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सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में ECI के कामकाज की जांच की मांग की

Tara Tandi
25 Sept 2026 4:04 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में ECI के कामकाज की जांच की मांग की
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर इस रिट याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में ECI के कामकाज से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका में मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नाम कथित तौर पर हटाने, मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले मूल 'फॉर्म 6' को बहाल करने और पूरे आयोग की मंजूरी के बिना लिए गए कथित फैसलों को पलटने की जांच के निर्देश देने की मांग की गई है।
यह याचिका 23 सितंबर को प्रकाशित उन दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा चुनाव पैनल के भीतर लिए गए फैसलों पर जताई गई लिखित आपत्तियों का जिक्र है।
याचिका के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने नवंबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर लिखित रूप में असहमति और आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR), IT सिस्टम और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी आपत्तियां शामिल थीं।
याचिका में दावा किया गया है कि ECI के IT विभाग ने 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' में बिना किसी संशोधन के पहली बार मतदान करने वालों के लिए 'फॉर्म 6' में बदलाव करते हुए "पिछले SIR" से लिंक करना अनिवार्य कर दिया।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि IT महानिदेशक के तहत मतदाता सूची प्रबंधन के केंद्रीकरण के माध्यम से चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (EROs) की वैधानिक शक्तियों को कम कर दिया गया।
गोवा में 97 मतदाताओं के मामले का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि EROs पात्र पाए जाने के बावजूद उनके नाम बहाल करने में असमर्थ थे, क्योंकि ECINet सिस्टम में "रोलबैक/रिवर्सल" (वापस करने/बदलने) की सुविधा नहीं थी।
एक अन्य आरोप पश्चिम बंगाल से संबंधित है, जहां याचिका में दावा किया गया है कि उन नागरिकों के खिलाफ ECI के नाम से 16.10 लाख अपीलें दायर की गईं, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों द्वारा बहाल किए गए थे।
याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग द्वारा 28 जुलाई को जारी एक प्रशासनिक आदेश को भी चुनौती दी है। आरोप है कि इस आदेश ने पूरे आयोग की मंजूरी के बिना IT निगरानी ढांचे में बदलाव किया। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने कैबिनेट सेक्रेटरी टी.वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर इस आदेश पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 18 का उल्लंघन बताया।
याचिका में तर्क दिया गया है कि अगर वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर साबित हो जाती है, तो यह सरकारी ड्यूटी के दौरान किए गए कामों के दायरे में नहीं आएगी और इसलिए इसके लिए कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं किया जा सकता।
इसमें आगे यह भी तर्क दिया गया है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के नाम पर किए गए कामों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को दी गई सुरक्षा, उन कथित कामों पर लागू नहीं होगी जिनका ऐसी ड्यूटी से कोई उचित संबंध नहीं है।
याचिकाकर्ता ने कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ उचित आपराधिक कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की है।
यह PIL तीन सदस्यों वाले ECI के भीतर मतभेदों को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस के बीच दायर की गई है।
इस बीच, चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को जारी एक प्रेस नोट में उन सुझावों को खारिज कर दिया कि इन मतभेदों से संस्था में कोई "दरार" आई है। आयोग ने कहा कि कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था में आंतरिक आपत्तियां और लिखित नोट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ECI ने कहा कि उसके फैसले 2023 के कानून के तहत लिए जाते हैं और मतभेदों को बहुमत के फैसलों से सुलझाया जाता है।
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