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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से उम्र छिपाने का आरोप, तरुण हत्याकांड में नया मोड़

नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में हुए तरुण हत्याकांड में आरोपी की उम्र को लेकर नया विवाद सामने आया है। मृतक तरुण के चाचा टेकचंद ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर मुख्य आरोपी को उसकी वास्तविक जन्म तिथि के आधार पर बालिग मानते हुए वयस्क अपराधी की तरह मुकदमा चलाने की मांग की है।
टेकचंद ने उत्तम नगर थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए उसके परिवार की ओर से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर उसे नाबालिग साबित करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोपी के माता-पिता और नाना के खिलाफ जाली दस्तावेज तैयार करने और अदालत को गुमराह करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने अपने वकील सुमित चौहान के माध्यम से पुलिस को बताया कि 4 मार्च को उनके भतीजे तरुण की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी को पुलिस और अदालत के सामने नाबालिग साबित करने के लिए उसके परिवार की ओर से स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट को दस्तावेज के रूप में पेश किया गया।
टेकचंद का आरोप है कि आरोपी की वास्तविक जन्म तिथि कुछ और है और वह घटना के समय बालिग था। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि आरोपी की उम्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि वह बालिग पाया जाता है तो उसके खिलाफ वयस्क अपराधी के तौर पर मुकदमा चलाया जाए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी को कड़ी सजा से बचाने के उद्देश्य से दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। मृतक के परिवार का कहना है कि गंभीर अपराध के मामले में उम्र से जुड़ी सही जानकारी सामने आना बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में शिकायत प्राप्त हुई है और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आरोपी की उम्र निर्धारित करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और प्रमाणों का सत्यापन किया जाएगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपी घटना के समय बालिग था या नाबालिग।
कानून के अनुसार, किसी आरोपी की उम्र तय करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की जांच की जाती है। यदि दस्तावेजों में विरोधाभास पाया जाता है तो अदालत के निर्देश के अनुसार उम्र निर्धारण की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
तरुण हत्याकांड में अब तक जांच का एक अहम हिस्सा आरोपी की उम्र को लेकर केंद्रित हो गया है। मृतक पक्ष आरोपी को बालिग मानकर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से पेश किए गए दस्तावेज उसे नाबालिग बताते हैं।
इस मामले में पुलिस की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्थिति साफ होगी कि आरोपी पर किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई होगी या फिर वयस्क अपराधी के रूप में मुकदमा चलाया जाएगा। फिलहाल पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।





