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स्कूल ठीक करो अभियान के बीच दीपके की नई मांग पीएम केयर्स फंड से सुधरें स्कूल

Ratna Netam
19 Aug 2026 7:44 PM IST
स्कूल ठीक करो अभियान के बीच दीपके की नई मांग पीएम केयर्स फंड से सुधरें स्कूल
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दिल्ली :देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स फंड को लेकर सवाल उठाते हुए मांग की है कि इस राशि का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने और नए आधुनिक स्कूल बनाने में किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पीएम केयर्स फंड में मौजूद हजारों करोड़ रुपये से देशभर में एक हजार से ज्यादा हाईटेक स्कूल बनाए जा सकते हैं।
अभिजीत दीपके इन दिनों अपने **'स्कूल ठीक करो' अभियान** को लेकर चर्चा में हैं। इस अभियान के तहत वह अलग-अलग क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की सुविधाओं का जायजा ले रहे हैं। उनका कहना है कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को बुनियादी सुविधाओं तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर बड़े फंड मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है।
पीएम केयर्स फंड पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने एक वीडियो के जरिए पीएम केयर्स फंड को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक तरफ ग्रामीण इलाकों के कई स्कूलों में पानी, शौचालय, बेंच और अन्य सुविधाओं की कमी है, वहीं दूसरी तरफ पीएम केयर्स फंड में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। उनका सवाल है कि इस राशि का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा और स्कूलों के विकास के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर एक आधुनिक स्कूल बनाने में करीब 8 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, तो पीएम केयर्स फंड की राशि से हजारों नए मॉडल स्कूल तैयार किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण और गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सकता है।
क्या है पीएम केयर्स फंड?
प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति राहत कोष यानी पीएम केयर्स फंड की स्थापना कोरोना महामारी जैसे आपातकालीन हालात में सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी। यह फंड लोगों और संस्थानों से मिलने वाले स्वैच्छिक योगदान से चलता है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड में करीब 8,452 करोड़ रुपये की राशि मौजूद थी। इस फंड का उपयोग आपदा राहत, स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है।
गांवों के स्कूलों की स्थिति पर चिंता
अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में स्कूलों का दौरा करने के बाद वहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कई स्कूलों में बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं, शौचालयों की स्थिति खराब है और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के विकास की नींव होती है। अगर सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बेहतर नहीं होंगी तो गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को समान अवसर नहीं मिल पाएंगे।
प्रधानमंत्री से की खास अपील
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि पीएम केयर्स फंड की राशि का इस्तेमाल बच्चों और शिक्षा के क्षेत्र में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश को विकसित बनाना है तो सबसे पहले सरकारी स्कूलों को मजबूत करना होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं, तो गांवों के स्कूलों की स्थिति सुधारने पर भी उतना ही ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।
निजी स्कूलों की फीस पर भी उठाया मुद्दा
अभिजीत दीपके ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में परेशान हो रहे हैं। उन्होंने निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने की मांग की।
उनका कहना है कि अच्छी शिक्षा केवल आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी बहस
अभिजीत दीपके के बयान के बाद सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा बजट को लेकर बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश की जरूरत है, जबकि सरकार की ओर से अलग-अलग योजनाओं के जरिए स्कूलों में सुधार के प्रयास किए जाने की बात कही जाती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि अच्छे शिक्षक, डिजिटल सुविधाएं, प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन भी जरूरी हैं।
'स्कूल ठीक करो' अभियान का विस्तार
अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनका अभियान केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। वह देशभर के सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने और उनकी समस्याओं को सामने लाने की योजना बना रहे हैं।
उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाना है, ताकि सरकारों पर स्कूलों में सुधार के लिए दबाव बने।
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