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SIR विवाद के बीच NDA के तीन सहयोगियों ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

Kavita2
26 Sept 2026 9:31 AM IST
SIR विवाद के बीच NDA के तीन सहयोगियों ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण
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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तीन सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) से जुड़े नेताओं ने कहा है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के मन में किसी तरह का संदेह पैदा होना उचित नहीं है और चुनाव आयोग को सामने आकर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।

तीनों सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब SIR और चुनाव आयोग के भीतर इस प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत मतदाता सूची से जुड़े फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने मतभेद की खबरों के बीच 23 सितंबर को कहा था कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करने की भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं तो आयोग और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जिम्मेदारी है कि वे अपना पक्ष मजबूती से जनता के सामने रखें।

चिराग पासवान ने चुनावी व्यवस्था में जनता के भरोसे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा होना लोकतंत्र के लिए ठीक स्थिति नहीं होगी। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट जवाब आने से लोगों के मन में मौजूद आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक संस्था को अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब खुद देना चाहिए।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। कुशवाहा ने कहा कि हाल में सामने आई खबरों के कारण SIR को लेकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। उनके मुताबिक वास्तविक स्थिति क्या है, इसे स्पष्ट करने के लिए चुनाव आयोग सबसे उपयुक्त संस्था है और उसे लोगों को पूरे मामले से अवगत कराना चाहिए।

तेलुगु देशम पार्टी ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने की जरूरत बताई है। TDP के लोकसभा में नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायालु ने कहा कि स्पष्टीकरण से चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास और मजबूत होगा। पार्टी ने पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे को महत्वपूर्ण बताया है।

हालांकि TDP की ओर से SIR प्रक्रिया को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। पार्टी नेताओं ने प्रक्रिया और उसके क्रियान्वयन को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्टता की आवश्यकता बताई है। इस तरह NDA के इन सहयोगी दलों की मांग मुख्य रूप से चुनाव आयोग से सार्वजनिक रूप से स्थिति साफ करने और लोगों के बीच पैदा हुए भ्रम को दूर करने की है।

विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से संबंधित रिपोर्टें भी हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से जुड़े कुछ निर्णयों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इसके जवाब में कहा कि किसी विषय पर विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है और आयोग के अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

SIR के तहत मतदाता सूचियों की व्यापक जांच और पुनरीक्षण किया जा रहा है। प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से सवाल उठा रहे हैं। अब NDA के सहयोगी दलों की ओर से भी स्पष्टीकरण की मांग सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा का दायरा बढ़ गया है। हालांकि इन सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के सभी आरोपों का समर्थन नहीं किया है, बल्कि उनका जोर आयोग की ओर से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और भरोसा कायम रखने पर है।

दिल्ली में भी SIR प्रक्रिया को लेकर न्यायिक स्तर पर सवाल उठे हैं। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी संख्या में जारी नोटिसों में इस्तेमाल भाषा और कुछ विसंगतियों को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए थे। चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

चुनाव आयोग ने SIR के कार्यक्रम में भी संशोधन किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 तय की गई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 नवंबर को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।

अब राजनीतिक नजर चुनाव आयोग की आगे की प्रतिक्रिया पर है। चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और TDP नेताओं की टिप्पणियों का केंद्रीय बिंदु यही है कि चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहना चाहिए। इन नेताओं ने आयोग से उठ रहे सवालों पर स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देने की मांग की है। दूसरी ओर आयोग पहले ही कह चुका है कि SIR से जुड़े उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक बहस के बीच NDA के तीन सहयोगी दलों का यह रुख महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। फिलहाल इन दलों ने प्रक्रिया को खारिज करने के बजाय चुनाव आयोग से पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की मांग की है। ऐसे में आने वाले दिनों में आयोग की ओर से इस विवाद पर किसी अतिरिक्त स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों की आगे की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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