दिल्ली-एनसीआर

AISA प्रदर्शनकारियों का आरोप, मार्च के दौरान पुलिस ने किया हमला

Kiran
12 Oct 2026 8:40 AM IST
AISA प्रदर्शनकारियों का आरोप, मार्च के दौरान पुलिस ने किया हमला
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Delhi राजधानी में छात्र और युवा संगठनों को एक बार फिर पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) के सदस्यों ने आरोप लगाया कि RK आश्रम से जंतर-मंतर तक विरोध मार्च के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। वहीं, 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (SFI) की 22 महिला कार्यकर्ताओं को कनॉट प्लेस में एक अलग तिरंगा रैली के दौरान हिरासत में लिया गया। ये विरोध प्रदर्शन उस घटना के एक दिन बाद हुए, जब चुनाव में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कई छात्र और युवा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
शनिवार को पुलिस की कार्रवाई के बावजूद सड़कों पर उतरे AISA सदस्यों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। वे चुनाव में कथित गड़बड़ी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के विरोध स्थल तक पहुंचने से पहले ही मार्च को रोक दिया गया। AISA की अध्यक्ष नेहा समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान उनके साथ मारपीट की, जिससे लगभग सभी प्रतिभागी घायल हो गए।
इस कथित मारपीट को अपने सदस्यों के खिलाफ पुलिस की सबसे क्रूर कार्रवाई में से एक बताते हुए, AISA ने अधिकारियों पर प्रदर्शन को दबाने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इस बीच, कनॉट प्लेस में SFI की महिला कार्यकर्ताओं ने शनिवार को हुई कथित पुलिस बर्बरता और दक्षिणपंथी समूहों द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर किए गए हमलों के खिलाफ तिरंगा रैली आयोजित की।
SFI के अनुसार, सूर्यास्त के बाद 22 महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेते समय पुरुष पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की और उन्हें थप्पड़ मारे। अपने बयान में SFI ने कहा, "इस रैली से महिला कार्यकर्ताओं को उठाकर हिरासत में लिया गया, जबकि BNSS की धारा 43(5) के तहत सूर्यास्त के बाद महिलाओं को गिरफ्तार करना या हिरासत में लेना गैर-कानूनी है।"
संगठन ने आगे आरोप लगाया, "इन महिला कार्यकर्ताओं के साथ न केवल पुरुष पुलिस अधिकारियों ने बदसलूकी की, बल्कि हिरासत में लेते समय उनके चेहरे पर थप्पड़ भी मारे — जो BNSS की धारा 46(1) का खुला उल्लंघन है। इस धारा के अनुसार, केवल महिला पुलिस अधिकारी ही किसी महिला को शारीरिक रूप से संभाल सकती हैं, उसकी तलाशी ले सकती हैं या उसे हिरासत में ले सकती हैं।"
SFI ने यह भी दावा किया कि हिरासत में ली गई कार्यकर्ताओं को ले जाने वाली बस में लाइटें नहीं थीं और उसके अंदर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। आरोप लगाया गया कि इन हालात ने 'शीला बारसे बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में तय किए गए सुरक्षा उपायों का उल्लंघन किया। संगठन ने कहा कि इस रैली का मकसद शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान नाबालिग महिला प्रदर्शनकारियों और महिला पत्रकारों पर हुए कथित हमलों का विरोध करना भी था। रविवार की घटनाओं के साथ ही मध्य दिल्ली में पुलिस और छात्र संगठनों के बीच टकराव का यह लगातार दूसरा दिन था; मारपीट के नए आरोपों और महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने से इन प्रदर्शनों को लेकर विवाद और बढ़ गया है।
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