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वायुसेना की बढ़ेगी ताकत 60 एमटीए विमानों के लिए एक लाख करोड़ का टेंडर जारी

nidhi
13 Aug 2026 6:27 AM IST
वायुसेना की बढ़ेगी ताकत 60 एमटीए विमानों के लिए एक लाख करोड़ का टेंडर जारी
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वायुसेना को मिलेंगे 60 एमटीए विमान टाटा समेत कई बड़ी कंपनियां दौड़ में
नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना अपनी रणनीतिक और सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वायुसेना ने करीब 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद के लिए लगभग एक लाख करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इस मेगा डील में देश और दुनिया की कई प्रमुख विमान निर्माता कंपनियां अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं। घरेलू कंपनी टाटा समूह भी इस दौड़ में अहम दावेदार के रूप में सामने है।
क्या है पूरा मामला?
भारतीय वायुसेना को ऐसे मध्यम क्षमता वाले परिवहन विमानों की जरूरत है, जो सैनिकों, सैन्य उपकरणों और जरूरी सामान को लंबी दूरी तक तेजी से पहुंचा सकें। प्रस्तावित MTA विमानों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। करीब 60 विमानों की यह खरीद भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े के आधुनिकीकरण की बड़ी परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। मौजूदा परिवहन विमानों पर निर्भरता कम करने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए विमानों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
टाटा समेत कई कंपनियां रेस में
इस परियोजना में टाटा समूह की भागीदारी को खास महत्व दिया जा रहा है। भारत में रक्षा निर्माण और एयरोस्पेस क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। टाटा समूह पहले से ही विमान निर्माण और रक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है। इसके अलावा वैश्विक स्तर की प्रमुख विमान निर्माता कंपनियां भी इस टेंडर में रुचि दिखा सकती हैं। प्रतियोगिता के जरिए भारतीय वायुसेना को अपनी परिचालन जरूरतों के अनुरूप बेहतर विमान और तकनीकी विकल्प मिलने की उम्मीद है।
भारत में बन सकते हैं विमान
इस सौदे की सबसे अहम विशेषताओं में से एक स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देना हो सकता है। यदि परियोजना में भारत में निर्माण, तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन की शर्तें शामिल होती हैं, तो इससे देश के एयरोस्पेस उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है। भारत सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर दे रही है। ऐसे में MTA कार्यक्रम देश में विमान निर्माण की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रणनीतिक रूप से क्यों अहम है MTA?
मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इनके जरिए सैनिकों की तैनाती, राहत सामग्री की आपूर्ति, सैन्य उपकरणों की आवाजाही और आपातकालीन अभियानों को तेजी से अंजाम दिया जा सकता है। भारत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे विमानों की जरूरत और बढ़ जाती है। पहाड़ी सीमाओं से लेकर दूरदराज के इलाकों तक सैन्य सामग्री और जवानों को तेजी से पहुंचाने में आधुनिक परिवहन विमान अहम भूमिका निभाते हैं।
एक लाख करोड़ की डील से बढ़ेगा रक्षा उद्योग
करीब एक लाख करोड़ रुपये के इस संभावित सौदे का असर केवल वायुसेना की क्षमता तक सीमित नहीं रहेगा। इतनी बड़ी परियोजना से भारतीय रक्षा उद्योग, एयरोस्पेस सप्लाई चेन, निजी कंपनियों और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अगर विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में निर्मित होता है, तो इससे रोजगार, तकनीकी कौशल और स्थानीय विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों की तकनीकी और व्यावसायिक पेशकशों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद पात्र कंपनियों के प्रस्तावों की तुलना और परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अंतिम चयन में विमान की क्षमता, कीमत, तकनीकी प्रदर्शन, रखरखाव और भारत में निर्माण से जुड़े पहलुओं को महत्व दिया जा सकता है।
60 MTA विमानों की यह परियोजना पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े को नई क्षमता मिल सकती है। साथ ही यह सौदा भारत के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
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