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SIR प्रदर्शन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप

Ratna Netam
4 Oct 2026 4:40 PM IST
SIR प्रदर्शन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप
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नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ 3 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई तीन महिलाओं ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर उनके साथ कथित बदसलूकी करने का आरोप लगाया है। तीनों महिलाओं ने खुद को पत्रकार बताते हुए इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद उनकी मेडिकल जांच कराई और मामले को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया है।
एक अधिकारी ने रविवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि तीन महिलाओं की ओर से पुलिस के सामने शिकायत दी गई है। महिलाओं का आरोप है कि SIR के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान जब उन्हें हिरासत में लिया गया, उस समय दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ गलत व्यवहार किया।
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) नेहा यादव ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रविवार शाम करीब 6 बजे तीन महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं और उन्होंने खुद को पत्रकार बताते हुए शिकायत दर्ज कराई। महिलाओं ने अपनी शिकायत में हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कथित बदसलूकी किए जाने का आरोप लगाया है।
DCP नेहा यादव के मुताबिक शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत करने वाली महिलाओं की मेडिकल जांच भी कराई गई है। इसके बाद पूरे प्रकरण को जांच के लिए क्राइम ब्रांच के पास भेज दिया गया है।
अब क्राइम ब्रांच शिकायत में लगाए गए आरोपों और 3 अक्टूबर को हुए घटनाक्रम की जांच करेगी। जांच के दौरान विरोध प्रदर्शन और हिरासत से जुड़े घटनाक्रम की परिस्थितियों को समझने की कोशिश की जाएगी। शिकायत में जिन अधिकारियों या कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
मामला 3 अक्टूबर को SIR के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की ओर से कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था। शिकायत करने वाली तीन महिलाओं का कहना है कि वे पत्रकार हैं और उसी दौरान उन्हें भी हिरासत में लिया गया था।
महिलाओं ने आरोप लगाया है कि हिरासत में लिए जाने के दौरान उनके साथ बदसलूकी हुई। फिलहाल पुलिस की ओर से शिकायत स्वीकार कर ली गई है और जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। आरोपों की सत्यता को लेकर अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
शिकायत मिलने के बाद मेडिकल जांच कराए जाने को मामले में महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट को जांच के दौरान उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के साथ देखा जा सकता है। इसके अलावा घटनास्थल और हिरासत की प्रक्रिया से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
क्राइम ब्रांच के सामने अब यह पता लगाने की जिम्मेदारी होगी कि प्रदर्शन के दौरान तीनों महिलाओं को किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया था और उस दौरान उनके साथ क्या हुआ। जांच में उस समय मौके पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान तथा उनकी भूमिका का पता लगाया जा सकता है।
इसके साथ ही घटनास्थल या आसपास उपलब्ध सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, वीडियो फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की मौजूदगी को देखते हुए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
तीनों महिलाओं ने खुद को पत्रकार बताया है। ऐसे में जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जा सकता है कि वे प्रदर्शन को कवर करने के लिए मौके पर मौजूद थीं या किन परिस्थितियों में उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस की ओर से अभी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मामला पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा होने के कारण इसे क्राइम ब्रांच को सौंपा जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे शिकायत में लगाए गए आरोपों की अलग स्तर पर जांच की जा सकेगी। जांच में संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किए जाने की संभावना है।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि तीन महिलाओं की शिकायत पुलिस ने दर्ज कर ली है और उनकी मेडिकल जांच भी पूरी हो चुकी है। इसके बाद मामला क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
SIR को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का घटनाक्रम अब इन शिकायतों के बाद नए सवालों के घेरे में आ गया है। महिलाओं की शिकायत की जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि हिरासत की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान महत्वपूर्ण होते हैं। साथ ही यदि घटनास्थल के वीडियो या अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तो उनसे भी घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। क्राइम ब्रांच इन सभी पहलुओं की जांच कर सकती है।
दिल्ली पुलिस की ओर से फिलहाल शिकायत मिलने, मेडिकल जांच कराए जाने और मामले को क्राइम ब्रांच के पास भेजे जाने की जानकारी दी गई है। शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
इसलिए पूरे मामले में आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। तीनों महिलाओं ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर बदसलूकी का आरोप लगाया है, जबकि इन आरोपों की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 3 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और हिरासत के समय शिकायतकर्ता महिलाओं के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या गलत व्यवहार की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल तीन महिला पत्रकारों की शिकायत ने मामले को गंभीर बना दिया है। दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज करने और मेडिकल जांच कराने के बाद इसे क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। अब सभी की नजर क्राइम ब्रांच की जांच और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर रहेगी।
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