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NEET पेपर लीक मामले में आरोपियों ने मांगी लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग जांच की अनुमति

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई कर रही विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। अदालत ने यह निर्देश तीन आरोपियों की उस याचिका पर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी इच्छा से पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट और ब्रेन मैपिंग जांच कराने की अनुमति मांगी है।
मामले में आरोपी मंगल लाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल ने अदालत में आवेदन देकर कहा है कि वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और अपनी सच्चाई साबित करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक जांच करवाना चाहते हैं। उन्होंने पॉलीग्राफ टेस्ट के साथ-साथ ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) जांच, जिसे आमतौर पर ब्रेन मैपिंग के नाम से जाना जाता है, कराने की अनुमति मांगी है।
आरोपियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि इन वैज्ञानिक जांचों से मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि उन्हें स्वेच्छा से इन परीक्षणों से गुजरने की अनुमति दी जाए, ताकि जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
अदालत ने आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए CBI को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। जांच एजेंसी का जवाब मिलने के बाद अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
NEET पेपर लीक मामला देशभर में चर्चा का विषय रहा है। इस मामले की जांच CBI कर रही है और कई आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी पेपर लीक की पूरी श्रृंखला, इसमें शामिल लोगों और कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
पॉलीग्राफ टेस्ट और ब्रेन मैपिंग जैसी जांच तकनीकों का इस्तेमाल आमतौर पर किसी मामले में आरोपियों या संदिग्धों से अतिरिक्त जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता है। हालांकि, कानून के अनुसार किसी व्यक्ति की सहमति के बिना ऐसे परीक्षण नहीं कराए जा सकते। इसी वजह से आरोपियों ने अदालत से अनुमति मांगी है।
आरोपियों का कहना है कि वे जांच में सहयोग करना चाहते हैं और वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। वहीं, अब CBI का रुख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी इन परीक्षणों को लेकर क्या राय रखती है।
विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर लगातार नजर रख रही है। अदालत में आरोपियों की ओर से दायर याचिकाओं और जांच एजेंसी की दलीलों के आधार पर आगे के फैसले लिए जा रहे हैं।
CBI की जांच में अब तक कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक कैसे हुआ, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने के लिए किस तरह की गतिविधियां की गईं।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता देखने को मिली थी। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अदालत आरोपियों को वैज्ञानिक जांच की अनुमति देती है तो यह जांच प्रक्रिया का एक हिस्सा होगा, लेकिन ऐसे परीक्षणों के परिणामों को अदालत में किस तरह देखा जाएगा, यह कानूनी प्रावधानों और अन्य सबूतों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, अदालत ने CBI से जवाब तलब कर लिया है। अब सभी की नजर जांच एजेंसी के रुख और अदालत के अगले आदेश पर है।





