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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के एक मंदिर में कोबरा नाग मिलने से हड़कंप मच गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी मंदिर में इससे पहले एक पुजारी को सांप के काटने की घटना सामने आ चुकी है। अब मंदिर के स्टोररूम में एक बार फिर कोबरा दिखाई दिया। सांप कबाड़ और पुराने सामान के नीचे छिपा हुआ था। अचानक कोबरा दिखाई देने के बाद मंदिर परिसर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई और सावधानी बरतते हुए उससे दूरी बनाई गई।
जानकारी के मुताबिक मंदिर परिसर के स्टोररूम में काफी सामान रखा हुआ था। इसी दौरान वहां सांप होने का पता चला। पहले यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि सांप किस प्रजाति का है, लेकिन बाद में उसके कोबरा होने की बात सामने आई। जहरीले सांप के मिलने की जानकारी फैलते ही मंदिर से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई।
इस घटना को लेकर डर की बड़ी वजह मंदिर में पहले हुई सर्पदंश की घटना भी है। बताया जा रहा है कि इससे पहले मंदिर के एक पुजारी को सांप ने काट लिया था। अब उसी परिसर में दोबारा कोबरा मिलने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मंदिर के आसपास सांपों के छिपने के लिए अनुकूल स्थान बने हुए हैं।
मंदिर के स्टोररूम में पुराने सामान और कबाड़ के नीचे कोबरा छिपा हुआ मिला। आमतौर पर लंबे समय तक बिना छेड़े पड़े सामान, अंधेरे कोने और कम आवाजाही वाली जगहें सांपों को अस्थायी रूप से छिपने की जगह दे सकती हैं। इसके अलावा अगर आसपास चूहे जैसे छोटे जीव मौजूद हों तो सांप भोजन की तलाश में भी ऐसी जगहों तक पहुंच सकते हैं।
हालांकि मंदिर में कोबरा कैसे पहुंचा, इसका निश्चित कारण विशेषज्ञ निरीक्षण के बिना नहीं बताया जा सकता। यह भी संभव है कि वह किसी खुले रास्ते, नाली, दरार या दूसरे प्रवेश मार्ग से परिसर में पहुंचा हो। दिल्ली जैसे बड़े शहर में भी समय-समय पर रिहायशी इलाकों, पार्कों और इमारतों में सांप निकलने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
कोबरा जहरीले सांपों में शामिल है और उसके करीब जाना खतरनाक हो सकता है। यही कारण है कि ऐसे सांप दिखाई देने पर खुद पकड़ने या उसे छेड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। प्रशिक्षित वन्यजीव बचाव दल या संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देना सुरक्षित तरीका है।
मंदिर जैसी जगह पर सांप मिलने की घटना ज्यादा संवेदनशील हो जाती है क्योंकि वहां नियमित रूप से श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। कई बार बच्चों और बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर के स्टोररूम या दूसरे हिस्से से सांप बाहर निकलकर सार्वजनिक स्थान तक पहुंचने की स्थिति गंभीर हो सकती थी।
घटना के बाद स्टोररूम में रखे कबाड़ और पुराने सामान को लेकर भी सतर्कता जरूरी हो गई है। लंबे समय तक एक ही जगह पड़े बक्से, लकड़ी, कपड़े और अन्य सामग्री के नीचे जीव-जंतुओं को छिपने की जगह मिल सकती है। ऐसे सामान को हटाते समय बिना सुरक्षा के हाथ डालना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
अगर किसी स्थान पर पहले भी सांप निकल चुका हो तो वहां नियमित सफाई और संभावित प्रवेश मार्गों की जांच उपयोगी हो सकती है। दरवाजों के नीचे ज्यादा खाली जगह, दीवारों की दरारें या पाइप और नालियों के आसपास मौजूद खुले हिस्सों को सुरक्षित करने से जोखिम कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ आम तौर पर यह भी सलाह देते हैं कि सांप दिखाई देने पर उसके चारों ओर भीड़ जमा न की जाए। कई बार लोग वीडियो या फोटो बनाने के लिए सांप के बेहद करीब चले जाते हैं। इससे सांप को खतरा महसूस हो सकता है और वह बचाव में हमला कर सकता है।
कोबरा सामान्य परिस्थितियों में मनुष्यों को शिकार नहीं मानता। सांप अक्सर इंसानों से दूर रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन अचानक सामना होने, उसे पकड़ने या रास्ता रोकने की स्थिति में सर्पदंश का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
मंदिर में पहले पुजारी को सांप काटने की घटना सामने आने के कारण इस बार कोबरा मिलने की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। परिसर की व्यवस्थित जांच कर यह देखना जरूरी होगा कि वहां सांपों के छिपने की दूसरी संभावित जगहें तो मौजूद नहीं हैं।
विशेष रूप से स्टोररूम में मौजूद कबाड़ को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित करना उपयोगी हो सकता है। जमीन पर सामान का बड़ा ढेर लगाने के बजाय उसे व्यवस्थित रैक में रखा जाए तो छिपे हुए जीवों का पता लगाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। सफाई के दौरान दस्ताने और बंद जूतों जैसे सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
सांप के काटने की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना है। सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या घरेलू इलाज के भरोसे समय बर्बाद करना जानलेवा हो सकता है। जिस अंग पर सांप ने काटा है उसे काटने, जहर चूसने या बहुत कसकर बांधने जैसे पुराने तरीकों से भी बचना चाहिए।
पीड़ित को शांत रखते हुए कम से कम शारीरिक गतिविधि करवाना और तत्काल चिकित्सा सहायता लेना बेहतर होता है। अस्पताल में डॉक्टर लक्षणों और जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार का फैसला करते हैं।
भारत में कोबरा को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित प्रजातियों में शामिल किया गया है। इसलिए सांप मिलने पर उसे मारना समाधान नहीं है। प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम के जरिए सुरक्षित तरीके से पकड़कर उचित प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ना बेहतर विकल्प होता है।
शहरी क्षेत्रों में सांप मिलने की घटनाएं यह भी बताती हैं कि शहर और वन्यजीवों के आवास के बीच दूरी लगातार कम हो रही है। निर्माण गतिविधियां, खाली प्लॉट, नाले और हरित क्षेत्र कई प्रजातियों को मानव बस्तियों के करीब ला सकते हैं।
बरसात और उसके आसपास के मौसम में भी सांपों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। जमीन में पानी भरने या उनके प्राकृतिक छिपने के स्थान प्रभावित होने पर सांप सूखी और सुरक्षित जगह तलाश सकते हैं। इसी दौरान घरों, दुकानों, मंदिरों और दूसरी इमारतों में सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
दिल्ली के इस मंदिर में कोबरा मिलने की घटना ने फिलहाल श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। पहले पुजारी को सांप काटने और अब स्टोररूम में कबाड़ के नीचे कोबरा मिलने की घटनाओं के बाद परिसर में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत दिखाई देती है।
सबसे जरूरी है कि मंदिर परिसर की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए तथा ऐसी जगहों की पहचान की जाए जहां सांप या दूसरे जीव छिप सकते हैं। किसी भी संदिग्ध स्थान पर बिना जांच हाथ न डालने और सांप दिखाई देने पर प्रशिक्षित बचाव दल को बुलाने जैसी सावधानियां भविष्य में दुर्घटना का जोखिम कम कर सकती हैं।
फिलहाल मंदिर के स्टोररूम में कोबरा मिलने की घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सांप दिखाई देने पर घबराने या उसे मारने की कोशिश करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर विशेषज्ञ सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। मंदिर में पहले हुई सर्पदंश की घटना को देखते हुए यहां नियमित निगरानी और सावधानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
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