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Gen Z के सवालों से घिरी व्यवस्था

Saba Naaz
25 July 2026 7:22 PM IST
Gen Z के सवालों से घिरी व्यवस्था
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नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जेन-जी यानी नई पीढ़ी के छात्रों और युवाओं ने इसे जवाबदेही तय करने वाला कदम बताया है। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे की मांग नहीं थी, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की लड़ाई थी। छात्रों का कहना है कि इस कदम से भविष्य में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। छात्रों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में खामियों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका मानना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए और व्यवस्था में ऐसी सख्ती होनी चाहिए कि भविष्य में इस तरह की समस्याएं दोबारा सामने न आएं।

हिमाचल प्रदेश के शिमला से प्रदर्शन में शामिल हुए सूरज सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से उन्हें खुशी है, लेकिन यह आंदोलन सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा कि असली उद्देश्य यह संदेश देना था कि सत्ता और जिम्मेदारी वाले पदों पर बैठे लोगों को जवाबदेह होना पड़ेगा। अगर किसी व्यवस्था में गलती होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई लापरवाही न हो।

प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने इस पूरे मामले को किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से जोड़ने से इनकार किया। उनका कहना था कि यह छात्रों और युवाओं की आवाज है, जो बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष परीक्षाओं और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश की नींव होती है और इसमें होने वाली गड़बड़ियों का असर पूरे समाज पर पड़ता है।

क्लीनिकल साइकोलॉजी की छात्रा मेगन ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों को काफी निराश किया है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो उनका विश्वास टूट जाता है। उन्होंने कहा कि सीटों की सीमित संख्या और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ऐसी घटनाएं छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं।

दिल्ली के आयुष ने कहा कि लंबे समय से युवा शिक्षा व्यवस्था को लेकर परेशान थे और अपनी आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस्तीफे के बाद छात्रों में राहत की भावना है, लेकिन अब असली जरूरत व्यवस्था में बदलाव की है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में भी युवाओं की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने की जरूरत पड़ी तो वे आगे भी अपना समर्थन देंगे।

एक अन्य प्रदर्शनकारी माधव ने कहा कि पिछले दिनों जो घटनाएं हुईं, वे बेहद चिंताजनक थीं। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं थी, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाने की थी जिसमें गलतियों के लिए जिम्मेदारी तय हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सरकार शिक्षा क्षेत्र में जरूरी सुधारों की दिशा में कदम उठाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह आंदोलन युवाओं की जागरूकता को दिखाता है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और व्यवस्था से सवाल करना जरूरी है। छात्रों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और संबंधित संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मांगों पर चर्चा के बाद प्रदर्शन समाप्त करने का ऐलान किया गया। इसके बाद जंतर-मंतर से बड़ी संख्या में छात्र वापस लौटने लगे। हालांकि युवाओं ने साफ किया कि वे शिक्षा क्षेत्र में सुधार और पारदर्शिता को लेकर आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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