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बैंक धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई, यूको बैंक के 7 करोड़ केस में आया अदालत का फैसला

nidhi
2 Aug 2026 8:49 AM IST
बैंक धोखाधड़ी मामले में कार्रवाई, यूको बैंक के 7 करोड़ केस में आया अदालत का फैसला
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यूको बैंक 7 करोड़ धोखाधड़ी केस में बड़ा फैसला

नई दिल्ली : लगभग 25 साल पुराने यूको बैंक धोखाधड़ी मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बैंक से करीब 7 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में तीन पूर्व निदेशकों को दोषी करार दिया गया है, जबकि एक बैंक अधिकारी को अदालत ने बरी कर दिया है। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे के फैसले के बाद बैंकिंग क्षेत्र में भी इसकी चर्चा हो रही है।

मामला वर्ष 2000 के आसपास का बताया जा रहा है, जिसमें यूको बैंक से जुड़े एक वित्तीय लेनदेन में अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों और प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल करते हुए बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अभियोजन का आरोप था कि आरोपियों ने कथित तौर पर बैंक की ऋण प्रक्रिया और नियमों का उल्लंघन कर बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया।
वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मामले में पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं हैं। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कई स्तर शामिल होते हैं और केवल पद पर होने के आधार पर किसी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद तीन पूर्व निदेशकों को दोषी माना। हालांकि, एक बैंक अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं किया जा सका, जिसके बाद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
25 साल पुराने इस मामले का फैसला आने में लंबा समय लगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में दस्तावेज, गवाह और तकनीकी पहलू होने के कारण सुनवाई लंबी चल सकती है। ऐसे मामलों में अदालत को प्रत्येक साक्ष्य की बारीकी से जांच करनी होती है।
बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में अदालतें आमतौर पर यह जांच करती हैं कि क्या संबंधित व्यक्तियों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया, क्या गलत जानकारी देकर वित्तीय लाभ लिया गया और क्या बैंक को वास्तविक आर्थिक नुकसान पहुंचा।
फैसले के बाद दोषी ठहराए गए पूर्व निदेशकों की सजा पर अदालत आगे सुनवाई करेगी। फिलहाल मामले में दोषसिद्धि का आदेश जारी किया गया है, जबकि सजा की अवधि पर निर्णय अगली प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि बड़े वित्तीय मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन वर्षों बाद भी अदालतें साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देती हैं।

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