी भूमिका से जोड़कर देखा जाने लगा।

आम आदमी पार्टी की ओर से की गई आलोचना के बाद यह विवाद निजी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तीखा हो गया। चड्ढा ने अपने जवाब में किसी नीतिगत मुद्दे के बजाय पार्टी की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने यह जताने का प्रयास किया कि आप नेतृत्व उनके प्रत्येक कदम पर नजर रख रहा है और बार-बार उनका नाम लेकर अपनी ही बेचैनी सामने ला रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसी बयानबाजी दोनों पक्षों के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है। किसी समय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले चड्ढा का इस तरह सार्वजनिक मंच से हमला करना बताता है कि रिश्तों में आई खटास अब खुलकर सामने आ चुकी है। वहीं, आम आदमी पार्टी की ओर से उनके मतदाता पंजीकरण पर सवाल उठाया जाना भी यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को राजनीतिक रूप से घेरने का मौका नहीं छोड़ना चाहते।

राघव चड्ढा के बयान के बाद अब आम आदमी पार्टी की अगली प्रतिक्रिया पर नजर है। पार्टी उनके निजी रिश्तों से जुड़ी उपमा और “दिलजले आशिक” वाली टिप्पणी का जवाब देती है या मतदाता सूची के मूल मुद्दे पर ही अपनी बात रखती है, यह महत्वपूर्ण होगा। विवाद बढ़ने पर निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया और चड्ढा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी नए सवाल उठ सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम से इतना स्पष्ट है कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच मतभेद अब बंद कमरों तक सीमित नहीं हैं। मतदाता सूची से शुरू हुआ विवाद आरोप-प्रत्यारोप और निजी तंज तक पहुंच गया है। चड्ढा ने अपने तीखे जवाब से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह पार्टी के हमलों से दबने वाले नहीं हैं। दूसरी तरफ आप की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद यहीं थमता है या आने वाले दिनों में और गहरा होता है।

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