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ABVP में उम्मीदवार चयन की कवायद, महिला नेतृत्व पर फोकस

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। संगठन के अंदर इस बार अध्यक्ष पद के लिए महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। ABVP की रणनीति सामाजिक और चुनावी समीकरणों को संतुलित करने के साथ छात्राओं के बीच संगठन की पकड़ और मजबूत करने की है।
सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार चयन को लेकर संगठन के भीतर लगातार बैठकों और चर्चा का दौर चल रहा है। हालांकि अभी तक किसी भी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। अंतिम फैसला ABVP के केंद्रीय नेतृत्व और चुनाव समिति की सहमति के बाद ही लिया जाएगा। संगठन इस बार ऐसा चेहरा उतारना चाहता है जो छात्र राजनीति में सक्रिय होने के साथ विश्वविद्यालय के अलग-अलग वर्गों में प्रभाव रखता हो।
DUSU अध्यक्ष पद के लिए इस बार करीब 13 छात्र नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें महिमा शर्मा, आयुषी शर्मा, रिया मलिक, यश डबास, ओजस्वी सहरावत, आलोक अत्री, हेमंत खोखर, नितिन तंवर, सनी डेढा, तुषार बैसला, लक्ष्य राज सिंह, प्रणव पराशर और ईशु मौर्य जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन दावेदारों की संगठनात्मक सक्रियता, छात्र आंदोलनों में भागीदारी, कॉलेज स्तर पर पकड़ और जीत की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
महिला उम्मीदवार के विकल्प पर चर्चा के बीच आयुषी शर्मा और रिया मलिक जैसे नामों की भी चर्चा संगठन के अंदर चल रही है। आयुषी शर्मा लक्ष्मीबाई कॉलेज से जुड़ी हैं, जबकि रिया मलिक श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज की छात्रा हैं। हालांकि संगठन की ओर से अभी किसी भी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
ABVP के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसा उम्मीदवार चुनने की है जो छात्र समुदाय के बीच व्यापक स्वीकार्यता रखता हो। संगठन का मानना है कि महिला नेतृत्व को आगे लाने से छात्राओं के बीच सकारात्मक संदेश जा सकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्राओं की बड़ी संख्या को देखते हुए महिला उम्मीदवार चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवार चयन में कई पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। इनमें छात्र नेता की संगठन के प्रति सक्रियता, कॉलेज और विभाग में प्रभाव, छात्र मुद्दों पर भूमिका, सार्वजनिक छवि और चुनाव जीतने की क्षमता प्रमुख हैं। इसके अलावा जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा जा रहा है ताकि सभी वर्गों के बीच संगठन की पहुंच बनी रहे।
DUSU चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव माना जाता है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे चार प्रमुख पदों के लिए होने वाला यह चुनाव केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसकी चर्चा होती है। देश के कई बड़े नेता अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से कर चुके हैं और DUSU का मंच उनके लिए शुरुआती पहचान का माध्यम रहा है।
पिछले वर्ष हुए DUSU चुनाव में ABVP का प्रदर्शन मजबूत रहा था। संगठन ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पदों पर जीत हासिल की थी। अध्यक्ष पद पर ABVP के आर्यन मान ने जीत दर्ज की थी, जबकि सचिव और संयुक्त सचिव पद भी संगठन के खाते में गए थे। वहीं उपाध्यक्ष पद पर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने जीत हासिल की थी।
इस बार ABVP अपनी मजबूत स्थिति को बरकरार रखने के लिए उम्मीदवार चयन में काफी सावधानी बरत रही है। महिला नेतृत्व को मौका देने का फैसला संगठन के लिए चुनावी रणनीति के साथ-साथ एक बड़ा संदेश भी साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।





