दिल्ली-एनसीआर

Air मार्शल विक्रम गौर सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव नियुक्त

Ratna Netam
27 Oct 2026 10:01 PM IST
Air मार्शल विक्रम गौर सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव नियुक्त
x
नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी एयर मार्शल विक्रम गौर को रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs-DMA) में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस नियुक्ति को भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि विक्रम गौर इस पद पर पहुंचने वाले भारतीय वायुसेना के पहले अधिकारी हैं। इससे पहले वह विभाग में संयुक्त सचिव (वायु एवं स्टाफ ड्यूटी) के पद पर कार्यरत थे। हालांकि, अतिरिक्त सचिव के पद पर उनकी नई नियुक्ति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है। संसदीय दस्तावेजों में उनकी पूर्व नियुक्ति का उल्लेख मिलता है।
सैन्य मामलों के विभाग में बढ़ेगी वायुसेना की भागीदारी
सैन्य मामलों का विभाग रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। इसकी स्थापना जनवरी 2020 में भारतीय सशस्त्र बलों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत सैन्य व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी।यह विभाग थलसेना, नौसेना और वायुसेना से संबंधित विभिन्न प्रशासनिक तथा नीतिगत विषयों पर काम करता है।इसके अतिरिक्त तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी का अतिरिक्त सचिव पद तक पहुंचना सैन्य प्रशासन में तीनों सेवाओं के प्रतिनिधित्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
कौन हैं एयर मार्शल विक्रम गौर?
एयर मार्शल विक्रम गौर भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी हैं। उन्होंने 15 दिसंबर 1990 को वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन प्राप्त किया था।अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं।वह तेजपुर में मुख्य परिचालन अधिकारी, ग्वालियर में एयर ऑफिसर कमांडिंग और अफगानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित भारतीय दूतावास में एयर अताशे के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।इसके अलावा वायुसेना मुख्यालय में एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स तथा कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस से संबंधित जिम्मेदारियों का अनुभव भी उनके पास है।उनकी सेवाओं के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक सहित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
संयुक्त सचिव के रूप में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
विक्रम गौर अक्टूबर 2024 से सैन्य मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत रहे हैं।वह संयुक्त सचिव (वायु एवं स्टाफ ड्यूटी) के पद पर वायुसेना से संबंधित प्रशासनिक और नीतिगत मामलों का कार्य देख रहे थे।जुलाई 2026 में उन्हें एयर मार्शल के पद पर पदोन्नत किए जाने का विवरण भी उपलब्ध सैन्य सेवा रिकॉर्ड में दर्ज है।रक्षा मंत्रालय के संसदीय दस्तावेजों में मार्च 2026 तक उन्हें एयर वाइस मार्शल और संयुक्त सचिव के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।इस पृष्ठभूमि में अतिरिक्त सचिव पद पर उनकी कथित नियुक्ति को उनके प्रशासनिक अनुभव से जोड़कर देखा जा रहा है।
तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना प्रमुख उद्देश्य
भारत सरकार ने सैन्य मामलों के विभाग का गठन तीनों सशस्त्र सेनाओं के बीच बेहतर सहयोग विकसित करने के लिए किया था।इसके अंतर्गत संयुक्त सैन्य योजनाएं तैयार करना, प्रशिक्षण में समन्वय बढ़ाना और उपलब्ध रक्षा संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना प्रमुख कार्य हैं।विभाग सैन्य आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर भी काम करता है।सैन्य मामलों के विभाग में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की भागीदारी से रक्षा नीतियों के निर्माण में परिचालन अनुभव का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है।
रक्षा मंत्रालय में सैन्य अधिकारियों को मिल रही बड़ी जिम्मेदारी
वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने सैन्य मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों पर वर्दीधारी सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी।इस निर्णय का उद्देश्य रक्षा प्रशासन में सैन्य अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाना था।इसी व्यवस्था के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों को विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।इससे सैन्य आवश्यकताओं और सरकारी निर्णय प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
भविष्य की रक्षा चुनौतियों के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारतीय सशस्त्र बल वर्तमान समय में आधुनिक युद्ध तकनीकों, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं और संयुक्त सैन्य संचालन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।ऐसी परिस्थितियों में सैन्य मामलों के विभाग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व हवाई सुरक्षा, संयुक्त अभियानों और संसाधनों के समन्वित उपयोग के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।विक्रम गौर की अतिरिक्त सचिव के रूप में नियुक्ति संबंधी औपचारिक आदेश सामने आने के बाद उनके नए कार्यभार और जिम्मेदारियों की स्थिति स्पष्ट होगी।
Next Story