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सरकारी स्कूलों पर सवाल उठाने के बाद AAP विधायक सस्पेंड

Ratna Netam
4 Oct 2026 7:32 PM IST
सरकारी स्कूलों पर सवाल उठाने के बाद AAP विधायक सस्पेंड
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चंडीगढ़।पंजाब की राजनीति में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने बठिंडा जिले की मौर विधानसभा सीट से विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना को कथित अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विधायक द्वारा सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाने के कुछ ही समय बाद हुई।
विधायक के निलंबन पर भाजपा नेता आरपी सिंह ने रविवार को AAP सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मैसरखाना को इसलिए कार्रवाई का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होंने पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर अपनी ही सरकार के सामने सवाल उठाए। आरपी सिंह ने इसे सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर उठी असहमति से जोड़ते हुए कहा कि विधायक ने सरकार को जमीनी स्थिति बताने की कोशिश की थी।
आरपी सिंह ने कहा, “AAP विधायक सुखवीर मैसरखाना ने AAP के मुख्यमंत्री को आईना दिखाया, इसीलिए उन्होंने उन्हें पार्टी से सस्पेंड करवा दिया।” उन्होंने यह भी कहा कि मैसरखाना उन विधायकों में अलग हैं जिन्होंने अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने का फैसला किया और इसी कारण वे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को सीधे अनुभव कर रहे हैं।
मैसरखाना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक वीडियो जारी करते हुए अपने निर्वाचन क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि उनके बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विधायक ने सरकार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
मैसरखाना ने दावा किया था कि उन्होंने शिक्षकों की कमी की समस्या को पार्टी और सरकार के वरिष्ठ नेताओं के सामने पहले भी उठाया था। उन्होंने पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान तक अपनी बात पहुंचाने का दावा किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि यदि सत्ताधारी दल का विधायक होने के बावजूद वह अपने क्षेत्र के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, तो आम लोगों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
विधायक ने अपने वीडियो में कहा था कि वह एक जनप्रतिनिधि होने के साथ पिता के तौर पर भी यह मुद्दा उठा रहे हैं। उनके बेटे और बेटी सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। मार्च 2026 में प्रकाशित एक पड़ताल के अनुसार, पंजाब विधानसभा के जिन 31 AAP विधायकों के स्कूल जाने वाले बच्चे थे, उनमें मैसरखाना अकेले विधायक थे जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे।
इस पूरे मामले पर AAP ने विधायक के आरोपों को खारिज करते हुए निलंबन की वजह पार्टी विरोधी गतिविधियां और अनुशासनहीनता बताई है। पार्टी के प्रदेश महासचिव हरचंद सिंह बरसट की ओर से जारी आदेश में मैसरखाना की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की बात कही गई।
AAP ने मैसरखाना द्वारा उठाए गए शिक्षकों की कमी के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखा है। पार्टी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक संबंधित स्कूल में शिक्षकों के 30 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 25 पद भरे हुए हैं और पांच पद खाली हैं। स्कूल में करीब 580 विद्यार्थी और 19 सेक्शन बताए गए हैं। पार्टी का कहना है कि स्कूल के प्रिंसिपल ने खाली पांच पदों को भरने के लिए पहले ही अनुरोध भेज रखा है।
ऐसे में विवाद के दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। मैसरखाना का दावा है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है और उन्होंने इस समस्या को पार्टी नेतृत्व के सामने उठाने के बाद सार्वजनिक किया। दूसरी ओर AAP ने उनके बयानों को पार्टी और सरकार की छवि खराब करने से जोड़ते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
विधायक ने अपने वीडियो में यह भी संकेत दिया था कि इस मुद्दे को उठाने के कारण आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वह लोगों और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे।
पंजाब में शिक्षा आम आदमी पार्टी की प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में शामिल रही है। सरकार की ओर से ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ सहित सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े कार्यक्रम चलाए गए हैं। इसी वजह से सत्तारूढ़ पार्टी के अपने विधायक द्वारा शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाना राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
हाल के दिनों में पंजाब में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में तैनाती का मुद्दा भी सामने आया था। सितंबर में राज्य के शिक्षा सचिव ने उपायुक्तों को निर्देश दिया था कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगाया जाए और उन्हें शिक्षण कार्य पर केंद्रित रखा जाए।
मैसरखाना के निलंबन के बाद विपक्षी दलों को AAP सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है। भाजपा नेता आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियां बताने वाले विधायक की आवाज दबा रही है। हालांकि यह भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है और AAP का आधिकारिक पक्ष है कि कार्रवाई अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण की गई है।
अब इस मामले में राजनीतिक बहस सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता से आगे बढ़कर पार्टी के अंदर असहमति और अनुशासन के सवाल तक पहुंच गई है। एक तरफ मैसरखाना सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अपने सार्वजनिक बयान पर कायम हैं, जबकि दूसरी तरफ AAP ने उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की शिक्षा व्यवस्था और सत्तारूढ़ दल की अंदरूनी राजनीति दोनों को लेकर चर्चा में बना रह सकता है।
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