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ग्रेजुएशन में UPSC से जुड़े विषय नहीं थे, फिर भी तीसरे प्रयास में बनीं IAS अधिकारी अंबिका रैना

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन अंतिम चयन तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों की संख्या बेहद सीमित होती है। ऐसे में इस परीक्षा को पास करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। हालांकि, कुछ उम्मीदवार ऐसे भी होते हैं जो कठिन परिस्थितियों और विषयों की चुनौती के बावजूद अपने मजबूत इरादों के दम पर सफलता हासिल करते हैं। आईएएस अधिकारी अंबिका रैना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
अंबिका रैना ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा को अपने तीसरे प्रयास में पास किया। उनकी सफलता की खास बात यह रही कि उनके ग्रेजुएशन में UPSC परीक्षा से सीधे जुड़े विषय नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने परीक्षा की तैयारी शुरू की और लगातार प्रयास करते हुए आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।
अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद लक्ष्य पर नजर
UPSC की तैयारी करने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी अक्सर ऐसे विषयों का चयन करते हैं जो सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम से सीधे जुड़े होते हैं। कई विद्यार्थी कॉलेज के समय से ही सामान्य अध्ययन, राजनीति विज्ञान, इतिहास, भूगोल या अर्थशास्त्र जैसे विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर देते हैं।
अंबिका रैना की शैक्षणिक पृष्ठभूमि इस मामले में अलग रही। उनके ग्रेजुएशन में ऐसे विषय नहीं थे, जिन्हें आम तौर पर UPSC की तैयारी के लिहाज से उपयोगी माना जाता है। इसके बावजूद उन्होंने इस अंतर को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
उन्होंने परीक्षा के पाठ्यक्रम को समझकर अपनी तैयारी की रणनीति तैयार की और धीरे-धीरे उन विषयों पर पकड़ बनानी शुरू की, जिनकी जरूरत सिविल सेवा परीक्षा में थी। उनकी कहानी बताती है कि किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए केवल शैक्षणिक पृष्ठभूमि ही निर्णायक नहीं होती, बल्कि तैयारी का तरीका, निरंतरता और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण होती है।
तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता
UPSC परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अंबिका रैना को तीन प्रयास करने पड़े। पहले प्रयास में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। असफलता को उन्होंने अपनी कमियों को समझने और तैयारी में सुधार करने के अवसर के रूप में लिया।
दूसरे प्रयास में भी जब सफलता हाथ नहीं लगी तो उन्होंने अपनी रणनीति की समीक्षा की। परीक्षा के पैटर्न, पाठ्यक्रम और अपनी तैयारी के स्तर का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कमियों को दूर करने पर ध्यान दिया।
लगातार प्रयास और आत्मविश्वास के साथ अंबिका ने तीसरी बार परीक्षा दी और इस बार उन्हें सफलता मिली। उनका चयन IAS के लिए हुआ और उनका सपना साकार हुआ।
असफलता को बनाया सीखने का माध्यम
UPSC जैसी परीक्षा में एक या दो प्रयास में सफलता नहीं मिलने पर कई अभ्यर्थी हतोत्साहित हो जाते हैं। परीक्षा का लंबा पाठ्यक्रम, लगातार अध्ययन और चयन की अनिश्चितता अभ्यर्थियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।
अंबिका रैना की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि असफलता के बाद भी लक्ष्य से जुड़े रहना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने अपने प्रयासों के दौरान यह समझने की कोशिश की कि कहां कमी रह गई और उसे किस तरह दूर किया जा सकता है।
उनकी सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि उन्होंने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने यह साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो अलग विषय से ग्रेजुएशन करने के बावजूद UPSC जैसी कठिन परीक्षा को पास किया जा सकता है।
UPSC के लिए रणनीति और निरंतरता जरूरी
सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण—से होकर गुजरती है। प्रत्येक चरण की अपनी अलग चुनौती होती है। प्रारंभिक परीक्षा में व्यापक सामान्य ज्ञान और विश्लेषण क्षमता की जरूरत होती है, जबकि मुख्य परीक्षा में विषयों की गहरी समझ और प्रभावी उत्तर लेखन महत्वपूर्ण होता है। अंतिम चरण में उम्मीदवार के व्यक्तित्व और प्रशासनिक दृष्टिकोण का आकलन किया जाता है।
ऐसे कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरने के लिए अभ्यर्थी को लंबे समय तक अनुशासित रहना पड़ता है। अंबिका रैना की सफलता भी इसी निरंतरता और धैर्य का उदाहरण मानी जा सकती है।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो यह मान लेते हैं कि यदि उनके ग्रेजुएशन में UPSC से जुड़े विषय नहीं हैं तो वे इस परीक्षा में सफल नहीं हो सकते। अंबिका की उपलब्धि इस धारणा को चुनौती देती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अंबिका रैना की सफलता का संदेश सिर्फ UPSC अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। यह उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है जो किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने का सपना देखते हैं, लेकिन शुरुआती कठिनाइयों के कारण पीछे हटने लगते हैं।
उनकी यात्रा बताती है कि किसी भी परीक्षा या प्रतियोगिता में सफलता के लिए सबसे जरूरी है—लक्ष्य के प्रति स्पष्टता, लगातार मेहनत और असफलताओं से सीखने की क्षमता। यदि पहली कोशिश में सफलता नहीं मिलती तो इसका अर्थ यह नहीं कि लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
तीसरे प्रयास में IAS बनने वाली अंबिका रैना की कहानी इस बात का उदाहरण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास कठिन से कठिन परीक्षा की बाधाओं को पार कर सकते हैं। उनकी सफलता उन अभ्यर्थियों के लिए खास संदेश देती है जिनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि UPSC के पारंपरिक विषयों से अलग है।
अंततः अंबिका रैना की सफलता यह साबित करती है कि किसी प्रतियोगी परीक्षा में आपकी शुरुआत चाहे जैसी हो, अंतिम परिणाम आपकी मेहनत, रणनीति और दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। UPSC जैसी कठिन परीक्षा में तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर उन्होंने दिखाया कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी की दिशा में एक कदम हो सकती है।





