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FCRA पंजीकरण में रिश्वत का आरोप, गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार

nidhi
30 Sept 2026 7:37 AM IST
FCRA पंजीकरण में रिश्वत का आरोप, गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार
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FCRA रजिस्ट्रेशन के नाम पर रिश्वतखोरी

नई दिल्ली: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA के तहत पंजीकरण कराने के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगने के मामले में दो सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर 28 सितंबर को नई दिल्ली में यह कार्रवाई की। गृह मंत्रालय से मिली विशेष सूचना के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी।

गिरफ्तार अधिकारियों में एक वरिष्ठ लेखाकार और दूसरा लेखाकार पद पर कार्यरत बताया गया है। आरोप है कि दोनों एक संस्था के लंबित FCRA पंजीकरण को आगे बढ़ाने के बदले अवैध भुगतान की मांग कर रहे थे। इनमें से एक अधिकारी गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात था, जबकि दूसरा पे एंड अकाउंट्स ऑफिस से जुड़ा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारी कुछ संस्थाओं के संपर्क में थे और
FCRA पंजीकरण
तथा नवीनीकरण की प्रक्रिया में मदद करने के बदले कथित रूप से रिश्वत की मांग कर रहे थे। गृह मंत्रालय को इस संबंध में जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों को कार्रवाई के लिए लगाया गया।
FCRA कानून के तहत विदेशी चंदा या वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। किसी संस्था को विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए पंजीकरण या निर्धारित अनुमति की आवश्यकता होती है। इसी प्रक्रिया को कथित रूप से प्रभावित करने और पंजीकरण आसान कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप अधिकारियों पर लगा है।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों ने पहले किसी अन्य संस्था से इसी तरह संपर्क किया था या नहीं। उनके पुराने मामलों, संपर्कों और FCRA पंजीकरण से जुड़े मामलों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के बीच किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
गृह मंत्रालय की ओर से सामने आई सूचना के आधार पर की गई यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि FCRA से जुड़े मामलों में प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद अहम होती है। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
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