दिल्ली-एनसीआर

राहुल गांधी वियतनाम से लौटेंगे तो होगा सत्ता परिवर्तन! संजय राउत के बयान से सियासी हलचल

Triveni
21 Oct 2026 7:58 AM IST
राहुल गांधी वियतनाम से लौटेंगे तो होगा सत्ता परिवर्तन! संजय राउत के बयान से सियासी हलचल
x
बीजेपी ने उठाए सवाल
नई दिल्ली/मुंबई : देश में 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा का जिक्र करते हुए बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के विदेश से लौटने के बाद देश में सत्ता परिवर्तन होगा। राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी विजयादशमी पर अपने संबोधन में सत्ता परिवर्तन और विरोध प्रदर्शनों को लेकर टिप्पणी की थी। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत ने राहुल गांधी के वियतनाम दौरे से जुड़े सवाल पर सत्ता परिवर्तन की बात कही। उनका बयान राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया है, न कि सरकार बदलने की किसी घोषित संवैधानिक प्रक्रिया या आधिकारिक योजना के रूप में।
'राहुल गांधी को आने दीजिए, फिर देखिए क्या होता है'
संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'हो जाएगा रिजीम चेंज, आप देखते रहिए। राहुल गांधी वियतनाम गए हैं न, आने के बाद देखो।' उनकी इस टिप्पणी को राहुल गांधी की विदेश यात्रा और देश में चल रही विपक्षी राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। राउत के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सत्ता परिवर्तन किस राजनीतिक या संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होने की बात कही जा रही है। इस टिप्पणी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
मोहन भागवत के बयान पर भी राउत की प्रतिक्रिया
संजय राउत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। राउत ने कहा कि मोहन भागवत जिस विषय पर बात कर रहे हैं, विपक्ष भी उसी विषय को उठा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उस सरकार के बाद बीजेपी सत्ता में आई थी, लेकिन अब जनता के एक वर्ग में मौजूदा शासन को लेकर असंतोष है। राउत ने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार को बदलना गलती थी। उन्होंने भागवत की टिप्पणियों की अपनी राजनीतिक व्याख्या करते हुए इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। हालांकि, मोहन भागवत के मूल संबोधन का संदेश राउत के निष्कर्ष से अलग था।
RSS प्रमुख ने कहा- सरकार बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं
नागपुर में 20 अक्टूबर को विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सिर्फ सत्ता परिवर्तन से समाज की समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने दुनिया के अलग-अलग देशों में जारी राजनीतिक अशांति और विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवस्था में बदलाव के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और संवाद जरूरी है। भागवत ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का स्थान है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने संविधान, कानून और सामाजिक मर्यादा का पालन करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, राजनीतिक असंतोष को समाज में विभाजन और अव्यवस्था का कारण नहीं बनने देना चाहिए।
यूरोप के प्रदर्शनों का उदाहरण देकर राउत ने उठाए सवाल
संजय राउत ने अपने बयान में यूरोप के विभिन्न देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब जनता का सरकार और व्यवस्था से विश्वास कम होता है, तो लोग सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराते हैं। राउत ने दावा किया कि भारत के युवाओं ने अब तक संयम बनाए रखा है और सरकार को इसके लिए उनका आभार व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर सरकार की आलोचना की और असंतोष को गंभीरता से लेने की बात कही।
अल्बानिया के कथित सुप्रीम कोर्ट दहन का वीडियो साझा करने पर विवाद
संजय राउत ने सोशल मीडिया पर अल्बानिया के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा एक वीडियो साझा किया था। उन्होंने दावा किया कि वहां प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार से नाराज होकर सुप्रीम कोर्ट को आग के हवाले कर दिया और संसद तथा मंत्रियों के आवासों को निशाना बनाया। इस पोस्ट के साथ उन्होंने भारत के लिए सबक लेने की बात भी कही। हालांकि, अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसे राउत के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उनकी पोस्ट पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी ने आरोप लगाया कि ऐसे उदाहरण देकर हिंसक आंदोलनों को उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है।राउत के बयान को लेकर कानूनी संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी पर भी बहस हुई।
बीजेपी ने राउत के बयान पर जताई आपत्ति
अल्बानिया से संबंधित पोस्ट को लेकर बीजेपी नेताओं ने संजय राउत की आलोचना की। बीजेपी ने उनके बयान को आपत्तिजनक बताते हुए आरोप लगाया कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला संदेश जा सकता है। वहीं, राउत ने अपनी टिप्पणी के संदर्भ में स्पष्टीकरण दिया और सरकार तथा संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए। इस विवाद में एक पक्ष राजनीतिक विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताता है, जबकि दूसरे पक्ष की आपत्ति विदेशी हिंसक घटनाओं को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने पर है।
राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर भी राजनीतिक बयानबाजी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वियतनाम दौरे को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। बीजेपी ने उनकी यात्रा के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को अनावश्यक राजनीतिक विवाद का विषय बनाया जा रहा है। संजय राउत ने राहुल गांधी की वापसी को सत्ता परिवर्तन से जोड़कर एक नई टिप्पणी की है, लेकिन इसे किसी वास्तविक आगामी सत्ता परिवर्तन की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
'रिजीम चेंज' को लेकर क्यों तेज हुई बहस?
हाल के दिनों में विपक्षी नेताओं के बयान, विरोध प्रदर्शनों और RSS प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन के कारण सत्ता परिवर्तन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर विपक्षी नेता सरकार की नीतियों और संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं RSS प्रमुख ने चेतावनी दी है कि केवल सत्ता परिवर्तन से सामाजिक समस्याओं का समाधान नहीं होता। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में केंद्र सरकार का गठन और परिवर्तन संविधान तथा संसदीय प्रक्रियाओं के अंतर्गत होता है। राजनीतिक नेताओं की भविष्यवाणियां अपने आप में सत्ता परिवर्तन का प्रमाण नहीं हैं। संजय राउत के ताजा बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा बढ़ी है., और अब विभिन्न दलों की अगली प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर रहेगी।
Next Story