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फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट के पायलट का डोप टेस्ट नॉन-नेगेटिव

Kavita2
12 Aug 2026 2:19 PM IST
फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट के पायलट का डोप टेस्ट नॉन-नेगेटिव
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नई दिल्ली। फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई टर्बुलेंस की घटना अब पायलट के कथित डोप टेस्ट को लेकर चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक, फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड का ड्रग टेस्ट शुरुआती तौर पर ‘नॉन-नेगेटिव’ आया था। इसके बाद किए गए परीक्षण में कथित तौर पर एक अन्य साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी का पता चला। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

जानकारी के अनुसार, 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट को उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। हवा के दबाव में अचानक बदलाव के कारण विमान को झटका लगा और विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया। घटना के दौरान विमान में सवार 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

टर्बुलेंस के कारण विमान के अचानक नीचे आने की घटना को गंभीरता से लिया गया है। एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि विमान को अचानक किस प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़ा, उस समय उड़ान की परिस्थितियां क्या थीं और क्या किसी मानवीय या तकनीकी कारण ने घटना को प्रभावित किया।

इसी बीच पायलट के कथित डोप टेस्ट का मामला सामने आने से जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पायलट का शुरुआती ड्रग टेस्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ आया था। इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए उड़ान ड्यूटी से अलग रखा गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, आगे की जांच में एक दूसरे साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी का भी पता चला। कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि पायलट ने मारिजुआना का सेवन किया था। हालांकि, किसी व्यक्ति के ड्रग टेस्ट के संबंध में अंतिम निष्कर्ष केवल आधिकारिक और पुष्टि किए गए परीक्षण परिणामों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विमान संचालन में पायलट की शारीरिक और मानसिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उड़ान के दौरान पायलट को अचानक बदलती मौसम परिस्थितियों, टर्बुलेंस और अन्य आपात स्थितियों में तुरंत निर्णय लेने होते हैं। ऐसे में किसी भी साइकोएक्टिव पदार्थ के सेवन की पुष्टि होने पर विमानन सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत गंभीर कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है।

फ्लाइट में टर्बुलेंस के दौरान 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। टर्बुलेंस के दौरान विमान में बैठे यात्रियों के चोटिल होने का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर तब जब यात्री सीट बेल्ट न लगाए हों। विमान के अचानक ऊंचाई बदलने या झटके लगने से यात्री और केबिन क्रू सीटों से ऊपर उछल सकते हैं और चोट लग सकती है।

घटना के बाद विमान की स्थिति और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाई गईं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना में किसी बड़े स्तर के जान-माल के नुकसान की बात सामने नहीं आई है। घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

AAIB की जांच में मौसम संबंधी परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही होगी। टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है और हर टर्बुलेंस घटना को केवल पायलट की गलती से जोड़ना उचित नहीं होता। विमान की ऊंचाई, गति, मौसम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिली जानकारी और उड़ान के दौरान पायलट की प्रतिक्रिया जैसे कई पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

पायलट के डोप टेस्ट को लेकर सामने आई जानकारी भी जांच में एक अलग महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है। यह पता लगाना जरूरी होगा कि परीक्षण किस समय किया गया, किस प्रकार का परीक्षण हुआ, उसका परिणाम क्या था और बाद में किए गए पुष्टिकरण परीक्षणों में क्या सामने आया। इन सभी तथ्यों के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि पायलट की मेडिकल स्थिति का घटना से कोई संबंध था या नहीं।

एविएशन सेक्टर में पायलटों के लिए नशीले और साइकोएक्टिव पदार्थों को लेकर सख्त नियम लागू होते हैं। उड़ान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलटों और अन्य महत्वपूर्ण क्रू सदस्यों की मेडिकल जांच की जाती है। किसी संदिग्ध परिणाम के सामने आने पर संबंधित कर्मचारी को उड़ान ड्यूटी से हटाकर आगे की जांच की जा सकती है।

इस मामले में भी शुरुआती ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम के बाद पायलट को कुछ समय के लिए उड़ान से रोके जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम अपने आप में अंतिम रूप से किसी पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं करता। ऐसे परिणामों के बाद नियमानुसार पुष्टि परीक्षण और विशेषज्ञ मूल्यांकन आवश्यक हो सकते हैं।

घटना ने यात्रियों की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र में मेडिकल निगरानी को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। यात्रियों के लिए यह भरोसा महत्वपूर्ण है कि विमान उड़ाने वाले पायलट पूरी तरह सुरक्षित और ड्यूटी के लिए उपयुक्त स्थिति में हों। वहीं किसी घटना की जांच के दौरान तथ्यों की पुष्टि होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।

फिलहाल AAIB की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच में टर्बुलेंस की प्रकृति, विमान की ऊंचाई में बदलाव, मौसम संबंधी परिस्थितियां, विमान के संचालन और क्रू की भूमिका समेत सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। पायलट के कथित डोप टेस्ट के परिणामों को भी जांच के संदर्भ में देखा जाएगा।

फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की यह घटना विमानन सुरक्षा के लिए एक गंभीर मामला है। एक ओर टर्बुलेंस के कारण 17 लोगों के घायल होने की बात सामने आई है, वहीं पायलट के कथित ड्रग टेस्ट ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, अभी अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। तब तक पायलट के संबंध में सामने आई रिपोर्टों को आरोप या अंतिम पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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