दिल्ली-एनसीआर

असली पनीर के नाम पर नकली उत्पाद बेचने का आरोप

Ratna Netam
14 Oct 2026 2:25 PM IST
असली पनीर के नाम पर नकली उत्पाद बेचने का आरोप
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में असली पनीर के नाम पर नॉन-डेयरी उत्पादों की बिक्री और होटल-रेस्तरां में ग्राहकों को परोसे जाने का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को अदालत ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाजार और खाने-पीने के प्रतिष्ठानों में डेयरी जैसे दिखने वाले उत्पादों को असली पनीर बताकर बेचा जा रहा है, जबकि ग्राहकों को उनकी वास्तविक सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत के सामने यह मुद्दा उठाया गया कि ग्राहकों को उनकी जानकारी के बिना दूध से बने पनीर के स्थान पर गैर-डेयरी सामग्री से तैयार उत्पाद परोसे जाने से रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।
पनीर के नाम पर गैर-डेयरी उत्पाद परोसने का आरोप
जनहित याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में कुछ खाद्य प्रतिष्ठानों द्वारा डेयरी एनालॉग उत्पादों को असली पनीर के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। डेयरी एनालॉग ऐसे उत्पाद होते हैं, जिन्हें डेयरी उत्पादों जैसा बनाने के लिए वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ये दिखने और इस्तेमाल में पारंपरिक डेयरी उत्पादों जैसे हो सकते हैं, लेकिन इनकी वास्तविक सामग्री अलग होती है।याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि ग्राहकों को इस अंतर के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे में उपभोक्ता यह मानकर खाद्य पदार्थ खरीदते या ऑर्डर करते हैं कि उनमें दूध से बना वास्तविक पनीर इस्तेमाल हुआ है।
रेस्तरां में ग्राहकों को कैसे पता चलेगा असली पनीर है या नहीं?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि जब कोई ग्राहक होटल या रेस्तरां में पनीर की डिश ऑर्डर करता है, तो सामान्य तौर पर उसकी अपेक्षा दूध से बने पनीर की होती है।हालांकि, वकील ने अदालत के सामने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यंजन में वास्तविक पनीर के बजाय गैर-डेयरी सामग्री से बने विकल्प का इस्तेमाल किया जाता है, तो ग्राहक इसकी पहचान कैसे करेगा।याचिका में तर्क दिया गया कि ग्राहकों के पास ऐसा कोई प्रभावी तरीका नहीं है, जिससे वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उनके द्वारा ऑर्डर किए गए भोजन में वास्तव में दूध से बना पनीर इस्तेमाल हुआ है या कोई दूसरा उत्पाद।
खाद्य सुरक्षा कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि खाद्य सुरक्षा संबंधी कानूनों और नियमों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि डेयरी एनालॉग उत्पादों को वास्तविक पनीर के नाम पर बेचने या परोसने पर रोक लगाई जा सके। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि खाद्य उत्पादों की सही पहचान और उनकी सामग्री की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचना आवश्यक है।मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि किसी खाद्य पदार्थ में दूध से बने पनीर के स्थान पर अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो इसकी जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। इससे उपभोक्ता अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार भोजन का चयन कर सकेंगे।
केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, FSSAI और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। अदालत की इस कार्रवाई से खाद्य पदार्थों की पहचान और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने का मुद्दा कानूनी जांच के दायरे में आ गया हैहालांकि, अदालत ने अभी याचिका में लगाए गए आरोपों को सही नहीं ठहराया है और न ही इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया है। संबंधित पक्षों के जवाब आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया में इन मुद्दों पर विचार किया जाएगा।इस मामले का प्रमुख सवाल यही है कि ग्राहकों को असली पनीर और उसके विकल्प के बीच अंतर की जानकारी किस तरह उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर यह जनहित याचिका खाद्य पदार्थों की पारदर्शिता, सही पहचान और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाती है।
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