- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- टीम नवीन में दिखा...

x
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन के करीब सात महीने बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। 17 अगस्त 2026 को सामने आई इस टीम में पुराने और अनुभवी नेताओं को बरकरार रखने के साथ कई महत्वपूर्ण चेहरों की वापसी और नई नियुक्तियां हुई हैं। इसे केवल पदाधिकारियों की सामान्य अदला-बदली के बजाय भाजपा के अगले चुनावी दौर की संगठनात्मक तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। नई टीम में **13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आठ राष्ट्रीय महासचिव और 16 राष्ट्रीय सचिव** शामिल हैं।
सवाल यह है कि जेपी नड्डा के दौर की टीम के मुकाबले नितिन नबीन की टीम वास्तव में कितनी अलग है? क्या भाजपा अपने पुराने संगठनात्मक अंदाज को बदल रही है या फिर पुराने फॉर्मूले में नए चेहरे जोड़कर आगे बढ़ रही है?
पुराने चेहरों को हटाने के बजाय संतुलन
नई टीम को देखने पर सबसे पहले यह स्पष्ट होता है कि भाजपा ने पूरी तरह 'क्लीन स्लेट' वाला रास्ता नहीं चुना है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन **बीएल संतोष** को उनके महत्वपूर्ण पद पर बरकरार रखा गया है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल जैसे संगठनात्मक अनुभव वाले चेहरे भी महत्वपूर्ण भूमिका में बने हुए हैं।
इससे संकेत मिलता है कि नितिन नबीन ने नड्डा दौर के पूरे संगठनात्मक ढांचे को बदलने के बजाय निरंतरता और बदलाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
यानी रणनीति यह नहीं दिखती कि पुराने नेताओं को हटाकर पूरी तरह नई पीढ़ी को कमान सौंप दी जाए, बल्कि अनुभवी नेताओं के साथ नए और वापस लौटे चेहरों को जोड़ा गया है।
स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी अहम
नई टीम में सबसे ज्यादा चर्चा **स्मृति ईरानी और राम माधव** की हो रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं लंबे समय बाद भाजपा के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे में लौटे राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
राम माधव पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में पार्टी की रणनीति से जुड़े रहे हैं। ऐसे में उनकी वापसी बताती है कि पार्टी पुराने अनुभवी संगठनकर्ताओं को दोबारा सक्रिय भूमिका देने से परहेज नहीं कर रही।
स्मृति ईरानी की वापसी भी महत्वपूर्ण है। 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं बनी थीं। अब उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा ने साफ किया है कि चुनावी हार किसी नेता की संगठनात्मक उपयोगिता का अंत नहीं है।
डिजिटल टीम में बड़ा बदलाव
नड्डा और नबीन की टीम के बीच एक प्रमुख अंतर भाजपा के डिजिटल ढांचे में दिखाई देता है। अमित मालवीय नई व्यवस्था में आईटी सेल प्रमुख नहीं हैं और दीपक म्हस्के को महत्वपूर्ण डिजिटल जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि पिछले कई वर्षों में भाजपा की चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशन की भूमिका काफी बढ़ी है।
दीपक म्हस्के का आगे आना यह संकेत देता है कि पार्टी अपने डिजिटल अभियान में भी नए नेतृत्व और कार्यशैली को आजमाना चाहती है।
आगामी विधानसभा चुनावों से लेकर 2029 के लोकसभा चुनाव तक डिजिटल प्रचार भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहने वाला है।
पीयूष गोयल को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी
केंद्रीय मंत्री **पीयूष गोयल** को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। खास बात यह है कि नई टीम में वह ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं जिन्हें संगठन में शामिल किया गया है। उनके पिता वेद प्रकाश गोयल भी लंबे समय तक भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके थे।
गोयल को संगठन में लाने के फैसले ने संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों को भी हवा दी है, हालांकि फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
महिलाओं और नए सामाजिक समीकरण पर फोकस
नितिन नबीन की टीम में महिलाओं की भागीदारी भी ध्यान खींचती है। उपाध्यक्षों की सूची में वसुंधरा राजे, रेखा वर्मा और डी. पुरंदेश्वरी जैसे चेहरे हैं, जबकि स्मृति ईरानी को महासचिव बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई टीम को अनुभव, ऊर्जा और जमीनी जुड़ाव का मिश्रण बताया है।
तारिक मंसूर जैसे नेताओं को फिर जिम्मेदारी देकर भाजपा ने अल्पसंख्यक आउटरीच के अपने प्रयासों को भी जारी रखने का संकेत दिया है।
युवा अध्यक्ष लेकिन अनुभवी टीम
नितिन नबीन की उम्र और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनके अध्यक्ष बनने को भाजपा में पीढ़ीगत बदलाव के तौर पर देखा गया था। लेकिन उनकी पहली बड़ी राष्ट्रीय टीम यह बताती है कि पार्टी ने अचानक पीढ़ी परिवर्तन करने के बजाय चरणबद्ध बदलाव का रास्ता चुना है।
नई टीम में राम माधव, वसुंधरा राजे और स्मृति ईरानी जैसे अनुभवी नेताओं के साथ अपेक्षाकृत नए संगठनात्मक चेहरों का मिश्रण है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व में युवा नेताओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
क्या बदल रहा है भाजपा का अंदाज?
नड्डा से नबीन तक भाजपा की मूल संगठनात्मक शैली में कोई बुनियादी बदलाव अभी दिखाई नहीं देता। पार्टी अब भी अनुभव, क्षेत्रीय समीकरण, संगठनात्मक क्षमता और चुनावी जरूरतों के आधार पर टीम तैयार करती दिख रही है। फर्क यह है कि नबीन के दौर में कुछ पुराने दिग्गजों की वापसी, डिजिटल नेतृत्व में बदलाव और नए सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन पर अधिक जोर दिखाई देता है।
इसलिए 'टीम नबीन' को 'टीम नड्डा' से पूरी तरह अलग कहना जल्दबाजी होगी। इसे ज्यादा सही तरीके से **निरंतरता के साथ संगठनात्मक रीसेट** कहा जा सकता है।
अब अगली महत्वपूर्ण कड़ी भाजपा के संसदीय बोर्ड और दूसरी संगठनात्मक नियुक्तियां होंगी। इन्हीं से ज्यादा स्पष्ट होगा कि नितिन नबीन भाजपा की कार्यशैली में कितना बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं और पार्टी 2029 की तैयारी के लिए नेतृत्व की नई पीढ़ी को कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है।
TagsTeamnewchangeBJPstrategyटीमनवीनबदलावरणनीतिजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





