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Air इंडिया में खर्च कटौती पर मंथन, बोर्ड मीटिंग में छुट्टी और बोनस टालने जैसे विकल्पों पर चर्चा

Delhi दिल्ली: एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में कंपनी के खर्च को कम करने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की। घाटे में चल रही इस एयरलाइन पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका एक प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों को भी बताया जा रहा है।
यह बैठक हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एयर इंडिया मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुई और तीन घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान कंपनी की वित्तीय स्थिति और लागत नियंत्रण रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड ने खर्च कम करने के लिए कई संभावित उपायों पर चर्चा की, जिनमें कर्मचारियों से जुड़ी नीतियों में अस्थायी बदलाव भी शामिल हैं। इनमें छुट्टी नीतियों में संशोधन और बोनस भुगतान को टालने जैसे विकल्पों पर विचार किया गया है।
कंपनी के सामने मौजूदा समय में कई आर्थिक चुनौतियां हैं, जिनमें परिचालन लागत में बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ वैश्विक क्षेत्रों में तनावपूर्ण स्थिति शामिल है। इन सभी कारणों का असर एयरलाइन के राजस्व और लाभ पर पड़ा है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि किस तरह परिचालन दक्षता को बढ़ाकर और गैर-जरूरी खर्चों को नियंत्रित कर कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिर किया जा सकता है। प्रबंधन ने लागत घटाने के लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों तरह की रणनीतियों पर विचार किया।
सूत्रों का कहना है कि एयरलाइन का ध्यान फिलहाल संचालन को स्थिर बनाए रखने और घाटे को कम करने पर केंद्रित है। इसके लिए विभिन्न विभागों में खर्चों की समीक्षा की जा रही है।
हालांकि, किसी भी प्रस्तावित बदलाव पर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। बोर्ड आने वाले समय में वित्तीय स्थिति की समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तय करेगा।
एयर इंडिया के पुनर्गठन और सुधार की प्रक्रिया के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खर्च नियंत्रण के प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो एयरलाइन की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार संभव है।





