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अकाली दल ने थामा मोदी सरकार का हाथ परिसीमन बिल पर समर्थन से बढ़ी हलचल

Ratna Netam
8 Aug 2026 5:52 PM IST
अकाली दल ने थामा मोदी सरकार का हाथ परिसीमन बिल पर समर्थन से बढ़ी हलचल
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नई दिल्ली :परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को समर्थन जुटाने की कोशिशों के बीच भाजपा के पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल का रुख बदलता दिखाई दे रहा है। अप्रैल में परिसीमन बिल का विरोध करने वाले अकाली दल ने अब केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करने का ऐलान किया है। पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। पीएम मोदी के साथ मुलाकात के अगले ही दिन अकाली दल की ओर से परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को लेकर समर्थन की घोषणा को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पार्टी के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल देश में महिला आरक्षण बिल को तत्काल लागू किए जाने की मांग करता है। पार्टी का कहना है कि महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों को सुनिश्चित करना जरूरी है। अकाली दल ने अपने रुख को सिख गुरुओं की शिक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों की वकालत की गई है। पार्टी ने यह भी बताया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है।
परिसीमन को लेकर अकाली दल ने सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व देने की बात कही है। पार्टी ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें सभी राज्यों की विधानसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान बताया गया है। सुखबीर बादल के मुताबिक, पार्टी ने संसद के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया और इसके बाद निष्पक्ष तथा न्यायसंगत परिसीमन की मांग रखी।
अकाली दल के मौजूदा रुख को अप्रैल के घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। जब केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन से संबंधित बिल संसद में लाया गया था, तब शिरोमणि अकाली दल ने इसका विरोध किया था। उस समय पार्टी नेताओं ने आशंका जताई थी कि प्रस्तावित व्यवस्था से पंजाब को नुकसान हो सकता है। अकाली दल का तर्क था कि पड़ोसी राज्यों की सीटों में वृद्धि होने की स्थिति में पंजाब के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से मतदान के दौरान पार्टी ने विपक्ष के साथ जाकर बिल के खिलाफ वोट किया था।
हालांकि अब पार्टी के रुख में बदलाव आया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद शनिवार को अकाली दल की वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसके बाद पार्टी ने परिसीमन के प्रस्ताव का समर्थन करने की घोषणा की। महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग भी इसी बैठक के बाद सामने आई।
अकाली दल के इस फैसले का पंजाब की राजनीति के लिहाज से भी महत्व है। राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के प्रमुख सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों के बीच करीब ढाई दशक तक गठबंधन रहा, लेकिन वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों के रास्ते अलग हो गए। इसके बाद 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़ा।
अलग-अलग चुनाव लड़ने के दौरान दोनों पार्टियों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में अब एक बार फिर दोनों के बीच राजनीतिक नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई है। अकाली दल की ओर से परिसीमन बिल को समर्थन दिए जाने को भी इसी व्यापक राजनीतिक घटनाक्रम के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चा है। हालांकि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। सबसे बड़ा सवाल सीट बंटवारे और दोनों पार्टियों की भूमिका को लेकर है। पिछले ढाई दशक में पंजाब की राजनीति में भाजपा आमतौर पर अकाली दल की जूनियर सहयोगी रही है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां पहले की तुलना में अलग हैं। भाजपा अब गठबंधन में अधिक बड़ी भूमिका की अपेक्षा रख सकती है।
ऐसे में परिसीमन बिल पर अकाली दल का समर्थन केवल संसद के एक प्रस्ताव तक सीमित रहता है या आने वाले समय में भाजपा और अकाली दल के बीच राजनीतिक रिश्तों को भी नई दिशा देता है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल सुखबीर सिंह बादल की घोषणा ने पंजाब की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की चर्चा को जरूर तेज कर दिया है।
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