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AK-203 राइफलों के लिए अडानी डिफेंस की बड़ी डील

Kavita2
5 Sept 2026 5:58 PM IST
AK-203 राइफलों के लिए अडानी डिफेंस की बड़ी डील
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नई दिल्ली। भारत में रक्षा उत्पादन को स्वदेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के साथ पांच साल का समझौता किया है। इसके तहत भारत में निर्मित की जा रही AK-203 असॉल्ट राइफलों के लिए 7.62x39 एमएम कैलिबर का देश में निर्मित गोला-बारूद उपलब्ध कराया जाएगा। इस समझौते का उद्देश्य AK-203 कार्यक्रम के लिए एक मजबूत और एकीकृत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करना है।

समझौते के तहत अडानी डिफेंस अगले पांच वर्षों तक AK-203 कार्यक्रम के लिए आवश्यक छोटे कैलिबर वाले एम्युनिशन की आपूर्ति करेगी। इससे राइफल निर्माण कार्यक्रम को गोला-बारूद के लिए एक भारतीय स्रोत मिलेगा और समझौते की अवधि में इसकी नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

यह करार ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब भारत रक्षा उपकरणों और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण कंपोनेंट तथा गोला-बारूद के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। AK-203 राइफल का निर्माण भी भारत-रूस रक्षा सहयोग के तहत देश में किया जा रहा है।

पांच साल तक होगी एम्युनिशन की सप्लाई

समझौते की अवधि पांच साल रखी गई है। इस दौरान अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस AK-203 कार्यक्रम की जरूरतों के अनुरूप 7.62x39 एमएम गोला-बारूद उपलब्ध कराएगी।

इस व्यवस्था से राइफल और उसके लिए जरूरी एम्युनिशन दोनों की सप्लाई चेन को देश के भीतर मजबूत करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र में केवल हथियार का घरेलू उत्पादन ही महत्वपूर्ण नहीं होता बल्कि उसके नियमित इस्तेमाल के लिए जरूरी गोला-बारूद की लगातार उपलब्धता भी अहम होती है।

लंबी अवधि का आपूर्ति समझौता होने से उत्पादन और आपूर्ति की योजना बनाने में भी आसानी हो सकती है। इससे AK-203 कार्यक्रम के लिए आवश्यक एम्युनिशन की उपलब्धता को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।

भारत में बन रही AK-203 राइफल

AK-203 असॉल्ट राइफल का उत्पादन भारत में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है। IRRPL की स्थापना वर्ष 2019 में भारत और रूस के बीच हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत की गई थी।

इस संयुक्त उद्यम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों के लिए AK-203 राइफलों का निर्माण भारत में करना है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थापित है।

AK-203 प्रसिद्ध कलाश्निकोव राइफल परिवार का हिस्सा है। भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बड़े स्तर पर इन राइफलों का घरेलू उत्पादन रक्षा क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

घरेलू सप्लाई चेन होगी मजबूत

अडानी डिफेंस और IRRPL के बीच हुआ समझौता विशेष रूप से सप्लाई चेन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हथियार प्रणाली के साथ उसके गोला-बारूद की घरेलू उपलब्धता बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, युद्ध या वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान की स्थिति में रक्षा सामग्री की उपलब्धता किसी भी देश के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। इसी वजह से भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दे रहा है।

AK-203 के लिए देश में निर्मित एम्युनिशन उपलब्ध होने से इस कार्यक्रम से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण हिस्सा घरेलू विनिर्माण व्यवस्था से जुड़ जाएगा।

अडानी डिफेंस की बढ़ती भूमिका

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने हाल के वर्षों में भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। कंपनी विभिन्न रक्षा प्रणालियों और उनसे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों में काम कर रही है।

नया समझौता छोटे कैलिबर वाले गोला-बारूद के क्षेत्र में कंपनी की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है। पांच साल तक लगातार सप्लाई की जिम्मेदारी मिलने से कंपनी AK-203 कार्यक्रम की घरेलू आपूर्ति व्यवस्था का हिस्सा बनेगी।

इस तरह के दीर्घकालिक समझौते निजी रक्षा कंपनियों को उत्पादन क्षमता और सप्लाई नेटवर्क विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर

भारत सरकार लंबे समय से रक्षा आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को रक्षा उपकरणों, हथियारों, गोला-बारूद और दूसरे महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू निर्माण में शामिल किया जा रहा है।

AK-203 कार्यक्रम भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। भारत में राइफल का उत्पादन होने के साथ अब उसके लिए आवश्यक गोला-बारूद का भारतीय स्रोत तैयार होना स्थानीयकरण को और आगे बढ़ा सकता है।

घरेलू उत्पादन का फायदा केवल रणनीतिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय विनिर्माण क्षमता, तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

भारत-रूस रक्षा सहयोग की अहम परियोजना

इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड भारत और रूस के रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसे दोनों देशों के बीच सरकारी समझौते के तहत स्थापित किया गया था।

कोरवा स्थित इकाई में AK-203 राइफलों का उत्पादन भारतीय सुरक्षा बलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर आधुनिक असॉल्ट राइफल उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन क्षमता को भारत में विकसित करना भी है।

अब घरेलू स्तर पर एम्युनिशन सप्लाई की व्यवस्था जुड़ने से परियोजना की भारतीय सप्लाई चेन और व्यापक हो सकती है।

लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करने पर फोकस

पांच साल का समझौता इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि इससे एम्युनिशन की मांग और आपूर्ति को लंबी अवधि के आधार पर व्यवस्थित किया जा सकेगा। रक्षा बलों के लिए किसी हथियार प्रणाली की प्रभावशीलता उसके लिए पर्याप्त मात्रा में गोला-बारूद उपलब्ध होने पर भी निर्भर करती है।

ऐसे में उत्पादन और सप्लाई के लिए घरेलू स्रोत का होना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से जरूरत के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने की क्षमता विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।

अडानी डिफेंस और IRRPL का यह समझौता AK-203 कार्यक्रम में स्वदेशीकरण की दिशा में एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है। कोरवा में राइफल उत्पादन और भारत में निर्मित गोला-बारूद की सप्लाई के साथ परियोजना के लिए घरेलू रक्षा उत्पादन का दायरा बढ़ेगा।

आने वाले पांच वर्षों में यह करार AK-203 कार्यक्रम के लिए एम्युनिशन की नियमित उपलब्धता बनाए रखने के साथ भारत की रक्षा विनिर्माण और सप्लाई चेन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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