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अब विदेशों तक पहुंचेगा आधार UIDAI ने शुरू की ग्लोबल विस्तार की तैयारी

Kavita2
10 Sept 2026 4:01 PM IST
अब विदेशों तक पहुंचेगा आधार UIDAI ने शुरू की ग्लोबल विस्तार की तैयारी
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नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI आधार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य अनिवासी भारतीयों यानी NRIs और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया यानी OCI कार्डधारकों तक भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था के लाभ पहुंचाना है। इसके लिए आधार की तकनीकी क्षमताओं और डिजिटल बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरभ विजय ने ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ के दौरान बातचीत में आधार की भविष्य की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संकेत दिया कि UIDAI अब आधार को केवल भारत के भीतर उपयोग होने वाली पहचान व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय इसकी वैश्विक उपयोगिता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में विचार कर रहा है।

सौरभ विजय ने कहा कि अब आधार के लिए मुख्य फोकस इसके बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने पर है। इसके अंतर्गत सिस्टम की सुरक्षा, विश्वसनीयता, उपलब्धता और बड़े स्तर पर पहचान प्रमाणीकरण संभालने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। विदेशी धरती पर रहने वाले भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के पात्र लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कानूनी तथा तकनीकी पहलुओं पर भी काम करना होगा।

हालांकि UIDAI ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अंतरराष्ट्रीय विस्तार कब शुरू होगा, किन देशों को पहले चरण में शामिल किया जाएगा अथवा विदेशों में आधार नामांकन की व्यवस्था किस तरह संचालित होगी। इसलिए इसे अभी प्रस्तावित योजना और भविष्य की दिशा के रूप में देखा जा रहा है। सेवा शुरू होने की समयसीमा और पात्रता संबंधी विस्तृत दिशानिर्देश आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।

वर्तमान में आधार का इस्तेमाल पहचान सत्यापन, बैंक खातों से जुड़ी सेवाओं, मोबाइल कनेक्शन, सरकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान और कई अन्य नागरिक सेवाओं के लिए किया जाता है। यदि विदेशों में इसकी पहुंच बढ़ती है तो पात्र NRIs और OCI कार्डधारकों को भारत से जुड़ी अनेक डिजिटल प्रक्रियाएं पूरी करने में सुविधा मिल सकती है। उन्हें बार-बार भौतिक दस्तावेज जमा करने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता कम हो सकती है।

विदेशों में रहने वाले भारतीयों को बैंकिंग, संपत्ति, निवेश, पेंशन, कर और अन्य सेवाओं के लिए पहचान सत्यापन की जरूरत पड़ती है। आधार का सुरक्षित डिजिटल प्रमाणीकरण उपलब्ध होने पर इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने की संभावना है। हालांकि किन सेवाओं में इसका उपयोग किया जा सकेगा यह संबंधित कानूनों, सरकारी दिशानिर्देशों और संस्थानों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधार के उपयोग के लिए डेटा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होगा। अलग-अलग देशों में व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल पहचान से संबंधित अलग कानून लागू हैं। UIDAI को यह सुनिश्चित करना होगा कि आधार से जुड़ी किसी भी वैश्विक व्यवस्था में उपयोगकर्ता की सहमति, निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से समझौता न हो।

इसके साथ साइबर हमलों, पहचान की चोरी और बायोमेट्रिक जानकारी के दुरुपयोग जैसे खतरों से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रणाली विकसित करनी होगी। वैश्विक विस्तार के दौरान डेटा कहां संग्रहित होगा, किस संस्था को कितनी जानकारी मिलेगी और प्रमाणीकरण के परिणाम किस तरह साझा किए जाएंगे जैसे सवालों के स्पष्ट जवाब भी आवश्यक होंगे।

UIDAI अपने प्रमाणीकरण ढांचे की क्षमता बढ़ाने पर पहले से काम कर रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्राधिकरण प्रतिदिन होने वाले लगभग 10 करोड़ प्रमाणीकरण को बढ़ाकर 25 से 30 करोड़ तक संभालने की तैयारी कर रहा है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित धोखाधड़ी पहचान और भविष्य की साइबर चुनौतियों के लिए नई क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों पर भी काम शामिल है। UIDAI की तकनीकी विस्तार योजना में वैश्विक अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने का भी उल्लेख किया गया है।

सौरभ विजय ने मई 2026 में UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद संभाला था। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह महाराष्ट्र कैडर के 1998 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विजय केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।

आधार का वैश्विक विस्तार भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा हो सकता है। भारत की आधार और यूपीआई जैसी डिजिटल प्रणालियों को कई देशों ने रुचि के साथ देखा है। आधार व्यवस्था ने बड़े पैमाने पर ऑनलाइन पहचान सत्यापन संभव बनाया है। अब UIDAI इसे अधिक सुरक्षित, तेज और अन्य प्रणालियों के साथ काम करने योग्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

NRIs के लिए आधार की सुविधाओं का विस्तार होने पर भारत में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सरल हो सकता है। वहीं OCI कार्डधारकों को इसमें शामिल करने के लिए उनकी पात्रता और भारत में निवास से संबंधित मौजूदा नियमों को ध्यान में रखना होगा। केवल वैश्विक विस्तार की घोषणा से प्रत्येक NRI या OCI कार्डधारक स्वतः आधार के लिए पात्र नहीं हो जाएगा। अंतिम पात्रता निर्धारित नियमों के अनुसार ही तय होगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक किसी डिजिटल पहचान प्रणाली को दूसरे देशों में लागू करना केवल तकनीकी परियोजना नहीं है। इसके लिए संबंधित देशों की सरकारों, वित्तीय संस्थानों, भारतीय दूतावासों और सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय आवश्यक होगा। विदेशों में सुरक्षित नामांकन केंद्र और शिकायत समाधान व्यवस्था तैयार करना भी महत्वपूर्ण चुनौती होगी।

UIDAI की यह पहल साकार होती है तो विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय और भारत के बीच डिजिटल संपर्क अधिक सुविधाजनक हो सकता है। फिलहाल प्राधिकरण आधार की तकनीकी नींव को विश्वस्तरीय बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। विस्तृत रूपरेखा, पात्रता, समयसीमा और देशों की सूची सामने आने के बाद ही योजना का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट होगा।

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