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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी सैकड़ों प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई
nidhi
12 Oct 2026 7:26 AM IST

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'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लें'
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद रविवार, 11 अक्टूबर को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। अदालत ने शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लेने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शन के दूसरे दिन करीब 200 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस कार्रवाई और नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सुनवाई में दिए निर्देश
रविवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों और हिरासत से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। अदालत ने विशेष रूप से शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के एकत्र होने के अधिकार पर जोर दिया। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के अनुसार आवश्यक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों और कथित अवैध हिरासत के मामलों पर जवाब मांगा।
दूसरे दिन करीब 200 प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली में शनिवार, 10 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की तैयारी थी। कॉक्रोच जनता पार्टी यानी CJP के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। शनिवार को पुलिस ने करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। इसके बाद रविवार को भी प्रदर्शन जारी रहा।
रविवार को कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में छोटे-छोटे समूहों में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने विभिन्न स्थानों से करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें छात्र संगठनों के सदस्य और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे।
कनॉट प्लेस में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव
रविवार को कनॉट प्लेस के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। प्रदर्शनकारी अलग-अलग समूहों में पहुंचकर विरोध दर्ज करा रहे थे। इस दौरान पुलिस ने कई लोगों को बसों में बैठाकर इलाके से हटाया। रिपोर्टों के अनुसार, कनॉट प्लेस से लगभग 100 लोगों को दो बसों में ले जाया गया। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वे प्रदर्शन में शामिल नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान भी दिखाई दी। हालांकि, प्रत्येक हिरासत की कानूनी वैधता का अलग-अलग परीक्षण आवश्यक है।
छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और क्रांतिकारी युवा संगठन से जुड़े कार्यकर्ता भी मौजूद थे। सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और छात्र नेता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। दूसरी ओर, दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी।
मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं को लेकर भी आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर ही नहीं, बल्कि दिल्ली में सार्वजनिक सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों पर भी निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होनी चाहिए। सार्वजनिक व्यवस्था के लिए कानून के तहत जरूरी होने पर ही प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अदालत ने इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने और नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लगाए गए प्रतिबंध संबंधी सूचना बोर्ड को हटाने का भी निर्देश दिया, ताकि न्यायालय तक पहुंच प्रभावित न हो। अदालत ने वकीलों और पत्रकारों को अपने पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में अनावश्यक बाधा नहीं पहुंचाने पर भी जोर दिया।
अधिकारियों को अवमानना याचिका पर नोटिस
प्रदर्शन से पहले दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि अदालत के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। मामले में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। नोटिस जारी होने का अर्थ अदालत की अवमानना सिद्ध होना नहीं है। संबंधित पक्षों का जवाब और आगे की सुनवाई के बाद ही इस संबंध में न्यायिक निष्कर्ष सामने आएगा।
प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान
CJP ने हिरासत में लिए गए अपने नेताओं की रिहाई के बाद विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है। संगठन के नेताओं ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को चुनाव आयोग ने खारिज किया है। फिलहाल दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर कानूनी तथा राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी हुई हिरासत की कार्रवाई का मामला अब महत्वपूर्ण बन गया है। आने वाली सुनवाई में अदालत के समक्ष अधिकारियों के जवाब और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर विचार किया जाएगा।
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