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Delhi दिल्ली। भारत ने समुद्री प्रशासन को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'ई-समुद्र' नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म नाविकों (सीफेरर्स), शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और अन्य समुद्री हितधारकों को एकीकृत डिजिटल सेवाएं प्रदान करेगा। साथ ही सरकार ने नाविकों के कल्याण, सुरक्षा और सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए कई नई सुधारात्मक पहल की घोषणा भी की है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई में आयोजित 'सीफेरर्स सुरक्षा, संरक्षा एवं कल्याण और ई-समुद्र के उद्घाटन' कार्यक्रम में इस प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का आयोजन मंत्रालय के तहत महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (डीजीएमए) ने किया था।
ई-समुद्र के साथ डीजीएमए ने समुद्री प्रशासन के आधुनिकीकरण और नाविकों के कल्याण के लिए कई अन्य पहल भी प्रस्तुत कीं। इनमें हाल ही में शुरू की गई ई-नाविक 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली, आगामी सीफेयरर ट्रैकिंग डैशबोर्ड, डिजिटल सीफेयरर्स एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट और सीफेयरर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी के तहत बेहतर कल्याणकारी सुविधाएं शामिल हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र में हो रहे बदलाव के केंद्र में नाविक हैं। उन्होंने कहा, "मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत भारत समुद्री क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में नाविक सबसे महत्वपूर्ण हैं। हमारी प्रतिबद्धता है कि हर भारतीय नाविक सुरक्षित, सम्मानित और समर्थित महसूस करे।"
सोनोवाल ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता देश बन चुका है और जल्द ही इस क्षेत्र में दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत जहाज पुनर्चक्रण (शिप रीसाइक्लिंग) के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी केंद्र बन चुका है और अब दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने की दिशा में काम कर रहा है। ई-समुद्र प्लेटफॉर्म के बारे में उन्होंने कहा, "यह केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि समुद्री प्रशासन को सरल, पारदर्शी और हितधारक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से नाविकों के लिए जीवन को आसान और समुद्री क्षेत्र के लिए कारोबार को सुगम बनाया जाएगा।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने कहा कि भारत की समुद्री नीति अब तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें मर्चेंट शिपिंग एक्ट 2025, जिसमें नाविकों को प्रमुख कर्मी का दर्जा दिया गया है, मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 और न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन का सिद्धांत शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ई-समुद्र के माध्यम से समुद्री सेवाएं एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध होंगी। इसमें ऑनलाइन भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाणपत्र और पूरी तरह ऑनलाइन कार्यप्रवाह जैसी सुविधाएं होंगी।
भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या वर्ष 2013 में लगभग 1.03 लाख थी, जो बढ़कर 2025 में 3.23 लाख से अधिक हो गई है। इसके चलते डिजिटल सेवाओं, नियमन और कल्याणकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ गई है। महानिदेशक समुद्री प्रशासन श्याम जगन्नाथन ने ई-समुद्र को एक परिवर्तनकारी मंच बताते हुए कहा कि यह समुद्री प्रशासन को पारंपरिक कार्यालय आधारित व्यवस्था से निकालकर डिजिटल फर्स्ट और फेसलेस गवर्नेंस की ओर ले जाएगा।
कार्यक्रम में हाल के भू-राजनीतिक संकटों के दौरान वैश्विक शिपिंग पर पड़े प्रभावों को लेकर डीजीएमए की भूमिका पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय के अनुसार, डीजीएमए ने 16,000 से अधिक कॉल की निगरानी, 40,000 से ज्यादा संचार गतिविधियों का संचालन और 4,000 से अधिक फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की। इसके अलावा 'सागर में योग' अभियान के माध्यम से नाविकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने तथा 'सागर में सम्मान' कार्यक्रम के जरिए महिला नाविकों के लिए अवसर और सहयोग बढ़ाने के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया। मंत्रालय ने बताया कि हाल के वर्षों में महिला नाविकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कार्यक्रम के दौरान सोनोवाल ने भर्ती एजेंसियों, समुद्री क्षेत्र के प्रतिनिधियों, कैडेट्स और युवा समुद्री पेशेवरों से भी बातचीत की। उन्होंने युवाओं से सुरक्षा, पेशेवर उत्कृष्टता, सम्मान और निरंतर सीखने के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया तथा सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
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