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ईरान से पेट्रोलियम कारोबार पर अमेरिका की सख्ती, मुंबई की 2 कंपनियों और 5 भारतीयों पर प्रतिबंध

नई दिल्ली/मुंबई। अमेरिका ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार में कथित संलिप्तता को लेकर भारत के खिलाफ भी कार्रवाई की है। अमेरिकी सरकार ने मुंबई स्थित दो कंपनियों और उनसे जुड़े पांच भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। गुरुवार, 8 अक्टूबर को घोषित इस कार्रवाई के तहत SSPL सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात और संबंधित व्यापार को सुविधाजनक बनाया। यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे अमेरिकी अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा है।
अमेरिकी विदेश विभाग की कार्रवाई में SSPL सॉल्यूशंस से जुड़े ध्वनि निसर्ग वोरा और निसर्ग सामिर वोरा के नाम शामिल हैं। वहीं, समुद्र मरीन सर्विसेज से जुड़े केतन मनोहर कोचीकर, भूपेंद्रसिंह धालसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों की संपत्ति तथा संपत्ति में उनके हितों को अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के तहत ब्लॉक करने की कार्रवाई की गई है। संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के साथ प्रतिबंधित लेनदेन पर भी रोक लगाई गई है।
किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
अमेरिका की कार्रवाई में मुंबई स्थित दो कंपनियां शामिल हैं। पहली कंपनी SSPL सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड है, जबकि दूसरी समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभाई।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान से जुड़े पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार के माध्यम से वहां की सरकार को बड़ी रकम पहुंचाई गई। अमेरिका इस व्यापार को ईरान के लिए राजस्व जुटाने का महत्वपूर्ण माध्यम मानता है और इसे सीमित करने के लिए कंपनियों, व्यक्तियों तथा जहाजों पर प्रतिबंध लगा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों को अमेरिकी प्रशासन के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी में संबंधित भारतीय कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पांच भारतीय नागरिक भी प्रतिबंधों के दायरे में
अमेरिकी कार्रवाई केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रही। दोनों कंपनियों से जुड़े पांच भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया है।
SSPL सॉल्यूशंस से जुड़े ध्वनि निसर्ग वोरा और निसर्ग सामिर वोरा पर कार्रवाई की गई है। वहीं, समुद्र मरीन सर्विसेज से जुड़े केतन कोचीकर, भूपेंद्रसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल को भी प्रतिबंधों के दायरे में लिया गया है।
अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की सूची में इन व्यक्तियों और कंपनियों को शामिल किए जाने का अर्थ है कि अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाली उनकी संपत्तियों और संपत्ति संबंधी हितों को ब्लॉक किया जा सकता है। अमेरिकी नियमों के अधीन आने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रतिबंधित पक्षों के साथ संबंधित लेनदेन करने से भी रोक लगती है।
समुद्र मरीन सर्विसेज को मिला सीमित समय
अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से जारी जानकारी में समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के लिए एक सीमित अवधि की विशेष अनुमति का भी उल्लेख है। इसके तहत कंपनी से जुड़े कुछ लेनदेन को समेटने और कारोबारी गतिविधियों को बंद करने के लिए 23 अक्टूबर 2026 तक की अनुमति दी गई है। इसे सामान्य कारोबारी गतिविधियां जारी रखने की खुली छूट नहीं माना जाना चाहिए; यह निर्धारित शर्तों के तहत कारोबार समेटने की सीमित अनुमति है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रतिबंध लागू होने से पहले निर्धारित शर्तों के अनुरूप मौजूदा लेनदेन को समाप्त करने का अवसर देना है। निर्धारित समयसीमा और अनुमति की शर्तों के बाहर किसी गतिविधि को स्वतः वैध नहीं माना जा सकता।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत व्यापक कार्रवाई
अमेरिका की यह कार्रवाई केवल भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरानी मूल के पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े कुल 10 संस्थानों, छह व्यक्तियों और पांच जहाजों को निशाना बनाने की घोषणा की है। इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान से जुड़े तेल कारोबार और कथित प्रतिबंध उल्लंघन में इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क तथा जहाजों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ईरान के पेट्रोलियम निर्यात से होने वाली आय को सीमित करना और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कारोबारी नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। वाशिंगटन का मानना है कि पेट्रोलियम कारोबार ईरान के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत है, इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों और संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्या मायने हैं?
मुंबई की दो कंपनियों और उनसे जुड़े पांच भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए जाने से संबंधित पक्षों के लिए अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाले वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों पर असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि अमेरिकी वित्तीय संस्थानों और अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कारोबार पर इन नियमों का सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, इस कार्रवाई से भारत की सभी पेट्रोलियम कंपनियों या पूरे भारतीय व्यापार पर स्वतः प्रतिबंध नहीं लगता। इसका तत्काल दायरा अमेरिकी सरकार की सूची में शामिल कंपनियों, व्यक्तियों और उनसे संबंधित प्रतिबंधित गतिविधियों तक है।
फिलहाल, अमेरिका ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार के आरोपों के तहत मुंबई की दो कंपनियों और पांच भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। समुद्र मरीन सर्विसेज को कुछ लेनदेन समेटने के लिए 23 अक्टूबर तक सीमित अनुमति दी गई है। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान के पेट्रोलियम कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपनी नीति के तहत भारतीय संस्थाओं तक भी कार्रवाई का दायरा बढ़ा रहा है।





