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नई दिल्ली। दिल्ली में सब्सिडी वाले चावल की खरीद और वितरण को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने रविवार को भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए तीन साल में करीब 22 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हो सकता है। हालांकि, यह फिलहाल विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार और असम की एक कॉर्पोरेशन ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) से सब्सिडी वाला चावल मांगा था। उनका कहना था कि इस चावल का उद्देश्य राजधानी में गरीबों और जरूरतमंद लोगों के बीच वितरण करना बताया गया था।
भारद्वाज ने इसी प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इसमें सरकारी सब्सिडी वाले चावल की खरीद, आवंटन और वितरण के स्तर पर बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से लागू नहीं किया गया तो आने वाले तीन वर्षों में सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
गरीबों के लिए मिलने वाले चावल पर सवाल
AAP नेता ने कहा कि सब्सिडी वाले चावल का मूल उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सस्ती दर पर खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में इस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका आरोप है कि यदि गरीबों के नाम पर उपलब्ध कराए जाने वाले चावल की खरीद और वितरण में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जिन्हें खाद्य सहायता की सबसे अधिक जरूरत है।
उन्होंने सरकार से इस पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि FCI से कितना चावल मांगा गया है, उसे किस कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा और दिल्ली में उसका वितरण किस एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा।
तीन साल में 22 हजार करोड़ का दावा
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए तीन साल में 22 हजार करोड़ रुपये तक का घोटाला हो सकता है। उन्होंने इसे एक संभावित वित्तीय अनियमितता के रूप में पेश करते हुए सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा।
हालांकि, अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार यह 22 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा AAP नेता द्वारा लगाए गए आरोप का हिस्सा है। इसे किसी जांच एजेंसी या आधिकारिक रिपोर्ट द्वारा साबित किया गया तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए इस दावे की वास्तविकता सामने आने के लिए संबंधित दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
FCI से सब्सिडी वाला चावल लेने का मामला
भारद्वाज ने दावा किया कि दिल्ली सरकार और असम की एक कॉर्पोरेशन ने FCI से सब्सिडी वाला चावल लेने की मांग की थी। FCI केंद्र सरकार के खाद्यान्न प्रबंधन और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
AAP नेता ने सवाल उठाया कि दिल्ली में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए आवंटित होने वाले चावल का वितरण किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लाभार्थियों की पहचान किस आधार पर होगी और यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि सब्सिडी वाले चावल का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले में दिल्ली सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार की योजना वास्तव में गरीबों तक सस्ता खाद्यान्न पहुंचाने की है तो उससे जुड़े सभी दस्तावेज और प्रक्रिया सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
AAP ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर आगे उठाएगी। पार्टी का तर्क है कि सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में निजी लाभ या बिचौलियों के हित में नहीं होना चाहिए।
भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर AAP
दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद से आम आदमी पार्टी लगातार भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाती रही है। चावल से जुड़ा यह आरोप भी इसी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर, ऐसे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है जब संबंधित सरकारी दस्तावेज, खरीद प्रक्रिया और वितरण व्यवस्था की जांच हो।
इस पूरे विवाद में अब दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सरकार यदि प्रस्तावित चावल खरीद और वितरण योजना का पूरा विवरण सामने रखती है तो आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जांच से ही साफ होगी तस्वीर
सब्सिडी वाले चावल को लेकर उठे विवाद में फिलहाल दो बातें अलग-अलग देखना जरूरी है। एक ओर AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने 22 हजार करोड़ रुपये के संभावित घोटाले का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर इस दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच या दस्तावेजी प्रमाण सामने आना बाकी है।
यदि सरकार की ओर से योजना से जुड़े आंकड़े, FCI से चावल की मांग, कीमत, मात्रा, लाभार्थियों की संख्या और वितरण व्यवस्था सार्वजनिक की जाती है तो पूरे मामले पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। साथ ही, यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो जांच एजेंसियों के माध्यम से जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
फिलहाल दिल्ली में सब्सिडी वाले चावल का मुद्दा एक नए राजनीतिक विवाद में बदल गया है। गरीबों और जरूरतमंदों के लिए खाद्यान्न से जुड़ी इस योजना को लेकर उठे सवालों के बीच अब निगाहें दिल्ली सरकार के जवाब और उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों पर टिकी हैं।





