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राहुल गांधी के साथ प्रदर्शन में दिखे अखिलेश यादव, अगले दिन खरगे के भोज से बनाई दूरी

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच इंडिया गठबंधन में आपसी तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मंगलवार, 6 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक साथ नजर आए थे। दोनों नेताओं ने विपक्षी दलों के साथ चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लिया। लेकिन अगले ही दिन बुधवार, 7 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से आयोजित भोज में समाजवादी पार्टी का कोई भी सांसद शामिल नहीं हुआ। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और सपा के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, कांग्रेस ने गठबंधन में किसी तरह के मतभेद से इनकार किया है।
मंगलवार को साथ दिखे राहुल और अखिलेश
दिल्ली में मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के नेता शामिल हुए।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी विरोध मार्च में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
पुलिस ने मार्च को रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई। इस दौरान कई नेताओं को हिरासत में भी लिया गया।
बुधवार को खरगे ने बुलाया था भोज
मंगलवार के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों के लिए दोपहर के भोजन का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम दिल्ली के जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में रखा गया था। इसमें विपक्षी दलों के सांसदों को आमंत्रित किया गया था।
भोज का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाना और चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे आंदोलन की आगे की रणनीति पर बातचीत करना था।
कार्यक्रम में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई सांसद पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्ष के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।
हालांकि, भोज में समाजवादी पार्टी के किसी सांसद के नहीं पहुंचने से राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं।
अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी पर सबसे ज्यादा चर्चा
खरगे के भोज में समाजवादी पार्टी के शामिल नहीं होने को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव की हुई।
इसकी प्रमुख वजह यह थी कि एक दिन पहले ही अखिलेश यादव राहुल गांधी के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए थे। ऐसे में अगले दिन आयोजित कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा।
समाजवादी पार्टी के अन्य सांसद भी भोज में शामिल नहीं हुए। हालांकि, केवल इस गैरमौजूदगी के आधार पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक संबंध खराब होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
सपा की ओर से कहा गया कि पार्टी नेताओं को कार्यक्रम की जानकारी नहीं मिली थी। वहीं कांग्रेस ने भी आमंत्रण की सूचना देर से पहुंचने की बात स्वीकार की है।
शिवसेना और एनसीपी के सांसद भी नहीं पहुंचे
मल्लिकार्जुन खरगे के भोज में केवल समाजवादी पार्टी ही गैरहाजिर नहीं थी। इंडिया गठबंधन में शामिल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सांसद भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
इन तीनों दलों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं सामने आईं।
हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम का फैसला मंगलवार देर रात किया गया था। ऐसे में कुछ सहयोगी दलों के सांसदों तक समय पर सूचना नहीं पहुंच सकी।
कांग्रेस के अनुसार, कुछ नेताओं के पहले से तय कार्यक्रम होने के कारण भी वे भोज में शामिल नहीं हो पाए।
जयराम रमेश ने दी सफाई
समाजवादी पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के सांसदों की गैरमौजूदगी पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने बताया कि भोज आयोजित करने का फैसला मंगलवार रात को लिया गया था। इसके बाद सभी सहयोगी दलों को सूचना देने का प्रयास किया गया।
रमेश ने कहा कि कम समय में कार्यक्रम तय होने के कारण कुछ दलों के सांसद इसमें शामिल नहीं हो सके।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटनाक्रम को विपक्षी गठबंधन के भीतर मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों का साझा रुख बना हुआ है और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
सपा ने कहा- कार्यक्रम की जानकारी नहीं मिली
समाजवादी पार्टी की ओर से भी भोज में शामिल नहीं होने को लेकर प्रतिक्रिया सामने आई।
सपा नेताओं ने कहा कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के भोज की जानकारी नहीं दी गई थी। इसी कारण पार्टी का कोई सांसद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ।
इस बयान के बाद कार्यक्रम के आमंत्रण और विपक्षी दलों के बीच संवाद को लेकर सवाल उठने लगे।
हालांकि, समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन समाप्त करने या चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे आंदोलन से अलग होने की कोई घोषणा नहीं की है।
मंगलवार के प्रदर्शन में सपा की भागीदारी भी इस बात को दर्शाती है कि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर दोनों दलों ने संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संबंधों को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं।
दोनों दल लोकसभा चुनाव में सहयोगी रह चुके हैं। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम से समाजवादी पार्टी की गैरमौजूदगी को आगामी चुनावी तालमेल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
लेकिन इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि भोज में शामिल नहीं होने का निर्णय विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे से जुड़ा था।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन जारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
वहीं चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
बुधवार को भी राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
विपक्षी एकजुटता पर बनी हुई हैं नजरें
मल्लिकार्जुन खरगे के भोज से समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के सांसदों की गैरमौजूदगी ने विपक्षी गठबंधन के समन्वय को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
एक ओर कांग्रेस इसे अचानक तय हुए कार्यक्रम और सूचना पहुंचने में देरी से जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आमंत्रण की जानकारी नहीं मिलने की बात कही है।
फिलहाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने आपसी राजनीतिक सहयोग समाप्त करने की कोई घोषणा नहीं की है। ऐसे में भोज में गैरमौजूदगी को गठबंधन में टूट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अब आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों में दोनों दलों की भागीदारी और उनके नेताओं के बयानों से विपक्षी गठबंधन के आपसी तालमेल की स्थिति और स्पष्ट होगी।





