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अभिजीत दीपके ने फिर बढ़ाया सियासी पारा मनोज जरांगे को दी चेतावनी

Ratna Netam
11 Sept 2026 2:53 PM IST
अभिजीत दीपके ने फिर बढ़ाया सियासी पारा मनोज जरांगे को दी चेतावनी
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नई दिल्ली। नागरिक जनशक्ति पार्टी (CJP) से जुड़े आंदोलन को लेकर अभिजीत दीपके ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के संकेत दिए हैं। सोनम वांगचुक और मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा है कि अब उनकी बारी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
अभिजीत दीपके का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अलग-अलग मुद्दों को लेकर देश के कई हिस्सों में आंदोलन और प्रदर्शन चर्चा में रहे हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक के आंदोलन और मनोज जरांगे के मराठा आरक्षण आंदोलन का उदाहरण देते हुए अपनी रणनीति की ओर इशारा किया है। दीपके का दावा है कि CJP अपने मुद्दों को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है और संगठन आने वाले दिनों में आंदोलन को नए चरण में ले जाएगा।
उनकी चेतावनी के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि CJP आगे किस तरह का आंदोलन शुरू करेगी और उसकी प्रमुख मांगें क्या होंगी।
सोनम वांगचुक और मनोज जरांगे का किया जिक्र
अभिजीत दीपके ने अपनी बात रखते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे का नाम लिया। दोनों ही अलग-अलग मांगों को लेकर बड़े आंदोलनों का चेहरा रहे हैं।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े संवैधानिक और पर्यावरणीय मुद्दों को उठाते रहे हैं। दूसरी तरफ मनोज जरांगे महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कई बार अनशन और आंदोलन कर चुके हैं।
दीपके ने इन दोनों आंदोलनों का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि CJP भी अपनी मांगों को लेकर लंबे संघर्ष की तैयारी में है। उनका कहना है कि सरकार यदि समय रहते बातचीत नहीं करती है तो आंदोलन का स्वरूप बड़ा हो सकता है।
अभिजीत दीपके ने दी चेतावनी
अभिजीत दीपके के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सरकार को दी गई चेतावनी है। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि संगठन अपनी मांगों को लेकर शांत बैठने वाला नहीं है।
दीपके का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी, लेकिन मांगों को नजरअंदाज किया गया तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी तैयार रहने की अपील की है।
उनके बयान के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि संगठन आंदोलन की शुरुआत कब करेगा और इसका केंद्र कहां होगा।
CJP आंदोलन को लेकर तैयार हो रही रणनीति
CJP के भीतर पिछले कुछ समय से संगठनात्मक गतिविधियां तेज हुई हैं। अभिजीत दीपके अपने समर्थकों के साथ आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि संगठन पहले स्थानीय स्तर पर बैठकें और जनसंपर्क अभियान चला सकता है। इसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदर्शन और सभाओं के जरिए समर्थन जुटाने की रणनीति बनाई जा सकती है।
दीपके का जोर आंदोलन को केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रखने पर है। उनका प्रयास अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों को जोड़कर इसे व्यापक स्वरूप देने का दिखाई देता है।
हालांकि आंदोलन की अंतिम तारीख, स्थान और विस्तृत कार्यक्रम को लेकर औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
संगठन के अंदर भी रही है खींचतान
CJP के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। अभिजीत दीपके और दूसरे नेताओं के बीच रणनीति को लेकर अलग-अलग विचारों की चर्चा रही है।
इसके बावजूद दीपके लगातार अपने समर्थकों के बीच सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उनका फोकस अब आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक और सामाजिक मांगों को प्रमुखता से उठाने पर है।
ऐसे में आने वाला आंदोलन केवल सरकार पर दबाव बनाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि CJP के अंदर शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
मनोज जरांगे के आंदोलन से क्या संकेत?
मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे को लंबे समय तक चर्चा के केंद्र में बनाए रखा। अनशन, जनसभाओं और बड़े स्तर पर समर्थकों की लामबंदी के जरिए उन्होंने सरकार पर दबाव बनाया।
अभिजीत दीपके द्वारा जरांगे का नाम लेना इसी रणनीति से प्रेरणा लेने का संकेत माना जा रहा है। हालांकि दोनों आंदोलनों के मुद्दे और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं।
जरांगे के आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बड़ी संख्या में समर्थकों का सड़कों पर उतरना रहा है। दीपके भी अपने समर्थकों को संगठित कर इसी तरह जनदबाव तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं।
सोनम वांगचुक के आंदोलन का भी उदाहरण
सोनम वांगचुक ने लद्दाख के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन, अनशन और पैदल मार्च जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया है। उनके आंदोलनों ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
वांगचुक के आंदोलन का उल्लेख करके दीपके संभवतः यह संदेश देना चाहते हैं कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से लगातार दबाव बनाए रखने पर किसी मुद्दे को राष्ट्रीय बहस में लाया जा सकता है।
हालांकि दीपके की आगामी रणनीति में अनशन, मार्च, धरना या किसी दूसरे तरीके को अपनाया जाएगा, इस पर विस्तृत कार्यक्रम सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी
अभिजीत दीपके के बयान से यह साफ है कि संगठन का मुख्य उद्देश्य सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाना है। उन्होंने सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालने का संकेत भी दिया है।
ऐसे आंदोलनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण होती है। यदि शुरुआती स्तर पर संवाद स्थापित होता है तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता है। दूसरी ओर बातचीत नहीं होने पर प्रदर्शन लंबे समय तक चल सकता है।
दीपके ने अपने समर्थकों को संगठित रहने और आगे की घोषणा का इंतजार करने के लिए कहा है।
सोशल मीडिया पर भी अभियान की तैयारी
आज के दौर में किसी भी बड़े आंदोलन में सोशल मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दीपके और उनके समर्थक भी डिजिटल माध्यमों से लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
वीडियो संदेश, पोस्ट और लाइव प्रसारण के जरिए संगठन अपने आंदोलन की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकता है। इससे स्थानीय स्तर का मुद्दा कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ सकता है।
दीपके के हालिया बयान के बाद उनके समर्थकों के बीच भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
क्या होगा CJP का अगला कदम?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि चेतावनी देने के बाद अभिजीत दीपके का अगला कदम क्या होगा। क्या वह किसी बड़े धरने का ऐलान करेंगे या देशव्यापी अभियान शुरू किया जाएगा? क्या आंदोलन का स्वरूप अनशन जैसा होगा या रैली और मार्च के जरिए सरकार तक बात पहुंचाई जाएगी?
इन सवालों का जवाब संगठन के आगामी कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा के बाद मिलेगा। फिलहाल दीपके ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि वह आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में CJP की बैठकें और नेताओं के बयान इस बात के संकेत दे सकते हैं कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया पर भी नजर
अभिजीत दीपके की चेतावनी के बाद अब सरकार की प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा। यदि सरकार की ओर से संगठन की मांगों पर बातचीत की पहल होती है तो आंदोलन की रणनीति में बदलाव संभव है।
वहीं मांगों को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं तो आने वाले दिनों में प्रदर्शन तेज हो सकते हैं। आंदोलन की घोषणा होने पर प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक और मनोज जरांगे के आंदोलनों का उदाहरण देकर अपनी तैयारी का स्पष्ट संकेत दे दिया है। उनके बयान का संदेश है कि CJP अपने मुद्दों को लेकर पीछे हटने के बजाय आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
अब नजर इस बात पर है कि दीपके अपनी चेतावनी को किस तरह के आंदोलन में बदलते हैं, कितने लोग उनके साथ जुड़ते हैं और सरकार उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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