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UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2026 में गड़बड़ियों का आरोप, अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी से लगाई गुहार

Kavita2
10 Sept 2026 12:43 PM IST
UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2026 में गड़बड़ियों का आरोप, अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी से लगाई गुहार
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नई दिल्ली। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के एक समूह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क कर UPSC सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी चिंता जताई है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा के प्रश्नपत्रों से लेकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से जारी प्रोविजनल आंसर की तक में कथित त्रुटियों का आरोप लगाया है।

अभ्यर्थियों की शिकायत मुख्य रूप से जनरल स्टडीज पेपर-I और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT) के कुछ सवालों को लेकर है। उनका दावा है कि कुछ प्रश्नों में तथ्यात्मक या व्याख्यात्मक खामियां थीं और कुछ सवालों के विकल्पों को लेकर भी स्पष्टता नहीं थी। इसके अलावा उम्मीदवारों ने आयोग की ओर से जारी अस्थायी उत्तर कुंजी में कथित गलतियों पर भी सवाल उठाए हैं।

अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी के सामने रखीं शिकायतें

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा किसी भी अभ्यर्थी के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें एक-एक अंक अंतिम परिणाम पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में यदि प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी में किसी तरह की त्रुटि होती है, तो उसका सीधा असर हजारों उम्मीदवारों के परिणाम और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

इसी चिंता को लेकर उम्मीदवारों के समूह ने राहुल गांधी से संपर्क किया और परीक्षा से संबंधित अपनी शिकायतें उनके सामने रखीं। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि कथित विसंगतियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से समीक्षा की जाए तथा यदि प्रश्नों या उत्तर कुंजी में गलती पाई जाती है तो उम्मीदवारों के हित में उचित कदम उठाए जाएं।

उम्मीदवारों ने विशेष रूप से कहा कि UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में प्रश्नों और उत्तरों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी कई वर्षों तक तैयारी करते हैं और सीमित सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर किसी भी तरह का संदेह उम्मीदवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।

जनरल स्टडीज पेपर-I पर उठे सवाल

अभ्यर्थियों ने जनरल स्टडीज पेपर-I के कुछ सवालों को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कुछ प्रश्नों की भाषा और उनके विकल्पों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

उम्मीदवारों का तर्क है कि प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्नों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि उनका एक स्पष्ट और तथ्यात्मक आधार हो। यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक संभावित उत्तर निकलते हैं या प्रश्न की व्याख्या को लेकर अलग-अलग मत संभव हैं, तो इससे उम्मीदवारों के प्रदर्शन का आकलन प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने UPSC से ऐसे सभी प्रश्नों की विशेषज्ञों की मदद से दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। उम्मीदवारों का कहना है कि यदि जांच में प्रश्न या विकल्प गलत पाए जाते हैं तो आयोग को सभी अभ्यर्थियों के हित में उपयुक्त निर्णय लेना चाहिए।

CSAT के सवालों पर भी आपत्ति

अभ्यर्थियों ने CSAT के कुछ सवालों को लेकर भी चिंता जताई है। CSAT प्रारंभिक परीक्षा का दूसरा प्रश्नपत्र है और इसमें गणितीय योग्यता, तार्किक क्षमता, समझ तथा विश्लेषणात्मक कौशल से जुड़े प्रश्न शामिल होते हैं।

उम्मीदवारों के अनुसार, CSAT में भी कुछ सवालों को लेकर आपत्तियां हैं। उनका कहना है कि प्रश्नों की संरचना और संभावित उत्तरों की समीक्षा की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि परीक्षा में किसी उम्मीदवार को अस्पष्ट या त्रुटिपूर्ण प्रश्न के कारण नुकसान न हो।

CSAT को लेकर उम्मीदवारों की शिकायत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रारंभिक परीक्षा में क्वालिफाइंग पेपर है और इसमें निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करना आवश्यक होता है। ऐसे में किसी प्रश्न में कथित गलती उम्मीदवारों की योग्यता पर असर डाल सकती है।

प्रोविजनल आंसर की पर भी सवाल

अभ्यर्थियों ने UPSC द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर की में भी कथित गलतियों का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि यदि उत्तर कुंजी में ही गलत उत्तर दिया गया है तो अभ्यर्थियों के अपने उत्तरों का सही मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है।

प्रोविजनल आंसर की का उद्देश्य परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को अपने उत्तरों का संभावित मिलान करने का अवसर देना होता है। इसके आधार पर अभ्यर्थी अपने संभावित स्कोर का अनुमान भी लगाते हैं। इसलिए उत्तर कुंजी की शुद्धता परीक्षा प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

उम्मीदवारों ने मांग की है कि सभी आपत्तियों की विशेषज्ञ समिति के माध्यम से जांच कराई जाए और अंतिम उत्तर कुंजी जारी करने से पहले हर सवाल तथा उसके सही उत्तर की गहन समीक्षा की जाए।

एक-एक अंक का होता है बड़ा महत्व

सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में उम्मीदवार इसमें शामिल होते हैं, जबकि अंतिम चयन के लिए उपलब्ध पदों की संख्या सीमित रहती है। प्रारंभिक परीक्षा में कुछ अंकों का अंतर भी उम्मीदवार के अगले चरण में पहुंचने या बाहर होने का कारण बन सकता है।

ऐसे में उम्मीदवारों का कहना है कि परीक्षा में निष्पक्षता और प्रश्नों की शुद्धता सुनिश्चित करना UPSC की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनका तर्क है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी या तथ्यात्मक गलती का समाधान उम्मीदवारों के हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

पारदर्शिता की मांग

अभ्यर्थियों ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि UPSC को उम्मीदवारों की आपत्तियों का विस्तृत परीक्षण कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन सवालों में त्रुटियां थीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।

राहुल गांधी से संपर्क करने के बाद यह मामला राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। अब उम्मीदवारों की नजर इस बात पर है कि उनकी शिकायतों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और UPSC कथित विसंगतियों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

फिलहाल अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यही है कि UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2026 के प्रश्नपत्र और प्रोविजनल आंसर की की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को किसी भी संभावित प्रश्नगत या उत्तर कुंजी संबंधी त्रुटि के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए। यदि शिकायतों की जांच में खामियां सामने आती हैं, तो उम्मीदवारों को उचित राहत देने की दिशा में कदम उठाना आवश्यक होगा।

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