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दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से मारपीट का आरोप

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास हुए प्रदर्शन से जुड़े कई मोबाइल वीडियो की जांच शुरू कर दी है। इन वीडियो में महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और मारपीट की घटनाएं दिखाई देने का दावा किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वीडियो के जरिए संबंधित प्रदर्शनकारियों की पहचान करने और घटनाओं का सही क्रम पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की बात सामने आई थी। हालांकि, गुरुवार, 8 अक्टूबर को आई ताजा जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में तीन नई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के वीडियो की जांच तेज
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हुई घटनाओं से संबंधित कई वीडियो सामने आए हैं। इनमें प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति दिखाई दे रही है।
पुलिस इन वीडियो की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किन परिस्थितियों में विवाद शुरू हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
विशेष रूप से उन वीडियो की जांच की जा रही है, जिनमें महिला पुलिसकर्मियों और कांस्टेबलों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।
पुलिस का कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। वीडियो के आधार पर घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास जारी है।
महिला पुलिस अधिकारियों से भी बदसलूकी का आरोप
प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था संभालने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इनमें महिला पुलिस अधिकारी और कांस्टेबल भी शामिल थे।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और कथित मारपीट हुई।
महिला पुलिस अधिकारियों से दुर्व्यवहार की शिकायतों को भी जांच में शामिल किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित करने का प्रयास कर रही है।
मोबाइल और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
दिल्ली पुलिस केवल मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो तक सीमित नहीं है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, मीडिया कैमरों और अन्य उपलब्ध रिकॉर्डिंग की भी जांच की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान विवाद किस स्थान पर शुरू हुआ और पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट कब हुई।
अलग-अलग कैमरों से मिले वीडियो की सहायता से घटनाक्रम का क्रम तैयार किया जा रहा है।
जांच अधिकारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्तियों की सही पहचान सुनिश्चित की जाए।
पुलिस घायल कर्मचारियों की चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर चोटों की प्रकृति की जानकारी भी जुटा रही है।
पुलिसकर्मी अंकित कसाना का वीडियो वायरल
प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अंकित कसाना का रोते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था।
वीडियो में कांस्टेबल ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर मारपीट की।
उन्होंने अपनी वर्दी फाड़ने और शरीर पर चोट पहुंचाने का भी आरोप लगाया था।
इस घटना के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।
हालांकि, कांस्टेबल के आरोपों की जांच जारी है। पुलिस वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की सहायता से घटना की परिस्थितियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान सरकारी कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट और उनकी ड्यूटी में बाधा डालने के आरोपों को गंभीरता से लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।
गुरुवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अन्य लोगों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज की हैं।
इनमें पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा और दुर्व्यवहार जैसे आरोप शामिल हैं।
हालांकि, एफआईआर दर्ज होने का अर्थ संबंधित व्यक्तियों का दोषी साबित होना नहीं है। आरोपों की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर उनकी जिम्मेदारी तय होगी।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने किया था प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार और बुधवार को कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया।
इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडिया गठबंधन के कई सांसद शामिल हुए।
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
इसके बाद कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक तथा धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया था।
प्रियंका गांधी ने भी पुलिस पर लगाए आरोप
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में लेते समय महिला पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग किया।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें जबरन उठाया और इस दौरान उनके शरीर पर खरोंचें आईं।
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन रोकने और सांसदों को हिरासत में लेने की कार्रवाई का विरोध किया।
ऐसे में प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों की ओर से आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही घटनाओं की सही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विवाद
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने कहा है कि चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा।
दूसरी ओर चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
इस मुद्दे पर दिल्ली में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा है।
वीडियो जांच के बाद आगे बढ़ेगी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सामने आई घटनाओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान के लिए उपलब्ध वीडियो की जांच जारी है।
जांच में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि किन लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट की और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई।
पुलिसकर्मियों की शिकायतों के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।
फिलहाल तीन नई एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस की जांच, वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





